फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   KV Subramanian: policies that give benefits like banyan tree will have to be made

खास बातचीत: केवी सुब्रमण्यन बोले, वटवृक्ष जैसी फायदा देने वाली नीतियां बनानी होंगी

Mon, 14 Nov 2022 07:07 AM IST
Amit Mandal महेंद्र तिवारी, नई दिल्ली।
महेंद्र तिवारी, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Mon, 14 Nov 2022 07:07 AM IST
सार

केवी सुब्रमण्यन जाने-माने अर्थशास्त्री, इंडियन स्कूल ऑफ फाइनेंस हैदराबाद में प्रोफेसर के साथ केंद्र सरकार के सबसे युवा मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे हैं। अमर उजाला के महेंद्र तिवारी ने उनके सुझावों को उनसे समझने की कोशिश की।
 

विज्ञापन
KV Subramanian: policies that give benefits like banyan tree will have to be made
KV Subramanyan - फोटो : पीटीआई

विस्तार

यूपी को 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का रोडमैप देने वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नामित कार्यकारी निदेशक केवी सुब्रमण्यन का कहना है कि बौनों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों को छोड़ना होगा। वटवृक्ष की तरह फायदा देने वाली नीतियां बनानी होंगी। यूपी को जो सुझाव दिए गए हैं, वह सफल प्रयोगों व अनुभव पर आधारित हैं।

विज्ञापन


नीतियों में बदलाव करना होगा
प्रो. सुब्रमण्यन ने कहा, हमारी नीतियां बौनों को प्रोत्साहन देती रही हैं। हम छोटे पौधे को सींचते हैं तो वह विशाल वृक्ष बन जाता है। पर, बौना के साथ चाहे जो कीजिए, बौना ही रहता है। होनहार बिरवान ऐसे पौधे को सींचता है जो कि विशाल वृक्ष बनकर छांव तो देता ही है, फल भी देता है। हमारी नीति भी ऐसी होनी चाहिए जो बौनों को न पैदा कर ऐसे बच्चों को आगे बढ़ाए जो आगे बड़ा योगदान दें, रोजगार बढ़ाएं। नीतिकारों को नीति निर्माण के मामले में आमूलचूल व बुनियादी बदलाव करना चाहिए।
विज्ञापन


इसे ऐसे समझें...
प्रो. सुब्रमण्यन बताते हैं, भारत, अमेरिका व मेक्सिको में पांच वर्ष उम्र की अलग-अलग उन कंपनियों पर अध्ययन किया गया जो 100 लोगों को रोजगार देती थीं। पता चला कि जब ये 40 साल की होती हैं तो अमेरिकी कंपनी 800 लोगों को, मेक्सिको 200 को रोजगार देता है, जबकि भारत में 140 को ही रोजगार मिला। इस प्रकार हम बहुत पीछे हैं क्योंकि हमारी नीतियां बौनों को ही प्रोत्साहन दे रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

वे समझाते हैं कि हाउसकीपिंग वाला यदि कारखाने में काम करने जाएगा तो उसकी आमदनी बेहतर रहेगी। चीन, जापान, अमेरिका व जर्मनी इन सभी ने निर्माण को ही फोकस कर एक मिडिल क्लास बनाया है।

बदलनी होगी सोच
प्रो. सुब्रमण्यन कहते हैं, श्रम कानून में कंपनियों में 100 कार्मिक होते ही सारे नियम-कायदे लाद दिए जाते हैं। फिर प्रमोटर क्या करता है? जैसे ही उसके यहां 95-96 कार्मिक होते हैं, वह नियमों के बोझ से बचने के लिए साले, भतीजे या ड्राइवर के नाम से नई कंपनी डाल देता है। इससे होता यह है कि 5 कंपनी जो 95-95 को रोजगार दे रही है, उसकी औसत लागत फिक्स्ड कॉस्ट कम हो जाती है। लेकिन, जब एक बड़ी कंपनी ज्यादा लोगों को रोजगार देती है तो उसकी फिक्स्ड कॉस्ट उससे भी कम होती है। 75 सालों में हमने इसे समझा नहीं है। नीतियां ऐसी बनाई हैं, जिसकी वजह से बौने ही पैदा हो रहे हैं। मतलब 5 साल बीते या 95 और 100 साल, हमारी कंपनी में 95 लोग ही रहेंगे। उसे कोई ग्रोथ नहीं करनी।

छोटे उद्योगों का क्या होगा
प्रो. सुब्रमण्यन कहते हैं छोटे उद्योग ज्यादा नौकरी बनाते हैं...यह बात सच नहीं है। छोटे उद्योग ज्यादा बंद होते हैं और फिर नुकसान उठाते हैं। इससे ज्यादा नौकरियां जाती हैं। बड़े उद्योगों का उदाहरण देखिए। इन्फोसिस 80 के दशक में नारायणमूर्ति व नंदन नीलकेणि सहित सात लोगों के साथ शुरू हुई थी। आज कई लाख लोग काम करते हैं। एक छोटा उद्योग बड़ा बनकर बड़ा रोजगार सृजित करे, प्रोत्साहन इस तरह होना चाहिए।

एफआरबीएम एक्ट....बिना अकल-नकल का सटीक उदाहरण
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम एक्ट) में तीन प्रतिशत फिस्कल डेफिसिट वाले प्रावधान बिना अकल, नकल का सटीक उदाहरण हैं। वजह, यूरोपीय यूनियन की मैस्ट्रिच संधि है। वह कोई आर्थिक दस्तावेज न होकर राजनीतिक दस्तावेज था। इसे यूरोप ने अपने एकीकरण के लिए बनाया था। मगर, हमने ये नहीं सोचा कि यूरोप समृद्ध देश है। वहां रोड, रेलवे, पोर्ट्स आदि बनाने की जरूरत नहीं है। जबकि यहां सब बनाना था और वह भी सरकार को। इसे समझे बिना नकल कर लिए। यह बिना अकल-नकल का प्रमाण है।

वैश्विक महंगाई का असर नहीं
महंगाई दर वैश्विक कारणों से बढ़ रही है। यूक्रेन युद्ध एक बड़ा कारण है। कई देशों में यहां से बहुत ज्यादा मुद्रास्फीति दर है। हमने तीन परिदृश्य खींचा है। मौजूदा स्थिति का अस्थायी असर रहेगा। डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट के कई तात्कालिक कारण हैं। यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहेगी। ऐसे में वैश्विक स्थिति का यूपी के लक्ष्य पर खास असर नहीं पड़ेगा। बस तय रणनीति के तहत काम करने की जरूरत है।

जनता भी निभाए जिम्मेदारी
कोविड के बाद भारत सरकार ने एफआरबीएम एक्ट में बदलाव किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त छूट दी गई है। पीएलआई स्कीम बौनों को कम करने के लिए ही लाई गई है।

जनता जब एक सरकार नियुक्त करती है तो उसे अधिकार देती है कि वह पांच साल सही नीतियां लागू करे। हर समय ऐसा नहीं हो सकता कि सबकी भागीदारी हो। लेकिन, अर्थव्यवस्था बढ़ने के सारे उपायों से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। लोग जहां भी रहें, सही ढंग से अपनी जिम्मेदारी निभाएं, स्वधर्म का सही तरीके से पालन करें, लक्ष्य में बड़ी मदद मिलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed