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Kiren Rijiju: क्या न्यायपालिका सरकार के काम में दखल दे रही है? जानें आखिर रिजिजू ने क्यों दी इस सवाल की सलाह

Tue, 02 May 2023 11:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 02 May 2023 11:03 PM IST
सार

कानून मंत्री मुंबई में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी है कि सरकार न्यायपालिका पर किसी भी तरह का दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। हम न केवल न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रख रहे हैं बल्कि इसे मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।

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Kiren Rijiju says Govt has not undermined judiciary every institution must respect Lakshman rekha
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने केंद्र द्वारा न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश करने वाले आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने मंगलवार को कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने के लिए कुछ नहीं किया है। उदारवादी होने का दावा करने वाले कुछ लोग लोगों के बीच यह गलतफहमी फैला रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक संस्थान को संविधान द्वारा निर्धारित 'लक्ष्मण रेखा' का सम्मान करना चाहिए।

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कुछ लोग गलतफहमी फैला रहे- रिजिजू
वे मुंबई में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी है कि सरकार न्यायपालिका पर किसी भी तरह का दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। हम न केवल न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रख रहे हैं बल्कि इसे मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उदारवादी होने का दावा करने वाले कुछ लोग बयानबाजी करके इस तरह की गलतफहमी फैला रहे हैं, लेकिन यह बिल्कुल भी सच नहीं है।
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ये सवाल पूछने की दी सलाह
इस दौरान इस सवाल पर कि क्या सरकार न्यायपालिका के कामकाज में दखल दे रही है? रिजिजू ने कहा कि एक सवाल इसके उलट भी पूछा जा सकता है कि क्या न्यायपालिका सरकार के काम में दखल दे रही है।

'संविधान की 'लक्ष्मण रेखा' का सबको सम्मान करना चाहिए'
इस दौरान कानून मंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारा संविधान हर संस्थान के लिए एक 'लक्ष्मण रेखा' बनाता है। जिसका  सम्मान किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कम करने या न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप करने के लिए कुछ नहीं किया है।

इस दौरान उन्होंने अदालतों में बढ़ते मामलों पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अदालती मामलों की बढ़ती संख्या देश के लिए सबसे बड़ी चिंता है। इसका समाधान प्रौद्योगिकी में है। आगे उन्होंने कहा कि हमारे देश में लगभग पांच करोड़ मामले लंबित हैं। इसका मतलब है कि न्याय में देरी हो रही है और इस तरह हमारे देश के लोगों के साथ पांच करोड़ अन्याय हो रहा है। 


शिंदे ने किया आग्रह
 इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी उपस्थित थे। उन्होंने इस मौके पर किरेन रिजिजू से बॉम्बे हाई कोर्ट का नाम बदलकर मुंबई हाई कोर्ट करने के प्रस्ताव पर गौर करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हाल ही में एक नए उच्च न्यायालय भवन के लिए उपनगरीय बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में जमीन आवंटित करने का फैसला किया है। 

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