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Hindi News ›   India News ›   Lakhs of children waiting to be adopted but it takes 3 to 4 years to adopt single child in India Supreme Court

SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लाखों बच्चों को इंतजार, फिर भी देश में एक बच्चे को गोद लेने में लग रहे तीन-चार साल

Fri, 26 Aug 2022 09:34 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 26 Aug 2022 09:34 PM IST
सार

बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने को लेकर एक गैर-सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केंद्र सरकार की ओर से जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा।

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Lakhs of children waiting to be adopted but it takes 3 to 4 years to adopt single child in India Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश में बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि लाखों अनाथ बच्चे गोद लिए जाने के लिए इंतजार कर रहे हैं, फिर भी देश में क बच्चे को गोद लेने के लिए तीन-चार साल लगते हैं। इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की जरूरत है। इससे पहले कोर्ट ने मौजूदा प्रक्रिया को बहुत थकाऊ करार दिया था।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि देश में कई लोग बच्चे को गोद लेने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह प्रक्रिया इतनी ज्यादा कठिन है कि कारा (CARA) के जरिए एक बच्चे को गोद लेने में तीन से चार साल का समय लग जाता है। क्या आप भारत में ऐसी कल्पना कर सकते हैं? इसे आसान बनाया जाना चाहिए। लाखों बच्चों को इससे फायदा होगा।
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दरअसल, बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने को लेकर एक गैर-सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केंद्र सरकार की ओर से जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा।
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इस पर पीठ ने कहा कि वह बाल विकास मंत्रालय के किसी जिम्मेदार व्यक्ति को बैठक बुलाने और एनजीओ 'द टेंपल ऑफ हीलिंग' के सुझावों पर गौर करने को कहे। इसके साथ ही कोर्ट ने एक रिपोर्ट तैयार कर उसे दाखिल करने को कहा। पीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए अक्टूबर में सूचीबद्ध किया।

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