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सहानुभूति जताने की सियासत: राजनीति की चाशनी में लखीमपुर मामला 'प्रबुद्ध वर्ग' बनाम 'सिख' हो रहा

Fri, 08 Oct 2021 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary लखीमपुर खीरी से लौटकर आशीष तिवारी
लखीमपुर खीरी से लौटकर आशीष तिवारी Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Oct 2021 06:32 PM IST
सार

दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफ़ेसर हरीश धीमान कहते हैं कि ऐसे मामलों में हमेशा राजनीति करने वाली पार्टियां वहीं ज्यादा झुकाव दिखाती हैं जहां उनका वोटर शामिल होता है। इसके अलावा सत्ता पक्ष से दूरी बनाने वाले पक्ष में शामिल होना विपक्षी पार्टियों का न सिर्फ काम होता है बल्कि उनकी रणनीति भी होती है...

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Lakhimpur Kheri Violence: People of other castes angry when leaders express condolences only to the sikh families
लवप्रीत के परिजनों से राहुल प्रियंका ने की मुलाकात - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

लखीमपुर खीरी में हुए बवाल का मामला राजनीति के चरम पर पहुंच गया है। राजनीति भी इस हद तक कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य पार्टियों के सभी बड़े नेताओं के पहुंचने के बाद मामला 'सिख समुदाय' बनाम 'प्रबुद्ध वर्ग' जैसा बनने लगा है। दरअसल अब इस पूरे मामले को राजनीति के नए रास्ते की ओर ले जाया जाने लगा है। जहां अलग-अलग पार्टियों के नेताओं के आने के बाद मृतक सिखों के परिजनों से मिलकर दी जाने वाली सहानुभूति को अब प्रबुद्ध वर्ग समुदाय के लोग अलग नजरिए से देखने लगे हैं। लखीमपुर खीरी के प्रबुद्ध वर्ग समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है की राजनीतिक पार्टियों को सभी मृतकों और उनके परिजनों को एक नजर से देखना चाहिए। ताकि उनका संदेश महज राजनीति तक सीमित न रहकर लोगों के दुख-दर्द में शामिल होने जैसा प्रतीत हो।

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कई बड़े नेता सांत्वना देने पहुंचे

लखीमपुर खीरी में हुए बवाल में आठ लोगों की मौत हुई। पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस से राहुल गांधी प्रियंका गांधी समेत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी समेत कई बड़े नेता सांत्वना देने पहुंचे। सिर्फ कांग्रेसी नहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तथा बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा लखीमपुर पहुंचे। बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलनों में हिस्सा लेने वाले लखीमपुर खीरी के एसएन द्विवेदी कहते हैं कि जिस तरीके से लखीमपुर में सभी पार्टी के लोग सिर्फ सिख समुदाय के मृतकों के परिजनों के यहां से मिलकर वापस जा रहे हैं वह महज राजनीतिक ही ज्यादा दिखती है। द्विवेदी के मुताबिक राजनीतिक दलों को सिर्फ सिख समुदाय ही नहीं बल्कि सभी मृतकों के परिजनों से मिलना चाहिए। सांत्वना देने के लिए सभी परिजनों से मिलना मानवीय पहलू उजागर करेगा न कि उसका राजनीतिकरण होगा।

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समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के अलग-अलग प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले लोगों का कहना है कि इन दोनों पार्टियों के नेताओं को भी प्रबुद्ध वर्ग समुदाय से जुड़े लोगों के दुख दर्द को समझना चाहिए था। समाजवादी पार्टी के सीतापुर में आयोजित होने वाले प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में हिस्सा लेकर लौटे लखीमपुर के पंडित रविंद्र शुक्ला कहते हैं लखीमपुर की हुई घटना का राजनीतिक पार्टियों ने जिस तरीके से राजनीतिकरण किया वह दुखद है। उनका कहना है कि अगर लखीमपुर घटना में आठ लोगों की मौत हुई है तो सभी राजनैतिक दलों के लोगों को हर मृतकों के परिजनों से मिलना चाहिए और उन्हें अपनी ओर से जितनी सांत्वना दी जा सकती है, वह सब देनी चाहिए। लेकिन लखीमपुर में ऐसा नहीं हो रहा है।

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चुनाव में कराएंगे अहसास

लखीमपुर और आसपास के जिलों में प्रबुद्ध वर्ग समुदाय से वास्ता रखने वाले राष्ट्रीय एकता ब्राह्मण मंच के रामस्नेही मिश्रा कहते हैं कि मृतक किसी पार्टी का नहीं होता। उसका एक परिवार है और जो सहानुभूति की अपेक्षा रखता है। लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने सिख समुदाय और पत्रकार के परिजनों से मिलने के अलावा कहीं और जाना मुनासिब नहीं समझा। इस बात को लेकर मिश्रा कहते हैं कि क्योंकि यह सब राजनीति के लिए हो रहा है तो आने वाले चुनाव में भी इस बात का अहसास कराया जाना बेहद जरूरी है। उनका कहना है समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जब प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन कर रही है तो उसके लिए प्रबुद्ध वर्ग में शामिल ब्राह्मण परिवार के लोग भी उतनी ही सहानुभूति के पात्र हैं जितने सिख समुदाय के लोग। ऐसे में सभी राजनैतिक दलों को लखीमपुर हिंसा में मारे गए सभी परिजनों से मिलना चाहिए था न कि एक विशेष जाति समुदाय के परिजनों से। वह कहते हैं उनको भी सभी मृतकों से सहानुभूति है। उनके संगठन के लोग सभी समुदायों से मिल रहे हैं लेकिन वह उसका राजनीतिकरण नहीं कर रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफ़ेसर हरीश धीमान कहते हैं कि ऐसे मामलों में हमेशा राजनीति करने वाली पार्टियां वहीं ज्यादा झुकाव दिखाती हैं जहां उनका वोटर शामिल होता है। इसके अलावा सत्ता पक्ष से दूरी बनाने वाले पक्ष में शामिल होना विपक्षी पार्टियों का न सिर्फ काम होता है बल्कि उनकी रणनीति भी होती है। उनका कहना है लखीमपुर मामले में जिस तरीके से राजनैतिक पार्टियों के बड़े नेताओं ने सिर्फ एक समुदाय के मृतक परिजनों से मिलकर सांत्वना दी उससे स्पष्ट है कि यह राजनीतिक रोटियां सेकने जैसा ही है। वे कहते हैं कि अगर हकीकत में मृतकों के प्रति संवेदनाएं होतीं, तो वह किसी भी जाति-धर्म-मजहब या किसी भी पार्टी का होता तो सांत्वना देने वाले लोग उससे अवश्य मिलते।

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