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लैंसेट स्टडी: 2020 में दुनिया भर में करीब 53 लाख लोगों की कैंसर से मौत, 70 फीसदी की बच सकती थी जान

Thu, 28 Sep 2023 06:06 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 28 Sep 2023 06:06 AM IST
सार

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) से कैंसर मृत्यु दर पर ग्लोबोकैन 2020 डाटा का इस्तेमाल करते हुए शोधकर्ताओं ने अध्ययन के जरिए सुझाव दिया है कि कैंसर बीमारी का समय रहते पता लगाने और इलाज शुरू करने से लाखों लोगों की मौत रोकी जा सकती है।

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Lancet study: Around 53 lakh people died of cancer worldwide in 2020
विश्व कैंसर दिवस - फोटो : istock

विस्तार

साल 2020 में कैंसर से होने वाली असामयिक मौतों में से 70 फीसदी की जान बचाई जा सकती थी। इनमें से 30 फीसदी रोगियों का उपचार मौजूद था। द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित चिकित्सा अध्ययन में बताया कि 2020 में दुनिया भर में करीब 53 लाख लोगों की कैंसर से मौत हुई है। इसमें 29 लाख पुरुष और 23 लाख महिलाएं शामिल थीं। मरने वाली महिलाओं में से करीब 13 लाख की मौत तंबाकू, शराब, मोटापा और संक्रमण की वजह से हुई।

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इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) से कैंसर मृत्यु दर पर ग्लोबोकैन 2020 डाटा का इस्तेमाल करते हुए शोधकर्ताओं ने अध्ययन के जरिए सुझाव दिया है कि कैंसर बीमारी का समय रहते पता लगाने और इलाज शुरू करने से लाखों लोगों की मौत रोकी जा सकती है। अगर महिलाओं की बात करें तो करीब 15 लाख मौतों को सालाना टाला जा सकता है। 

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आईएआरसी में कैंसर निगरानी के उप शाखा प्रमुख प्रो. इसाबेल सोरजोमातरम का कहना है कि जब भी महिलाओं में कैंसर की बात आती है तो स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर बात होने लगती है लेकिन लोगों को यह भी जानना चाहिए कि हर साल 70 वर्ष से कम उम्र की लगभग तीन लाख महिलाएं फेफड़ों के कैंसर से मर जाती हैं। इनके अलावा 1.60 लाख महिलाओं की मौत कोलोरेक्टल कैंसर से हो रही है। इसके अलावा, कुछ दशकों से कई उच्च आय वाले देशों में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें स्तन कैंसर से होने वाली मौतों की तुलना में अधिक रही हैं।
 

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वाणिज्यिक उत्पाद महिलाओं में कैंसर को दे रहा बढ़ावा
अध्ययन में यह भी कहा है कि महिलाओं में कैंसर के कारणों और जोखिम कारकों की अधिक जांच की भी आवश्यकता है क्योंकि पुरुषों में कैंसर के जोखिम कारकों की तुलना में उन्हें कम समझा जाता है। इसके अलावा, महिलाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाणिज्यिक उत्पादों जैसे स्तन प्रत्यारोपण, त्वचा को हल्का करने वाले और बालों को आराम देने वाले उत्पाद भी कैंसर को बढ़ावा देने में योगदान कर रहे हैं।
 

हाल ही में जारी लैंसेट कमीशन की एक नई रिपोर्ट बताती है कि लैंगिक असमानता और भेदभाव महिलाओं के कैंसर के जोखिम कारकों से बचने के अधिकारों और अवसरों को प्रभावित करते हैं। साथ ही समय पर उनकी जांच और देखभाल में बाधा डालते हैं।

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