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Kuno Cheetah Death: कूनो में एक के बाद एक क्यों हो रही चीतों की मौत, रेडियो कॉलर को लेकर विशेषज्ञ क्या कह रहे?

Thu, 03 Aug 2023 03:42 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 03 Aug 2023 03:42 PM IST
सार

Kuno Cheetah Deaths: कूनो नेशनल पार्क में बुधवार सुबह मादा चीतों में से एक धात्री मृत पाई गई। पार्क में पिछले चार महीने में नौ चीतों की मौत हो चुकी है। उधर कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा सुझाव दिए जाने के बाद कि रेडियो कॉलर संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं, गैजेट को छह चीतों से हटाया गया है। 
 

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Kuno Cheetah Death: Why are cheetahs dying one after the other in Kuno, what is radio collar factor
कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है। इसके साथ ही यहां मरने वाले चीतों की संख्या नौ हो गई है। मादा अफ्रीकी चीता 'धात्री' बुधवार को मृत पाई गई। फिलहाल मादा चीता की मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है।
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कूनो नेशनल पार्क में अब तक छह चीते और तीन शावकों की जान जा चुकी हैं। इन घटनाओं के बीच कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। आखिर कूनो नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत की वजह क्या है? इसे रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है? भारत लाए जाने के बाद कब किस चीते ने दम तोड़ा? चीतों की मौत के बीच रेडियो कॉलर क्यों चर्चा में हैं? आइये जानते हैं…
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Kuno Cheetah Death: Why are cheetahs dying one after the other in Kuno, what is radio collar factor
Cheetah Returns: Cheetah in kuno national park - फोटो : Kuno National Park
कूनो नेशनल पार्क में अभी क्या हुआ है?
कूनो नेशनल पार्क में बुधवार सुबह मादा चीतों में से एक धात्री मृत पाई गई। कूनो नेशनल पार्क की ओर जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वहां रखे गए सभी 14 चीते (सात नर एवं छह मादा एवं एक मादा शावक) स्वस्थ हैं। उनका स्वास्थ्य परीक्षण कूनो के वन्यप्राणी चिकित्सक टीम एवं नामीबियाई विशेषज्ञ कर रहे हैं। 

बाड़ों के बाहर घूम रही दो मादा चीतों को नामीबियाई विशेषज्ञ एवं कूनो वन्यप्राणी चिकित्सक एवं प्रबंधन टीम लगातार फॉलो कर रही थी। उनके हेल्थ चेकअप के लिए उन्हें फिर से बोमा (बाड़े) में लाने के लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इन दोनों में से एक मादा चीता धात्री मृत मिली। मृत्यु के कारणों का पता लगाने हेतु पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है। बीते चार महीने में चीते की मौत का यह नौवां मामला है। 

Kuno Cheetah Death: Why are cheetahs dying one after the other in Kuno, what is radio collar factor
कूनो - फोटो : सोशल मीडिया
कब किस चीते की जान गई है? 
कूनो नेशनल पार्क में पिछले चार महीने में नौ चीतों की मौत हो चुकी है। इसमें छह चीते और तीन शावक शामिल हैं। अब कूनो नेशनल पार्क में 14 चीते और एक शावक बचा है। 

1. साशा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़ा था। छह महीने बाद यहां पहले चीते की मौत हुई। दरअसल, 27 मार्च को साशा नाम की एक नामीबियाई मादा चीता की मृत्यु हो गई थी। 

मृत्यु का कारण: वन विभाग के अनुसार, नामीबिया से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ी गई मादा चीता साशा के गुर्दों में संक्रमण होने की वजह से मृत्यु हुई। कहा गया कि इस मादा चीता के गुर्दों में संक्रमण भारत आने के पहले से ही था।

