जानिए कैसी है पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लोगों की जिंदगी, ये भी मांग रहे आजादी
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- यहीं से पाकिस्तान को हर साल 7,000 करोड़ रुपये की आय होती है।
- पाकिस्तान सरकार अपनी परियोजनाओं के लिए बाहर के लोगों को लाकर बसाने की नीति शुरू कर चुकी है।
- पाक सेना की फर्जी मुठभेड़ में लगातार बलूचिस्तान में मौत और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
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विस्तार
कश्मीर को लेकर पाकिस्तान आए दिन दुष्प्रचार करता रहता है और हमारे देश पर अनर्गल आरोप लगाता रहा है। इतना नहीं पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय सेना का नाम भी घसीटा जाता है। जबकि सच्चाई क्या है, अब यह पूरी दुनिया जान चुकी है। जब भारतीय सेना पर पत्थरों से हमला किया जाता है तो वो क्यों चुपचाप खड़ी रहती है? जब वहां के घरों में छिपकर आतंकी उनपर हमला करते हैं तो वो क्यों सेना उन घरों पर हमला नहीं करती और खुद गोली खाती है?
लेकिन कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिता रहे बलोच लोगों से पूछिए तो पाकिस्तान के चेहरे से नकाब उतरता हुआ दिखता है। वहां पाक सेना ने मानवाधिकार हनन में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हजारों की संख्या में बलोच लोगों को अगवा करके कत्ल किया जा चुका है। तो जानते हैं पाकिस्तान के पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के बारे में।
दो हिस्सों में बंटा है ये
पाक अधिकृत कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा गया है, पहला हिस्सा है आजाद जम्मू-ओ-कश्मीर और दूसरा हिस्सा गिलगित-बल्तिस्तान। गिलगित-बल्तिस्तान रहित आजाद कश्मीर का इलाका 13,300 वर्ग किलोमीटर (5,135 वर्ग मील) पर फैला है और इसकी आबादी अंदाजन 40 लाख है। आजाद कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद है और इसमें 8 जिले, 19 तहसीलें और 182 संघीय काउन्सिलें हैं।
साल 1947 में बंटवारे के बाद से ही पीओकी का अलग कानून है। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, हाईकोर्ट और शुद की अलग विधानसभा भी है। फिलहाल यहां के प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर खान हैं। आजाद कश्मीर की सारी ताकत साल 1952 में मुजफ्फराबाद से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित मिनिस्ट्री ऑफ कश्मीर अफेयर्स को सौंप दी गई थी। यानि इसपर पाकिस्तान सरकार का पूरा नियंत्रण स्थापित है।
बलूचिस्तान में लोगों की हत्या
पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में सैंकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा है। हजारों लोग यहां से लापता भी हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना की फर्जी मुठभेड़ में लगातार मौत और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की जांच में ये पता चला था कि 5 हजार लोग लापता हैं। कोर्ट में ये मामला अभी भी जारी है। बता दें इसी मामले में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व फौजी शासक परवेज मुशर्रफ की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए थे।
मानवाधिकार संगठनों द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार 2003-2012 के बीच पाकिस्तानी सेना ने 8 हजार लोगों को अगवा किया है। साल 2008 में ही करीब 1100 बलूच लापता बताए जाते हैं। यहां सड़कों पर अकसर ऐसे शव पाए जाते हैं, जिनपर काफी अत्याचार हुआ होता है।
अल्पसंख्यक बन रहे निशाना
यहां एक दूसरा टकराव 2010 में हिंदुओं, शिया समुदाय और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के साथ शुरू हुआ। पाकिस्तानी तालिबान और कट्टर सुन्नी गुटों- लश्कर-ए-जांघी और जमायत-ए-इस्लामी ने उनपर अत्याचार किया। अनुमान के अनुसार हाल ही के सालों में 600 से ज्यादा लोगों की जानें गई हैं और करीब 3 लाख लोगों के विस्थापित होने की आशंका है।
