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तीन विधायकों ने येदियुरप्पा को लिखा पत्र, हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग की
Thu, 08 Aug 2019 09:44 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 08 Aug 2019 09:44 AM IST
सार
- थिरथाहल्ली के विधायक अरागा जनानेंद्र, विराजपेट से विधायक केजी बोपैय्या और करवर से विधायक रूपाली नाइक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं।
- पत्र में विधायकों ने मुख्यमंत्री से हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज पुलिस केसों को वापस लेने का अनुरोध किया है।
- तीन अलग-अलग मामलों में लगभग 300 से अधिक हिंदू कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं।
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बीएस येदियुरप्पा (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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विस्तार
कर्नाटक में भाजपा के तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने 2013 से 2018 के बीच हुए सांप्रदायिक हिंसा के तीन मामलों में हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज पुलिस केसों को वापस लेने का अनुरोध किया है। येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री के तौर पर 26 जुलाई को कार्यभार संभाला था। थिरथाहल्ली के विधायक अरागा जनानेंद्र, विराजपेट से विधायक केजी बोपैय्या और करवर से विधायक रूपाली नाइक ने यह पत्र लिखे हैं।
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जनानेंद्र ने अपने पत्र में लिखा है कि नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में नवंबर 2014 में 300 से अधिक हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। विधायक ने कहा, '300 से अधिक निर्दोष हिंदू युवक जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं उनपर पुलिस ने राजनीतिक दबाव में 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। आपसे अनुरोध है कि इन मामलों को वापस लेने का आदेश दिया जाए।'
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बच्ची की मौत और पुलिस शिकायत ने उस समय राजनीतिक रूप ले लिया जब भाजपा ने सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि पुलिस संदिग्धों को बचाने की कोशिश कर रही है क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सरकार ने मामले की जांच राज्य की साआईडी को दे दी थी जबकि भाजपा सीबीआई जांच कराने की मांग कर रही थी।
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सीआईडी ने अपने बयान में कहा था कि जांच से पता चला है कि लड़की ने आत्महत्या की है क्योंकि वह अपने ग्रेड से नाखुश थी। आरोप के अनुसार उसका अपहरण के बाद दुष्कर्म नहीं किया गया था। सीआईडी ने कहा, 'न ही उसका अपहरण हुआ था और न ही उसके साथ दुष्कर्म हुआ था।' भाजपा विधायक बोपैय्या ने नंवबर 2015 में टीपू जयंती समारोह को लेकर कोडागु में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज हुए केस वापस लेने की गुहार लगाई है।
कोडागु में टीपू सुल्तान की जयंती के उत्सव ने कई दक्षिणपंथी हिंदुत्व संगठनों के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर दी थी। 18 वीं शताब्दी के मैसूर शासक को अत्याचारी माना जाता है। मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभालने के बाद येदियुरप्पा ने टीपू जयंती उत्सव को रद्द कर दिया है। करवार के विधायक ने नाइक ने 2018 में होन्नावर में 18 वर्षीय परेश मेस्ता की मौत के बाद हुए सांप्रदायिक हिंसा को लेकर हिंदू कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।
होन्नावर में विवादित स्थल को लेकर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुई झड़प के बाद मेस्ता तालाब में मृत पाए गए थे। तब सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा चला था कि वह संघ कार्यकर्ता थे जिसकी मुस्लिमों ने हत्या कर दी थी। जबकि फोरेंसिक जांच में यह बात सामने आई थी कि उनकी मौत डूबने से हुई थी। घटना के बाद क्षेत्र लगभग छह दिनों तक अशांत था। दक्षिणपंथी लोगों ने अल्पसंख्यकों पर हमले किए थे।