2. उदय: 23 अप्रैल की सुबह अचानक उदय चीते का अचानक स्वास्थ्य खराब हुआ और शाम चार बजे मौत हो गई। 
मृत्यु का कारण: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कार्डियोपलमोनरी फेल होने की वजह से चीते की मौत हुई। वह सुबह से ही बीमार दिखाई दे रहा था, दोपहर में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्डलाइफ जसबीर सिंह चौहान के मुताबिक, कार्डियोपलमोनरी फेल होने की वजह से चीता उदय की मौत हुई। हार्ट और लंग्स की समस्या सामने आई है। 

3. दक्षा: कूनो राष्ट्रीय उद्यान में घायल मादा चीता दक्षा की नौ मई को मृत्यु हो गई थी।
मृत्यु का कारण: तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जसवीर सिंह चौहान के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका से लाकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ी गई मादा चीता दक्षा को मॉनिटरिंग दल द्वारा नौ मई को पौने ग्यारह बजे घायल अवस्था में पाया गया था। पशु चिकित्सकों द्वारा इसका उपचार भी किया गया। दक्षा के शरीर पर पाए गए घाव प्रथम दृष्टया मेटिंग (यौन-संसर्ग) के दौरान मेल से हिंसक इन्टरेक्शन होना पाया गया।

ज्वाला के तीन शावक: 23 मई को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता ज्वाला के तीन शावकों की मृत्यु हो गई।
मृत्यु का कारण: प्रथम दृष्टया शावक की मृत्यु का कारण कमजोरी से होना प्रतीत हुआ। मॉनिटरिंग टीम ने सुबह ज्वाला को अपने शावकों के साथ एक जगह बैठा पाया गया। कुछ समय बाद मादा चीता अपने शावकों के साथ चल कर जाने लगी, टीम ने तीन शावकों को उसके साथ जाते हुये देखा, चौथा शावक अपने स्थान पर ही लेटा रहा। मॉनिटरिंग टीम द्वारा कुछ समय रुकने के बाद चौथे शावक का करीब से निरीक्षण किया गया। यह शावक उठने में असमर्थ जमीन पर पड़ा मिला और टीम को देख कर अपना सिर उठाने का प्रयास भी किया। तत्काल पशु चिकित्सक दल को सूचना दी गई।

दो अन्य शावकों की मृत्यु का कारण: तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-प्राणी) जे.एस.चौहान के मुताबिक, 23 मई को एक शावक की मृत्यु के बाद शेष तीन शावक और मादा चीता ज्वाला की पालपुर में तैनात वन्य-प्राणी चिकित्सकों और मॉनीटरिंग टीम द्वारा दिनभर निगरानी की गई। दिन में चीता ज्वाला को सप्लीमेंट फूड दिया गया। दोपहर बाद निगरानी के दौरान शेष तीन शावक की स्थिति सामान्य नहीं हुई। तीनों शावक की असामान्य स्थिति और गर्मी को देखते हुए प्रबंधन एवं वन्य-प्राणी चिकित्सकों की टीम ने तत्काल तीनों शावकों को रेस्क्यू कर उपचार किया लेकिन दो शावक की स्थिति अधिक खराब होने से बचाया नहीं जा सका। 

7. तेजस: 11 जुलाई को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीता तेजस की मृत्यु हो गई।

मृत्यु का कारण: नर चीता तेजस की मृत्यु का प्रथम दृष्टया संभावित कारण ट्रॉमेटिक शॉक बताया गया। तेजस का शव परीक्षण 12 जुलाई को पालपुर स्थित वाइल्ड लाइफ हॉस्पिटल में किया गया। इस दौरान चीता का वजन 43 किग्रा पाया गया जो कि सामान्य नर चीता के औसत वजन से कम है। बाहरी तौर पर चीते के गर्दन पर घाव के निशान थे जो ज्यादा गहरे न होकर केवल बाह्य त्वचा तक सीमित थे।  