बाहर के लोग बसा रही पाक सरकार
बलूच उग्रवादियों ने पाकिस्तान के कई हिस्सों से आकर बसे लोगों पर हमले किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2006 के बाद से करीब 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान सरकार ने अपनी परियोजनाओं के लिए बाहर के लोगों को लाकर बसाने की नीति शुरू कर दी है। इसके पीछे तर्क दिए जाते हैं बलूच लोगों में साक्षरता की कमी है और यहां हुनरमंद लोग भी नहीं हैं।
इसपर बलूच लोग कहते हैं कि पाकिस्तान सरकार ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह चाहती है कि बलूच लोगों को अल्पसंख्यक बना दिया जाए। साथ ही वह यहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी करना चाहती है।
ग्वादर भी है टकराव की वजह
बलूचिस्तान के तटीय इलाके ग्वादर में बंदरगाह निर्माण भी टकराव की वजह बन रहा है। चीन अपने दक्षिणी प्रांतों से पाकिस्तान में आर्थिक कॉरिडोर का एक अहम पड़ाव बनाना चाहता है। इसका निर्माण साल 2002 में शुरू हुआ था। इसपर पाकिस्तान की संघीय सरकार पूरा नियंत्रण कर रही है। वहीं निर्माण के इस काम में चीनी मजदूर और इंजीनियर लगे हुए हैं। बलूच लोगों की धरती हो रहे इस निर्माण कार्य से उन्हें बिल्कुल दूर रखा गया है।
केवल इतना ही नहीं कथित तौर पर बलूच लोगों से उनकी जमीनें लेकर सरकारी अधिकारियों ने भारी कीमत पर बेच दी हैं। इससे वहां के लोग बेहद नाराज हैं। जब भी ये लोग इस बात का विरोध करते हैं तो उनपर सौनिक कार्यवाही शुरू कर दी जाती है। यही कारण था कि बलूच अलगाववादियों ने साल 2004 में तीन चीनी इंजीनियरों को मार दिया था।
सेना के लोकप्रिय नेता की मौत
बलूचिस्तान में बीते साल सेना के लोकप्रिय नेता सिराज रायसानी (55) आम सभा को संबोधित कर रहे थे। वह बलूचिस्तान आवामी पार्टी के उम्मीदवार थे। जब वह मंच पर बोल रहे थे तभी एक आत्मघाती उनके समीप आकर खड़ा हो गया और खुद को बम से उड़ा लिया। इस हमले में सिराज तो मारे ही गए। साथ ही सभा में शामिल 149 लोग भी मारे गए। इसके अलावा 186 लोग घायल हुए।
मामले की जांच करने पर पता चला कि सेना के प्रिय नेता होने के कारण ही आतंकियों ने उनकी जान ली थी। इस हमले की जिम्मेदारी बाद में आतंकी संगठन आईएस ने ले ली। यह संगठन सेना द्वारा चलाए जा रहे आतंक विरोधी अभियान से नाराज था। बता दें इस संगठन का पाकिस्तान में पहले कोई वजूद नहीं था लेकिन सीरिया और इराक में हार के बाद यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव जमाना चाहता है।
आतंकियों का किया था इस्तेमाल
पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान के विद्रोहियों और अलगाववादियों के खिलाफ आंतकवादियों का इस्तेमाल किया था। आज वही आतंकी सेना के लोकप्रिय लोगों और नेताओं को अपना निशाना बना रहे हैं। आज सेना के दांव पेंच उसी पर उल्टे पड़ते जा रहे हैं।
बलूचिस्तान है बेहद आवश्यक
बलूचिस्तान राज्य पाकिस्तान के लिए बेहद आवश्यक राज्य है। यहीं से पाकिस्तान को हर साल 7,000 करोड़ रुपये की आय होती है। एशिया में सबसे ज्यादा गैस, सोना और तांबा इसी राज्य में होता है। लेकिन बदले में यहां के लोगों को कुछ नहीं मिलता। यहां के विद्रोहियों का कहना है कि सेना उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अपना नियंत्रण रख रही है। जो कि ठीक नहीं है। साल 2004 के बाद से अब तक हजारों छात्र, विद्रोही और कार्यकर्ताओं को मारा गया है।
सुरक्षा एजेंसी ने इन विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए लश्कर और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों का इस्तेमाल शुरू किया था। लेकिन जब यह सफल नहीं हुए तो आईएस ने मजबूर होकर सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया। वहीं पाकिस्तान सरकार भारत और अफगानिस्तान पर बलूच विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए आरोप लगाती रही है। सरकार का कहना है कि यही देश तालिबान को पाकिस्तान में सक्रिया बना रहे हैं।
