अब महिलाओं को 50% आरक्षण देने के लिए कानून की हो रही तैयारी
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देश की संसद में महिला आरक्षण विधेयक बीते 2 दशक से अटका हुआ है लेकिन केंद्र सरकार नगर निकाय और पंचायती व्यवस्था में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए कानून लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री चौधरी बिरेंद्र सिंह ने कहा है कि इस साल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्थानीय निकाय की सीटों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रवाधान जाएगा। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार चौधरी बिरेंद्र सिंह ने कहा कि मंत्रालय ने शुरुआत में केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सीटें आरक्षित करने का विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में हमने राज्यों के साथ विचार विमर्श भी किया है और कुछेक को छोड़कर, सभी इस मुद्दे पर सहमत थे।
सिंह ने कहा कि स्थानीय निकाय दो मंत्रालयों के अंतर्गत आते हैं जिसमें शहरी विकास और ग्रामीण विकास शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार शहरी विकास मंत्रालय इस संबंध में विचार विमर्श कर लेगा, फिर यह कानून ड्राफ्ट किया जाएगा और इसी साल इसे संसद में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि इस समय 1993 में पास हुए संविधान 73वें एवं 74 वें संविधान संशोधन के मुताबिक कुल सीटों में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाती हैं। तब से लेकर अब तक 16 राज्यों ने पंचायती राज में 50 प्रतिशत का आरक्षण तय कर रखा है। इसमें आंध्र प्रदेश,असम, बिहार, छत्तीसगढ, हिमांचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र, ओड़िशा, राजस्थान, तमिलनाडु , त्रिपुरा, उत्तराखण्ड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
सिंह ने कहा कि इनमें से कुछ राज्यों ने आरक्षण को सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित न रख कर शहरी स्थानीय निकायों में भी लागू किया है। सिंह ने कहा कि यदि इन राज्यों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो इसे बाकी राज्यों में भी लागू करने के लिए सोचा जा सकता है। हालांकि संसद में यह कानून '110 वें संविधान संशोधन विधेयक(2010) : स्थानीक निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान' और '112 वें संशोधन में नगर निकायों में महिलाओं के 33 प्रतिशत के स्थान पर 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान' के रूप में रखा जा चुका था लेकिन यह 15 वीं लोकसभा भंग होने के साथ ही ये समाप्त हो गए थे।