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West Bengal: कुर्मी समुदाय के लोगों ने पांच दिनों के बाद रेल मार्ग की नाकेबंदी हटाई, जनता को राहत मिली
Sun, 25 Sep 2022 09:32 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 25 Sep 2022 09:32 PM IST
सार
खड़गपुर और आद्रा मंडल दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। रविवार सुबह सात बजे नाकेबंदी हटने के बाद ट्रेन सेवाएं बहाल कर दी गईं।
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कुर्मी आंदोलन (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के आद्रा और खड़गपुर संभाग के दो स्टेशनों से पांच दिनों बाद रेल नाकेबंदी को हटाई गई है। यह नाकेबंदी कुर्मी समाज के आंदोलनकारियों के द्वारा की गई थी। प्रदर्शनकारी कुर्मी समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।
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कुर्मियों का आंदोलन 20 सितंबर को शुरू हुआ था। तबसे 250 से ज्यादा एक्सप्रेस और यात्री को ट्रेनों को रद्द किया जा चुका है। इसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-6 पर सैकड़ों वाहनों की कतार लग गई थी।
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खड़गपुर और आद्रा मंडल दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। रविवार सुबह सात बजे नाकेबंदी हटने के बाद ट्रेन सेवाएं बहाल कर दी गईं।
बंगाल सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खेमासुली में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-6 (कोलकाता को मुंबई से जोड़ने वाली सड़क) को खाली किया गया है। सैकड़ों ट्रक और बसें कई किलोमीटर तक ट्रैफिक जाम में फंसे हुए थे। आंदोलन वापस लिए जाने के बाद सभी आगे बढ़ने लगे।
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रेलवे अधिकारी ने बताया कि 20 सितंबर को सुबह चार बजे से कुस्तौर और खेमासुली स्टेशनों पर 123 घंटों तक की नाकेबंदी से खड़गपुर और आद्रा मंडल में रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी हुई।
कुर्मी समाज के लोगों ने सबसे पहले 20 सितंबर को पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों में रेल और सड़क नाकेबंदी की थी। उनकी मांग थी कि कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए और कुर्मी समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए।
हालांकि झारखंड और ओडिशा में उसी दिन रेलवे पटरियों की नाकाबंदी को हटा दिया गया था लेकिन पश्चिम बंगाल के दो स्टेशनों पर विरोध जारी रहा। कुर्मी नेताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच चर्चा के बाद शनिवार की रात से ही प्रदर्शनकारी वहां से हटने लगे और रविवार की सुबह पटरियां खाली हो गईं।