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Manipur: 'मणिपुर में चुनाव के लिए यह सही समय नहीं', कुकी-मैतई समुदाय के सदस्यों ने कही यह बात
Sat, 13 Apr 2024 02:27 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इम्फाल/चुराचांदपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इम्फाल/चुराचांदपुर
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Sat, 13 Apr 2024 02:27 PM IST
सार
मणिपुर में कुकी और मैतई के बीच जातीय हिंसा भड़के हुए लगभग एक साल हो गए हैं, जिसमें लगभग 200 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है और 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए हैं। दिल्ली मैतेई समन्वय समिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त और भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मणिपुर में लोकसभा चुनाव स्थगित करने की मांग की है।
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मणिपुर हिंसा
- फोटो : PTI
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विस्तार
मणिपुर में कुकी और मैतई के बीच जातीय हिंसा भड़के हुए लगभग एक साल हो गए हैं, जिसमें लगभग 200 से अधिक लोगों ने जान गंवाई थी और 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए हैं। जातीय हिंसा ने मणिपुर की तस्वीर ही बदल दी है। इस बीच, मणिपुर में दो लोकसभा सीटों के लिए चुनाव 19 और 26 अप्रैल को होंगे। आंतरिक मणिपुर और बाहरी मणिपुर के कुछ क्षेत्रों में पहले चरण में मतदान होगा, जबकि बाहरी मणिपुर के शेष क्षेत्रों में 26 अप्रैल को मतदान होगा।
हमारे कुकी समुदाय की मांगे स्पष्ट है- लहैनीलम
आगामी चुनाव को लेकर चुराचांदपुर जिले में एक राहत शिविर में समन्वयक कुकी लहैनीलम ने कहा कि हमारी मांग स्पष्टा है। हम कुकी सममुदाय के लिए एक अलग प्रशासन चाहते हैं। वर्षों से विकास केवल घाटी में हुआ है, लेकिन हमारे क्षेत्रों में ऐसा नहीं हुआ। पिछले साल हुई हिंसा के बाद से हम एक साथ नहीं रह सकते, जिसकी कोई संभावना ही नहीं है।
अभी सही समय नहीं है, ऐसा संभव ही नहीं- लहैनीलम
चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों दोनों पक्षों के बीच कोई आदान-प्रदान नहीं हो रहा है। न तो शब्दों का और न ही वस्तुओं का और सरकार चाहती है कि हम दूसरे पक्ष को वोट दें। यह कैसे संभव है। मैतई क्षेत्र से विस्थापित कुकी को मैतेई निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान करना होगा। कैसे और क्यों। अभी सही समय नहीं है। गौरतलब है कि कुकी ने पहले ही एलान कर दी है कि वे बहिष्कार के तहत आगामी चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। हालांकि, कई समूह अभी भी इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या वे भी मतदान से दूर रहेंगे।
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गौरतलब है कि दिल्ली में मैतेई नागरिक समाज संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रमुख संस्था, दिल्ली मैतेई समन्वय समिति (डीएमसीसी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर मणिपुर में लोकसभा चुनाव स्थगित करने की मांग की है।
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हमारे कुकी समुदाय की मांगे स्पष्ट है- लहैनीलम
आगामी चुनाव को लेकर चुराचांदपुर जिले में एक राहत शिविर में समन्वयक कुकी लहैनीलम ने कहा कि हमारी मांग स्पष्टा है। हम कुकी सममुदाय के लिए एक अलग प्रशासन चाहते हैं। वर्षों से विकास केवल घाटी में हुआ है, लेकिन हमारे क्षेत्रों में ऐसा नहीं हुआ। पिछले साल हुई हिंसा के बाद से हम एक साथ नहीं रह सकते, जिसकी कोई संभावना ही नहीं है।
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अभी सही समय नहीं है, ऐसा संभव ही नहीं- लहैनीलम
चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों दोनों पक्षों के बीच कोई आदान-प्रदान नहीं हो रहा है। न तो शब्दों का और न ही वस्तुओं का और सरकार चाहती है कि हम दूसरे पक्ष को वोट दें। यह कैसे संभव है। मैतई क्षेत्र से विस्थापित कुकी को मैतेई निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान करना होगा। कैसे और क्यों। अभी सही समय नहीं है। गौरतलब है कि कुकी ने पहले ही एलान कर दी है कि वे बहिष्कार के तहत आगामी चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। हालांकि, कई समूह अभी भी इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या वे भी मतदान से दूर रहेंगे।
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गौरतलब है कि दिल्ली में मैतेई नागरिक समाज संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रमुख संस्था, दिल्ली मैतेई समन्वय समिति (डीएमसीसी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर मणिपुर में लोकसभा चुनाव स्थगित करने की मांग की है।