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Kolkatta High Court: शिक्षक भर्ती घोटाले की सुनवाई में जज ने कहा- लोकतंत्र सही हाथों में नहीं
Sat, 26 Nov 2022 07:05 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sat, 26 Nov 2022 07:05 AM IST
सार
अदालत में पेश हुए बंगाल के शिक्षा सचिव ने जज की एकल पीठ को सूचित किया था कि शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कैबिनेट के निर्णय के बाद कथित रूप से अवैध नियुक्ति पाने वालों को समायोजित करने के लिए शिक्षकों के अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्देश दिया था।
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कोलकाता हाईकोर्ट
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें केंद्रीय चुनाव आयोग को तृणमूल कांग्रेस की मान्यता रद्द करने और उसका चुनाव चिन्ह वापस लेने के लिए कहना पड़ सकता है। न्यायाधीश गंगोपाध्याय ने कहा-किसी को भी भारत के संविधान के साथ छेड़छाड़ का अधिकार नहीं है।
उन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए ये बातें कही। उल्लेखनीय है कि इस मामले में अदालत में पेश हुए बंगाल के शिक्षा सचिव मनीष जैन ने न्यायाधीश गंगोपाध्याय की एकल पीठ को सूचित किया था कि शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कैबिनेट के निर्णय के बाद कथित रूप से अवैध नियुक्ति पाने वालों को समायोजित करने के लिए शिक्षकों के अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्देश दिया था। इस पर न्यायाधीश गंगोपाध्याय ने सवाल किया कि अवैध रूप से नियुक्त अपात्र उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल इस तरह का निर्णय कैसे ले सकता है? मंत्रिमंडल को यह घोषणा करनी होगी कि वे अवैध नियुक्तियों के समर्थन में नहीं हैं और अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 19 मई को जारी अधिसूचना वापस लेनी होगी, अन्यथा मैं ऐसा निर्णय लूंगा, जो देश में अभूतपूर्व होगा। मुझे लगता है कि या तो लोकतंत्र सही हाथों में नहीं है या यह परिपक्व नहीं हुआ है।
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उन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए ये बातें कही। उल्लेखनीय है कि इस मामले में अदालत में पेश हुए बंगाल के शिक्षा सचिव मनीष जैन ने न्यायाधीश गंगोपाध्याय की एकल पीठ को सूचित किया था कि शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कैबिनेट के निर्णय के बाद कथित रूप से अवैध नियुक्ति पाने वालों को समायोजित करने के लिए शिक्षकों के अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्देश दिया था। इस पर न्यायाधीश गंगोपाध्याय ने सवाल किया कि अवैध रूप से नियुक्त अपात्र उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल इस तरह का निर्णय कैसे ले सकता है? मंत्रिमंडल को यह घोषणा करनी होगी कि वे अवैध नियुक्तियों के समर्थन में नहीं हैं और अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 19 मई को जारी अधिसूचना वापस लेनी होगी, अन्यथा मैं ऐसा निर्णय लूंगा, जो देश में अभूतपूर्व होगा। मुझे लगता है कि या तो लोकतंत्र सही हाथों में नहीं है या यह परिपक्व नहीं हुआ है।
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