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संसद में बोले रविशंकर, तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाकर रहेंगे
Thu, 25 Jul 2019 03:03 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 25 Jul 2019 03:03 PM IST
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रविशंकर प्रसाद
- फोटो : ANI
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न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। इसमें विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की संरक्षा करने और उनके पतियों द्वारा तीन बार तलाक बोलकर विवाह तोड़ने को निषेध करने का प्रावधान किया गया है। बहस के दौरान रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाने संबंधी विधेयक सियासत, धर्म, सम्प्रदाय का प्रश्न नहीं है बल्कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय का सवाल है। हिन्दुस्तान की बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी इस पहल का सभी को समर्थन करना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और कानून लाने के बाद मुझे लगा था कि ये रुक जाएगा। जुलाई तक तीन तलाक के 574 मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 345 तीन तलाक के मामले सामने आए हैं। अगर दुनिया के 20 से अधिक मुल्कों ने तीन तलाक को नियंत्रित किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे गलत बताया है। मामूली बातों पर तलाक दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी महिलाएं मुश्किलें झेल रही हैं। मैं उन्हें क्या जवाब देता। ये महिला की गरिमा और सम्मान का मामला है। तीन तलाक मामलों में महिलाओं को न्याय दिलाकर रहेंगे।
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(इस दौरान रविशंकर प्रसाद ने अमर उजाला की खबर का भी जिक्र किया। )
कांग्रेस ने किया विरोध
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक पर चर्चा और पारित करने के लिए पेश किए जाने का विरोध करते हुए इस संबंध में सरकार द्वारा फरवरी में लाए गए अध्यादेश के खिलाफ सांविधिक संकल्प पेश किया। संकल्प पेश करने वालों में अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, प्रो. सौगत राय, पी के कुन्हालीकुट्टी और असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हैं।
प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस विधेयक को भाजपा सरकार लक्षित एजेंडे के रूप में लाई है । यह राजनीतिक है । इस बारे में अध्यादेश लाने की इतनी जरूरत क्यों पड़ी । उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में उच्चतम न्यायालय का फैसला 3:2 के आधार पर आया।
वहीं, रविशंकर ने कहा कि संविधान के मूल में लैंगिक न्याय है और महिलाओं और बच्चों के साथ किसी भी तरह से भेदभाव को निषेध किया गया है। मोदी सरकार के मूल में भी लैंगिक न्याय है। हमारी योजनाएं जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उज्जवला योजना महिलाओं को सशक्त बनाने से जुड़ी हैं । इसी दिशा में पीड़ित महिलाओं की संरक्षा के लिये हम कानून बनाने की पहल कर रहे हैं।
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Union Minister Ravi Shankar Prasad speaks on Triple Talaq Bill in Lok Sabha. pic.twitter.com/E7jNAPsBYY
— ANI (@ANI) July 25, 2019विज्ञापन
रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और कानून लाने के बाद मुझे लगा था कि ये रुक जाएगा। जुलाई तक तीन तलाक के 574 मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 345 तीन तलाक के मामले सामने आए हैं। अगर दुनिया के 20 से अधिक मुल्कों ने तीन तलाक को नियंत्रित किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे गलत बताया है। मामूली बातों पर तलाक दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी महिलाएं मुश्किलें झेल रही हैं। मैं उन्हें क्या जवाब देता। ये महिला की गरिमा और सम्मान का मामला है। तीन तलाक मामलों में महिलाओं को न्याय दिलाकर रहेंगे।
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(इस दौरान रविशंकर प्रसाद ने अमर उजाला की खबर का भी जिक्र किया। )
कांग्रेस ने किया विरोध
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक पर चर्चा और पारित करने के लिए पेश किए जाने का विरोध करते हुए इस संबंध में सरकार द्वारा फरवरी में लाए गए अध्यादेश के खिलाफ सांविधिक संकल्प पेश किया। संकल्प पेश करने वालों में अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, प्रो. सौगत राय, पी के कुन्हालीकुट्टी और असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हैं।
प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस विधेयक को भाजपा सरकार लक्षित एजेंडे के रूप में लाई है । यह राजनीतिक है । इस बारे में अध्यादेश लाने की इतनी जरूरत क्यों पड़ी । उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में उच्चतम न्यायालय का फैसला 3:2 के आधार पर आया।
वहीं, रविशंकर ने कहा कि संविधान के मूल में लैंगिक न्याय है और महिलाओं और बच्चों के साथ किसी भी तरह से भेदभाव को निषेध किया गया है। मोदी सरकार के मूल में भी लैंगिक न्याय है। हमारी योजनाएं जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उज्जवला योजना महिलाओं को सशक्त बनाने से जुड़ी हैं । इसी दिशा में पीड़ित महिलाओं की संरक्षा के लिये हम कानून बनाने की पहल कर रहे हैं।