शव परीक्षण करने वाले वन्यप्राणी चिकित्सकों के अनुसार तेजस के आंतरिक अंग सामान्य रूप से कार्य नहीं कर रहे थे। इस अवस्था में तेजस के भविष्य में पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावनाएं काफी कम हो गई थी। आशंका जताई गई कि तेजस के आंतरिक रूप से कमजोर होने के कारण बाड़े में मौजूद अन्य मादा चीता से हुई हिंसक झड़प से हुए ट्रामा की स्थिति से रिकवर नहीं कर पाया।

8. सूरज: 14 जुलाई को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाया गया नर चीता सूरज मृत अवस्था में पाया गया। 
मृत्यु का कारण: चीता निगरानी दल द्वारा सुबह पालपुर पूर्व परिक्षेत्र के मसावनी बीट में नर चीता 'सूरज' को सुस्त अवस्था में लेटा पाया। उसके गले पर मक्खी उड़ती देखी गई, पास जाने पर चीता उठकर दौड़ कर दूर चला गया। सूचना पर वन्य-प्राणी चिकित्सक दल और क्षेत्रीय अधिकारी लगभग सुबह नौ बजे मौके पर पहुंचे। लोकेशन ट्रेस करने पर चीता सूरज मौके पर मृत अवस्था में मिला। प्रारंभिक जांच में मृत्यु का कारण चीता सूरज के गर्दन और पीठ पर घाव होना पाया गया। 
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Kuno Cheetah Death: Why are cheetahs dying one after the other in Kuno, what is radio collar factor
कूनो नेशनल पार्क - फोटो : सोशल मीडिया
घटनाओं के बीच रेडियो कॉलर की चर्चा क्यों हुई?
चीतों की मौत की घटनाओं के बीच ही कुछ रिपोर्टों में उपग्रह कॉलर (चीतों की गर्दन में उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और निगरानी करने के लिए लगाए जाने वाले गैजेट) से संक्रमण की आशंका जताई गई। हालांकि, पर्यावरण मंत्रालय ने रेडियो कॉलर से जुड़ी चीतों की मौत के दावों को अफवाह और अटकलबाजी करार दिया। इसी बीच, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चीतों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है।

उधर कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा सुझाव दिए जाने के बाद कि रेडियो कॉलर संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं, गैजेट को चीतों से हटाने की कवायद की गई। मध्य प्रदेश वन विभाग के मुताबिक, अब तक छह चीतों के रेडियो कॉलर हटाए जा चुके हैं।

Kuno Cheetah Death: Why are cheetahs dying one after the other in Kuno, what is radio collar factor
सीएम शिवराज ने कूनो की तैयारियों की अधिकारियों से ली जानकारी - फोटो : अमर उजाला
चीतों की मृत्यु पर सरकार क्या कर रही है?
18 जुलाई को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट की एक समीक्षा बैठक की। इस दौरान सीएम ने कहा कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाए गए चीतों में से कुछ चीतों की मृत्यु, चिंता का विषय है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उनके स्वास्थ्य और देखभाल के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित चीता टास्क फोर्स को राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाए। 
क्षेत्र में पर्याप्त वन्य-प्राणी चिकित्सकों सहित सभी आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही चीतों की स्थिति की नियमित समीक्षा की व्यवस्था हो। आवश्यकता होने पर फॉरेस्ट गार्ड की संख्या और पुनर्वास प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध क्षेत्र में वृद्धि की जाए।

बता दें कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से आठ और दक्षिण अफ्रीका से 12 इस प्रकार कुल 20 चीते लाए गए। 29 मार्च को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ी गई तीन वर्ष की नामीबियाई मादा चीता 'सियाया' ने चार चीता शावकों को जन्म दिया। वर्तमान में 10 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं और पांच चीतों को बाड़ों में रखा गया है। सभी चीतों की 24 घंटे मॉनीटरिंग की जा रही है। इसके अलावा कूनो वन्य-प्राणी चिकित्सक टीम और नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
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