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एफ-16 पर बुरी तरह फंसा पाकिस्तान, अमेरिका की कार्रवाई से क्या हो सकता है नुकसान?

Mon, 04 Mar 2019 04:38 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अमित मंडल Updated Mon, 04 Mar 2019 04:38 PM IST
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Know what Action US can take against Pakistan for misusing F-16
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत द्वारा पुलवामा हमले के बाद आतंकियों पर कार्रवाई करते हुए बालाकोट स्थित आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया गया। इस हमले के अगले दिन यानी 27 फरवरी को पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया। इसके लिए पाकिस्तान ने लड़ाकू विमान एफ-16 का इस्तेमाल किया। जिस एफ-16 को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया, अब वही उसके लिए मुसीबत बनने वाला है।

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अमेरिका ने भारतीय रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए इसपर पाकिस्तान से जवाब भी मांगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान को अमेरिका ने विमान इसी शर्त पर दिए थे कि वह इनका इस्तेमाल आतंकवाद के खात्मे के लिए ही करेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कोन फॉकनर ने कहा, हमारे पास इस बारे कुछ रिपोर्ट हैं और इसे लेकर कुछ और तथ्य जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। 
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ये लड़ाकू विमान अमेरिका ने 80 के दशक में कुछ शर्तों पर पाकिस्तान को दिए थे। इसमें सबसे जरूरी बात ये थी कि इसका इस्तेमाल पाकिस्तान किसी देश पर हमला करने के लिए नहीं करेगा। इसका उपयोग वो केवल अपने बचाव या सुरक्षा के लिहाज से कर सकता है। इसके साथ ही वैश्विक आतंकवाद के खात्मे के लिए इन विमानों का उपयोग किया जा सकता है।

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पाकिस्तान की सफाई 

पाकिस्तान ने भारत के आरोपों के खारिज करते हुए कहा कि उसने एफ-16 नहीं बल्कि जेएफ-17 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल किया था। यह विमान पाकिस्तान और चीन ने मिलकर तैयार किया है। अब अमेरिका ने कहा है कि वह इससे जुड़ी सभी रिपोर्ट्स पर ध्यान दे रहा है और इसके इस्तेमाल को लेकर भी चौंकन्ना है।

क्या कार्रवाई कर सकता है अमेरिका?

भारत में इस बात को लेकर कोई शंका नहीं है कि पाकिस्तान ने एफ-16 का ही इस्तेमाल किया। 80 के दशक में जब अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 दिए थे। उसी वक्त भारत ने मिराज-2000 को लेकर फ्रांस से सौदा किया था।

भारतीय वायु सेना के वाइस मार्शल आरजीएम कपूर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने जम्मू के ब्रिगेड और बटालियन मुख्यालय को निशाना बनाने की कोशिश की थी। साथ ही प्रेस कांफ्रेंस में राजौरी के पूर्वी इलाके में मिले 'एमराम' मिसाइल के टुकड़े दिखाते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल सिर्फ एफ-16 में ही किया जा सकता है। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें एएआरएएम मिसाइल के पार्ट भी एलओसी में मिले हैं, जिसे पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमान ने दागा था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका बड़ी कार्रवाई कर सकता है। पाकिस्तान को 80 के दशक में जो विमान दिए गए तो अमेरिका ने शर्त रखी थी। प्रेसलर संशोधन के बाद अमेरिका ने एफ-16 की बिक्री बंद कर दी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान तब परमाणु परीक्षण कर चुका था। 

प्रेसलर संशोधन के मुताबिक, उस देश को एफ-16 लड़ाकू विमान नहीं दिए जा सकते हैं जिसने परमाणु परीक्षण किया हो। इस संशोधन और परमाणु परीक्षण के बाद भी पाकिस्तान ने अमेरिका को एफ-16 का ऑर्डर दिया था। लेकिन इस समझौते के कारण अमेरिका इनकी सप्लाई नहीं कर पा रहा था।

इस संशोधन के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को नए लड़ाकू विमान दे दिए क्योंकि अफगानिस्तान में अमेरिका के आने के बाद हालात बदल गए थे। इसकी शर्त थी कि पाकिस्तान इनका इस्तेमाल केवल आतंक के खिलाफ ही करेगा। माना जा रहा है कि पाकिस्तान को दूसरी खेप देते समय पुराने विमानों पर भी यही शर्त रखी गई। 

पाकिस्तान को पड़ सकता है भारी 

पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अमेरिका दी जा रही वित्तीय मदद को रोक सकता है। इसके साथ ही वह आर्थिक दबाव भी डाल सकता है, जिससे पाकिस्तान मुश्किल में पड़ सकता है। इसके अलावा वह अन्य देशों और संगठनों के माध्यम से होने वाली फंडिंग को भी रोक सकता है। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि ये सब तभी हो पाएगा जब ये साबित होगा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ जिस एफ-16 का इस्तेमाल किया है, उसपर वो शर्त लागू होती है या नहीं।

भारत के पास भी है सबूत

रिपोर्ट के मुताबिक, एयर मार्शल चोपड़ा का कहना है कि पाकिस्तान को दी गई एफ-16 की पहली खेप पर कोई शर्त ना लगाने की वजह यह हो सकती है कि उस वक्त वार ऑन टेरर नहीं था। इसकी शुरुआत बाद में हुई थी। जिस कारण दूसरी खेप में यह शर्त लगाई गई थी।

भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ पुख्ता सबूत 

जिस मिसाइल को भारत ने सुबूत के तौर पर दिखाया है वह एमरॉम मिसाइल है, जो 80 के दशक के दौरान नहीं थी। वाइस मार्शल ने एफ-16 के अलावा पाकिस्तानी हमलावर टुकड़ी में जेएफ-17 और मिराज विमानों के भी शामिल होने की बात कही। साथ ही कहा कि विमान के इलेक्ट्रानिक सिग्नेचर से भी साबित होता है कि उस हमले में एफ-16 का इस्तेमाल किया गया। 

अमेरिका पहले ही एफ-16 को अपग्रेड करने से अपने हाथ खींच चुका है। पाकिस्तान ने इन्हें तुर्की से अपग्रेड करवाया है। इसके अलावा इस विमान में लगने वाले सभी पुर्जे भी अमेरिकी हैं। अमेरिका विमान से जुड़ी हर सप्लाई पर रोक लगा सकता है। इससे पाकिस्तान को ये नुकसान होगा कि उसकी एफ-16 की स्क्वाड्रन जमीन पर आ जाएगी। 
 

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