डॉक्टरों और मरीज के बीच अब नहीं होगी भाषा की दिक्कत, उनकी भाषा में ही मिलेगा इलाज
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टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में मरीजों की भाषा सबसे बड़ी समस्या थी। लेकिन अब मरीज किसी भी भाषा में अपनी परेशानी डॉक्टर को बता सकेंगे और डॉक्टर भी उसे अपनी मनचाही भाषा में सुन सकेंगे। वहीं डॉक्टर भी इलाज को मरीज तक उसकी अपनी भाषा में पहुंचा सकेंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का दावा है कि इस तकनीकी से इलाज में बेहतरी आएगी।
आशा वर्कर भी कर सकेंगी इस्तेमाल
इस तकनीकी का विकास भारत की सिंट हेल्थकेयर और इजरायल की जीओएल कंपनी ने मिलकर किया है। कंपनी का दावा है कि अब लोगों को सुदूर क्षेत्रों में भी अच्छे डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। थ्रीजी इंटरनेट सेवा पर चलने वाली उसकी तकनीकी इस मामले में अनूठी होगी कि इनमें उपयोग हो रही साधारण मशीनों को गांवों में आशा जैसे प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्यकर्मी भी आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगी। एक साधारण से सूटकेस में रखकर इसे कहीं भी ले जाया जा सकेगा। यहां तक कि कई मामलों में मरीज स्वयं ही इनके माध्यम से ईसीजी जैसी कई जांच कर सकेंगे।
तकनीकी का कई स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है। प्राथमिक स्तर पर इस तकनीकी पर द इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नीति आयोग ने सकारात्मक टिप्पणी की है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो, जल्दी ही इस तकनीक को देश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
महिलाओं के लिए वरदान
सिंट हेल्थकेयर की निदेशक मोनिका सेठ ने अमर उजाला को बताया कि भारत में गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में यह तकनीकी बेहद कारगर है। ग्रामीण महिलाएं अपनी कई समस्याएं पुरुष डॉक्टरों को नहीं बतातीं है। विशेषकर गर्भावस्था में बच्चे से जुड़ी समस्याओं पर डॉक्टरों से चर्चा नहीं हो पाती, जिससे उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाता। लेकिन इस तकनीकी में मशीन को महिला अपने स्तर पर ही अपने पेट पर रख सकेगी। इसके बाद दूर बैठा डॉक्टर बच्चे की धड़कन सुन सकेगा। वह उसकी श्वास संबंधी जांच भी कर सकेगा। बच्चे के वजन इत्यादि से संबंधित जांच भी की जा सकेगी।
इलाज के खर्च पर 80 फीसदी की कटौती
मोनिका सेठ ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर रोग की शुरुआत में ही उसकी रोकथाम पर सही तरीके से काम किया जा सके, तो इससे इलाज के खर्च पर 80 फीसदी की कटौती की जा सकती है। इस तकनीकी के कारण भी लोग अपनी दिल, श्वास और शरीर के कई अन्य मानकों का निरंतर चेक कर सकेंगे और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर स्वयं को कई रोगों से बचा सकेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह तकनीकी सभी प्राथमिक स्वास्थ्य सेंटरों पर उपलब्ध हो जाएगी।