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जानिए CBI क्यों और कैसे करती है क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन, सुशांत मामले में शुरू हो चुका काम

Sat, 22 Aug 2020 08:30 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 22 Aug 2020 08:30 PM IST
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Know what is crime scene reconstruction or recreation how whole process has been done
क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन - फोटो : Social media

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू करते हुए सीबीआई दूसरे दिन सुशांत के बांद्रा स्थित आवास पर पहुंची। यहां वो अपराध के दृश्यों का नाट्य रूपांतरण (क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन/रीक्रिएशन) करेगी। आइए आज हम जानते हैं कि यह क्राइम सीन रीक्रिएशन आखिर होता क्या है और इससे किस तरह की जानकारी मिलती है।

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क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन का काम तब होता है जब किसी हादसे या दुर्घटना पर किसी प्रकार का कोई शक हो। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि देखने में लग रहा हो कि किसी व्यक्ति ने आत्महत्या की है लेकिन असली में उस व्यक्ति की किसी के द्वारा हत्या की गई हो।  
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क्या होता है क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन?
क्या, कहां, कैसे और कब हुआ या किसने और क्यों किया, इन तमाम सवालों को जानने के लिए जांच एजेंसियां इस तरीके का इस्तेमाल करती हैं। यहां पर कोशिश यह रहती है कि सभी साक्ष्यों और घटनाक्रम को जोड़ा जाए और उससे एक थ्योरी बनाई जाए। फोरेंसिक वैज्ञानिक अपराध के पहले या बाद में होने वाली घटनाओं को फिर से संगठित करने के लिए मिलकर काम करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मिलने वाले भौतिक साक्ष्यों के आधार पर घटनास्थल पर यह तय किया जाता है कि घटना कैसे हुई। इस दौरान अपराध या घटनास्थल की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है, गवाहों के बयान के हिसाब से घटनास्थल के साक्ष्यों की व्याख्या की जाती है, भौतिक साक्ष्य की लैब में जांच होती है, केस से जुड़ी सूचनाओं का चरणबद्ध तरीके से अध्ययन किया जाता है और तर्कों के आधार पर एक धारणा बनाई जाती है।

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कैसे होता है क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन?
क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन की शुरुआत पीड़ित या गवाहों के बयानों से होती है। अगर पीड़ित जीवित है तो घटना से जुड़ी जानकारी उसी से पूछी जाती है वरना इसके लिए चश्मदीद या घटनास्थल पर मौजूद किसी गवाह से पूछताछ होती है। अपराध स्थल पर मौजूदा वहां की हर एक चीज की बहुत ही सावधानी से फोटोग्राफी या विडियोग्राफी की जाती है। जांचकर्ताओं के लिए सब कुछ खुले दिमाग से करना महत्वपूर्ण होता है और हर एक चीज का बारीकी से विश्लेषण करना होता है।



अपराध स्थल की प्रारंभिक जांच:

  • प्रत्येक अपराध दृश्य की अपनी परिस्थितियाँ होती हैं। 
  • अपराध के पुनर्निर्माण के लिए भौतिक साक्ष्य एक महत्वपूर्ण कारक हैं।
  • प्रशिक्षित चिकित्सा परीक्षक यह भी जांच करते हैं कि मृत्यु के बाद शरीर को स्थानांतरित किया गया है या नहीं।


उदाहरण के लिए:
मान लीजिए कि कहीं किसी को गोली लगी है और उसपर संशय है कि वह आत्महत्या है या हत्या। इस स्थिति में जब क्राइम सीन रिक्रिएट होता है तब खून के धब्बों, गोलियों के निशान, गोली चलने की दिशा, गोली लगने की जगह, किसी भी तरह के पांव के निशान, घटनास्थल पर मिली कोई भी चीज, इस तरह की हर एक चीज को गहराई से जांच की जाती है और एक पैटर्न तैयार किया जाता है। आत्महत्या के मामलों में भी फंदे की लम्बाई, व्यक्ति की लंबाई, मकान के छत, गले के निशान, वहां मौजूद चीजें, इन सभी की गहराई से जांच की जाती है और बहुत बारीकी से उसका अध्ययन किया जाता है। 

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