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Kolkata Doctor Case: प्राचार्य से लेकर सरकार तक पर सवाल, टास्क फोर्स गठित; 'सुप्रीम' सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
Tue, 20 Aug 2024 06:04 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 20 Aug 2024 06:04 PM IST
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कोलकाता के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल का केस
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना के बाद से डॉक्टर सड़कों पर हैं। पश्चिम बंगाल समेत देशभर की तमाम अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। उधर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई मांमले की जांच में जुटी हुई है। अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच गया है।शीर्ष अदालत ने जूनियर डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या और अस्पताल में तोड़फोड़ के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में पीड़िता की पहचान उजागर होने पर चिंता जाहिर की। साथ ही केस में पुलिस जांच से लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष की भूमिका तक पर सवाल उठाए। कोर्ट ने मामले में आठ सदस्यीय टास्क फोर्स के गठन का फैसला किया है।
आइये जानते हैं कि कोलकाता के अस्पताल का मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला? सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? टास्क फोर्स में किसे रखा गया है? टास्क फोर्स क्या करेगी? सीजेआई ने क्या कहा?
कोलकाता के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल का केस
- फोटो :
AMAR UJALA
कोलकाता के अस्पताल की घटना क्या है?
आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना 8-9 अगस्त की दरमियानी रात की है। मृतक मेडिकल कॉलेज में चेस्ट मेडिसिन विभाग की स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा और प्रशिक्षु डॉक्टर थीं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर 8 अगस्त को अस्पताल में रात की ड्यूटी कर रही थीं। रात 12 बजे के बाद उन्होंने दोस्तों के साथ डिनर भी किया। इसके बाद से महिला डॉक्टर का कोई पता नहीं चला।
9 अगस्त की सुबह उस वक्त मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया जब चौथी मंजिल के सेमिनार हॉल से अर्ध नग्न अवस्था में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया गया। 10 अगस्त की सुबह महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में संजय रॉय नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक अज्ञात पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की गतिविधियां काफी संदिग्ध हैं और ऐसा लगता है कि वह सीधे तौर पर अपराध में शामिल है। आरोपी ब्लूटूथ हेडफोन के टूटे तार से पकड़ा गया था जो पुलिस को सेमिनार कक्ष में गिरा मिला था।
इस घटना के बाद बंगाल समेत देश भर में डॉक्टरों के विरोध- प्रदर्शन शुरू हो गए। इस बीच, 13 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। केंद्रीय एजेंसी लगातार इस मामले की जांच में जुटी हुई है। इस पूरे मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष लगातार सवालों के घेरे में है। एजेंसी कई बार घोष से पूछताछ कर चुकी है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना 8-9 अगस्त की दरमियानी रात की है। मृतक मेडिकल कॉलेज में चेस्ट मेडिसिन विभाग की स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा और प्रशिक्षु डॉक्टर थीं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर 8 अगस्त को अस्पताल में रात की ड्यूटी कर रही थीं। रात 12 बजे के बाद उन्होंने दोस्तों के साथ डिनर भी किया। इसके बाद से महिला डॉक्टर का कोई पता नहीं चला।
9 अगस्त की सुबह उस वक्त मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया जब चौथी मंजिल के सेमिनार हॉल से अर्ध नग्न अवस्था में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया गया। 10 अगस्त की सुबह महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में संजय रॉय नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक अज्ञात पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की गतिविधियां काफी संदिग्ध हैं और ऐसा लगता है कि वह सीधे तौर पर अपराध में शामिल है। आरोपी ब्लूटूथ हेडफोन के टूटे तार से पकड़ा गया था जो पुलिस को सेमिनार कक्ष में गिरा मिला था।
इस घटना के बाद बंगाल समेत देश भर में डॉक्टरों के विरोध- प्रदर्शन शुरू हो गए। इस बीच, 13 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। केंद्रीय एजेंसी लगातार इस मामले की जांच में जुटी हुई है। इस पूरे मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष लगातार सवालों के घेरे में है। एजेंसी कई बार घोष से पूछताछ कर चुकी है।
कोलकाता मामले पर सुप्रीम कोर्ट।
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अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला?
मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंगलवार (20 अगस्त) को सुनवाई की। सीजेआई ने कहा, 'कलकत्ता उच्च न्यायालय इस पर सुनवाई कर रहा था लेकिन हमने स्वतः संज्ञान लेने का निर्णय क्यों लिया। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सिर्फ कोलकाता के अस्पताल में हुई एक भयावह हत्या का मामला नहीं है... बल्कि यह पूरे भारत में डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।'
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बंगाल सरकार, पुलिस और आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को लेकर कई सवाल उठाए। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल उठाया कि प्रिंसिपल ने इसे आत्महत्या का मामला कैसे बताने की कोशिश की। सीजेआई ने नियुक्ति को लेकर भी बंगाल सरकार से सवाल दागे। सीजेआई ने कहा कि जब प्रिंसिपल के आचरण की जांच हो रही है तो प्रिंसिपल को तुरंत दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल कैसे नियुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सुझाव देगी।
मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंगलवार (20 अगस्त) को सुनवाई की। सीजेआई ने कहा, 'कलकत्ता उच्च न्यायालय इस पर सुनवाई कर रहा था लेकिन हमने स्वतः संज्ञान लेने का निर्णय क्यों लिया। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सिर्फ कोलकाता के अस्पताल में हुई एक भयावह हत्या का मामला नहीं है... बल्कि यह पूरे भारत में डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।'
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बंगाल सरकार, पुलिस और आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को लेकर कई सवाल उठाए। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल उठाया कि प्रिंसिपल ने इसे आत्महत्या का मामला कैसे बताने की कोशिश की। सीजेआई ने नियुक्ति को लेकर भी बंगाल सरकार से सवाल दागे। सीजेआई ने कहा कि जब प्रिंसिपल के आचरण की जांच हो रही है तो प्रिंसिपल को तुरंत दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल कैसे नियुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सुझाव देगी।
कोलकाता के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल का केस
- फोटो :
AMAR UJALA
टास्क फोर्स क्या करेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने यह टास्क फोर्स डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बनाई है। यह टास्क फोर्स डॉक्टरों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पहल करेगी। डॉक्टरों और अस्पतालों में मौजूद सुरक्षा इंतजामों को परखेगी। साथ ही चिकित्सकों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव देगी। कोर्ट ने टास्क फोर्स को तीन सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट देने के लिए कहा है। साथ ही दो महीने में फाइनल रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, टास्क फोर्स लैंगिक हिंसा को रोकने और प्रशिक्षुओं, रेजिडेंट और नॉन रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य स्थिति सुनिश्चित करने के संबंध में एक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करेगी।
इसके अलावा, सर्वोच्च अदालत ने टास्क फोर्स को कुछ खास बातों को ध्यान में रखने का निर्देश भी दिया है, ये हैं:
सुप्रीम कोर्ट ने यह टास्क फोर्स डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बनाई है। यह टास्क फोर्स डॉक्टरों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पहल करेगी। डॉक्टरों और अस्पतालों में मौजूद सुरक्षा इंतजामों को परखेगी। साथ ही चिकित्सकों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव देगी। कोर्ट ने टास्क फोर्स को तीन सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट देने के लिए कहा है। साथ ही दो महीने में फाइनल रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, टास्क फोर्स लैंगिक हिंसा को रोकने और प्रशिक्षुओं, रेजिडेंट और नॉन रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य स्थिति सुनिश्चित करने के संबंध में एक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करेगी।
इसके अलावा, सर्वोच्च अदालत ने टास्क फोर्स को कुछ खास बातों को ध्यान में रखने का निर्देश भी दिया है, ये हैं:
- आपातकालीन कक्ष के क्षेत्रों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत का अध्ययन
- हथियारों के प्रवेश को रोकने के लिए सामान की जांच
- रोगी के साथ एक सीमा से अधिक लोगों का प्रवेश रोकना
- भीड़ को प्रबंधित करने के लिए सुरक्षा
- डॉक्टरों के लिए विश्राम कक्ष और डॉक्टरों, नर्सों के आराम के लिए स्थान होना चाहिए
- बायोमेट्रिक्स और चेहरे की पहचान (फेस रिकग्निशन) की व्यवस्था
- सभी क्षेत्रों में उचित प्रकाश व्यवस्था, सभी स्थानों पर सीसीटीवी लगाना
- चिकित्साकर्मियों के लिए रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक परिवहन
- तनाव और संकट से निपटने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन
- संस्थागत सुरक्षा उपायों की त्रैमासिक ऑडिट
- आने-जाने वालों की संख्या के अनुरूप पुलिस बल की तैनाती
- पॉश अधिनियम चिकित्सा संस्थाओं पर लागू होता है, इसलिए आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया जाएगा
- चिकित्सा पेशेवरों की आपातकालीन स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराया जाएगा।
टास्क फोर्स में किसे रखा गया है?
इसके अलावा टास्क फोर्स में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स के अध्यक्ष को भी शामिल किया गया है।
- डॉ. एमश्री निवास, निदेशक, एम्स दिल्ली
- डॉ. नागरेश्वर रेड्डी, प्रबंध निदेशक, एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोलॉजी
- आरती सरीन, सर्जन वाइस एडमिरल
- डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी, निदेशक, एम्स जोधपुर
- डॉ. सौमित्र रावत, प्रबंध सदस्य गंगाराम अस्पताल
- डॉ. प्रतिमा मूर्ति, एनआईएमएचएएनएस, बंगलूरू
- प्रो. अनीता सक्सेना, कॉर्डियोलॉजी हेड एम्स दिल्ली
- प्रो. पल्लवी सापरे, डीन ग्रांट मेडिकल कॉलेज, मुंबई
- डॉ. पदमा श्रीवास्तव, न्यूरोलॉजी विभाग एम्स
इसके अलावा टास्क फोर्स में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, गृह सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स के अध्यक्ष को भी शामिल किया गया है।
सीजेआई द्वारा कही गई बड़ी बातें
- यदि महिलाएं अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित नहीं रह सकतीं तो संविधान के तहत समानता का क्या अर्थ है?
- मुझे इस बात पर गहरी चिंता है कि पीड़िता का नाम, उसकी फोटो और वीडियो मीडिया में प्रकाशित हो गए।
- कोलकाता पुलिस (अस्पताल पर हमले के दौरान) क्या कर रही थी?
- जब प्रिंसिपल का आचरण जांच के दायरे में है, तो उन्हें (संदीप घोष) तुरंत दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल कैसे नियुक्त कर दिया गया?
- हम डॉक्टरों से अपील करते हैं कि हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां हैं।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पश्चिम बंगाल राज्य की शक्ति का इस्तेमाल न किया जाए।
- डॉक्टरों और महिला डॉक्टरों की सुरक्षा राष्ट्रीय हित का मामला है। देश कोई कदम उठाने के लिए एक और दुष्कर्म का इंतजार नहीं कर सकता।