फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kolkata Municipal Corporation has renamed Suhrawardy Avenue after Gopal Mukherjee

कोलकाता: सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलेगा, गोपाल मुखर्जी रोड के नाम से जानी जाएगी सड़क; विपक्ष ने साधा निशाना

Sun, 21 Jun 2026 09:48 PM IST
Rahul Kumar एजेंसी/ अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
एजेंसी/ अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: Rahul Kumar Updated Sun, 21 Jun 2026 09:48 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। कोलकाता के पार्क सर्कस क्षेत्र स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर अब ‘गोपाल मुखोपाध्याय रोड’ रखा जाएगा। कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। 

विज्ञापन
Kolkata Municipal Corporation has renamed Suhrawardy Avenue after Gopal Mukherjee
बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) द्वारा शहर की प्रमुख सड़क सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे "ऐतिहासिक भूल को सुधारने वाला कदम" बताया। टीएमसी ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। 

विज्ञापन


शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम अधकारी ने कहा कि पश्चिम बंग दिवस के अवसर पर कोलकाता नगर निगम द्वारा लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय न्यायपूर्ण और समयोचित है। उन्होंने कहा कि दशकों तक शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क का नाम ऐसे व्यक्ति के नाम पर रहा, जिस पर सत्ता का दुरुपयोग कर राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष नागरिकों के नरसंहार को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।
विज्ञापन


अधिकारी ने कहा कि अब इस सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने से उन हजारों निर्दोष लोगों की रक्षा करने वाले एक साहसी व्यक्ति को सम्मान मिलेगा, जिन्होंने संकट की घड़ी में लोगों की जान बचाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, यह फैसला ऐतिहासिक न्याय की पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को अब अपने वास्तविक नायकों को याद करने, इतिहास की गलतियों को सुधारने और समाज के सच्चे रक्षकों को सम्मान देने का समय आ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नाम बदलने को लेकर लंबे समय से बहस

हालांकि, इस नाम को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस चलती रही है। सर हसन सुहरावर्दी के भतीजे हुसैन शहीद सुहरावर्दी 1946-47 के दौरान अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री थे। भाजपा और उससे जुड़े संगठनों का आरोप रहा है कि 1946 के 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग' के दौरान उनकी भूमिका विवादास्पद रही थी।

वहीं, गोपाल मुखोपाध्याय, जिन्हें 'गोपाल पाठा' के नाम से जाना जाता है, को 1946 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान हिंदू समाज की रक्षा के लिए याद किया जाता है। कोलकाता के बौबाजार क्षेत्र के निवासी गोपाल मुखोपाध्याय का परिवार मांस व्यवसाय से जुड़ा था, जिसके कारण उन्हें 'गोपाल पाठा' कहा जाता था। दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा के बीच उन्हें लंबे समय से एक प्रतीकात्मक व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता रहा है।

पिछले वर्ष 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग' की बरसी पर आयोजित एक पदयात्रा में तत्कालीन विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने गोपाल मुखोपाध्याय की तस्वीर के साथ हिस्सा लिया था। बाद में अलीपुर में उनकी प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। अब सड़क का नाम उनके नाम पर किए जाने को भाजपा सरकार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पुनर्स्मरण की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल सड़क का नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल के इतिहास और उसके नायकों की नई व्याख्या को भी दर्शाता है। सरकार के इस कदम को राज्य की बदलती राजनीतिक और वैचारिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कौन थे सर हसन सुहरावर्दी?

सर हसन सुहरावर्दी बंगाल के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और चिकित्सक थे। वह 8 अगस्त 1930 से 7 अगस्त 1934 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। उनके सम्मान में 1933 में पार्क सर्कस से काशीपाड़ा लेन तक बनी नई सड़क का नाम 'सुहरावर्दी एवेन्यू' रखा गया था। वह तत्कालीन अविभाजित बंगाल के प्रमुख शिक्षाविदों में गिने जाते थे। उनके भतीजे हुसैन शहीद सुहरावर्दी बाद में अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने।

कौन थे गोपाल मुखोपाध्याय?

गोपाल मुखोपाध्याय, जिन्हें 'गोपाल पाठा' के नाम से अधिक जाना जाता है, कोलकाता के बौबाजार क्षेत्र के निवासी थे। उनका परिवार मांस व्यवसाय से जुड़ा था, जिसके कारण उन्हें यह उपनाम मिला। 1946 के 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग' और सांप्रदायिक दंगों के दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर हिंदू बहुल इलाकों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा द्वारा उन्हें उस दौर में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 2005 में उनका निधन हो गया था


विपक्ष ने साधा निशाना
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने पर कहा, जब कोई नाम होता है, तो उसके पीछे कोई इतिहास या घटना होती है... किसी नाम को पूरी तरह से हटाने से इतिहास पर असर पड़ता है... हमने दूसरी जगहों पर भी देखा है कि भाजपा को रोटी, कपड़ा, मकान देने की बजाय जगहों के नाम बदलने में अधिक दिलचस्पी है... हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी नाम को हटाकर उसकी जगह दूसरा नाम रखने से पहले इस पर थोड़ा सोचना चाहिए...।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed