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Lalit Modi: न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी के लिए ललित मोदी ने मांगी माफी, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

Wed, 19 Apr 2023 02:04 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 19 Apr 2023 02:04 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ललित मोदी को न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। पीठ ने मोदी को उनकी टिप्पणी के लिए फटकार लगाते हुए उन्हें चेतावनी दी कि इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति के गंभीर परिणाम होंगे।
 

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Lalit Modi tenders apology over remarks against judiciary after Supreme Court Direction
ललित मोदी - फोटो : Instagram

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ की गई अपनी टिप्पणी पर माफी मांगी। ललित मोदी ने कहा, मैं 13 जनवरी के सोशल मीडिया पोस्ट और 30 मार्च के ट्वीट के लिए बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूं। मेरे मन में भारतीय न्यायिक प्रणाली और न्यायालयों के लिए सर्वोच्च सम्मान है। मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा जो न्यायपालिका की गरिमा के असंगत हो।

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ललित मोदी को न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने मोदी को उनकी टिप्पणी के लिए फटकार लगाते हुए उन्हें चेतावनी दी कि इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति के गंभीर परिणाम होंगे।
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हलफनामे में दिए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं अदालत
पीठ ने कहा था कि मोदी कानून और संस्था से ऊपर नहीं हैं। उन्हें माफी मांगने से पहले भारतीय न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने वाली सोशल मीडिया पर भविष्य में कोई पोस्ट नहीं करने की शपथ के साथ एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया था। पीठ ने मामले की सुनवाई 24 अप्रैल के लिए स्थगित करते हुए कहा कि अदालत ने मोदी की ओर से दायर जवाबी हलफनामे का अध्ययन किया है। वह उनकी ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है। न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले मोदी के ट्वीट पर वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें न्यायाधीशों के खिलाफ निंदनीय टिप्पणी की गई थी।
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ललित मोदी ने एक ट्वीट में किया था कि केवल यह स्पष्ट करने के लिए कि ये दलाल झूठ फैलाकर भारत और इसकी न्यायपालिका को बदनाम करते हैं। वे दिखावे के अलावा और कुछ नहीं कर सकते और फिक्सिंग के लिए पैसे की मांग करते हैं। 

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