बलूच नेशनल मूवमेंट के सदस्यों की हत्या
साल 2009 के अप्रैल माह में बलूच नेशनल मूवमेंट के सदस्य सदर गुलाम मोहम्मद बलूच और दो अन्य नेताओं लाला मुनीर और शेर मोहम्मद को कुछ बंदूकधारियों ने एक दफ्तर से अगवा कर लिया था। इसके करीब पांच दिन बाद यानि 8 अप्रैल को गोलियों से छलनी उनके शव एक बाजार में पाए गए। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का कहना है कि इसके पीछे पाकिस्तानी सेना का ही हाथ है। इस घटना के बाद पूरे बलूचिस्तान में विरोध प्रदर्शन हुए। वहां हुई हिंसा में आगजनी भी हुई।
आजाद बलूचिस्तान काउंसिल का गठन
साल 2009 में 12 अगस्त को आजाद बलूचिस्तान काउंसिल का गठन किया गया। कलात के खान मीर सुलेमान दाऊद ने खुद को बलूचिस्तान का शासक घोषित कर लिया था। बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी काउंसिल के धन्यवाद प्रस्ताव का जिक्र लाल किले के भाषण में किया था। सुलेमान दाऊद ने ब्रिटेन का आह्वान करते हुए कहा कि बलूचिस्तान पर गैर-कानूनी कब्जे के खिलाफ विश्व मंच पर आवाज उठाना उसकी नैतिक जिम्मेदारी है।
जब भारत पर लगाया आरोप
पाकिस्तान आज बेशक पुलवामा हमले में खुद के शामिल न होने की बात कह रहा है लेकिन वह खुद भी भारत पर आरोप लगा चुका है। चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल कमर बाजवा ने इसकी निंदा की। उन्होंने साथ ही पाक सेना का शुक्रिया भी किया। इसके बाद पाकिस्तान की मीडिया ने इस हमले का दोष भारत पर लगाने की कोशिश की। पाकिस्तान के विश्लषकों ने आरोप लगाते हुए कहा था कि भारत बलूचिस्तान में अलगाववादियों को समर्थन दे रहा है।
प्राकृतिक संसाधानों पर कब्जे का आरोप
बलूचिस्तान चीन को चेतावनी दे चुका है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के नाम पर बलूचिस्तान की धरती और उसके प्राकृतिक संसाधानों पर कब्जे की योजना बंद करे वरना उसे और भी हमलों का निशाना बनाया जाएगा। चीन और पाकिस्तान की सरकारें सीपीईसी को पाकिस्तान और खासकर बलूचिस्तान के लिए अहम बताती हैं। उनका मानना है कि इससे तरक्की होगी। इस योजना का विरोध न केवल सशस्त्र चरमपंथी समूह बल्कि बलूचिस्तान के कुछ गैर हथियारबंद संगठन और नेता भी कर रहे हैं।
बलूचिस्तान को खत्म करना
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के सीनियर कमांडर असलम बलोच चीन और पाकिस्तान पर ये आरोप लगा चुका है कि वह बलूच लोगों पर अत्याचार कर यहां के संसाधनों को लूट रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एएनआई को भेजे गए एक वीडियो इंटरव्यू में असलम ने बीजिंग व इस्लामाबाद पर बलूच की पहचान खत्म करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा था कि बलूचों पर अत्याचार इसलिए हो रहा है ताकि उन्हें पूरी खत्म किया जा सके। जिसमें पाकिस्तानी सेना भी शामिल है। उनका कहना है कि बलूचिस्तान संकट से घिरा हुआ है। जिसके लिए चीन और पाकिस्तान दोनों मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को इंटेलीजेंस इनपुट, हथियार आदि चीन से मिल रहे हैं। जिनका इस्तेमाल वह बलूचिस्तान में कर रहा है। चीन की मदद से ही पाक अपनी सेना तैनात करने में जुटा है। उनका निशाना ग्वादर है। चीन अपने नेवल बेस को मजबूत कर रहा है।
उनके अनुसार, बलूचिस्तान में पाकिस्तान के अवैध कब्जे का विरोध करने तथा स्वतंत्रता की मांग करने के कारण पाक सेना निहत्थे बलूचों की हत्या कर रही है। पाक-चीन आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण भी बलूचिस्तान की धरती पर हो रहा है। आए दिन पाक सेना द्वारा बलूच लोगों की हत्या और उनपर हमले की खबरें आती रहती हैं।