फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Khalistani Terrorist: Two wanted Khalistani killed in other countries in 120 hours

Khalistani Terrorist: दूसरे मुल्कों में 120 घंटे में निपटे दो वांटेड खालिस्तानी, क्यों बेचैन हो उठा पाकिस्तान

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 19 Jun 2023 03:40 PM IST
सार

Khalistani Terrorist: सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे एक पूर्व आईपीएस बताते हैं कि ऐसे आतंकियों का मारा जाना, हमेशा एक इत्तेफाक नहीं माना जा सकता। इसके पीछे बहुत सी कहानियां होती हैं, जिन्हें पब्लिक प्लेटफार्म पर लाना ठीक नहीं होता। इतना ही समझ लें कि पाकिस्तान इनके मारे जाने से बेचैन हो उठा है...

विज्ञापन
Khalistani Terrorist: Two wanted Khalistani killed in other countries in 120 hours
Khalistani Terrorists - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

विदेशी मुल्कों की धरती से भारत में आतंकवाद फैलाने वाले दो मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकियों का महज '120' घंटे में निपट जाना एक बड़ी घटना है। खालिस्तानी आतंकी अवतार सिंह खांडा, जिसने लंदन स्थित भारतीय दूतावास पर तिरंगे को उताकर उसका अपमान किया था, 15 जून को बर्मिंघम के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। अब यानी 19 जून को कुख्यात खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में मौत हो गई। दो अज्ञात बंदूरधारियों ने निज्जर पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थी। ये दोनों ही आतंकी, एनआईए की वांटेड लिस्ट में शामिल थे। हरदीप सिंह निज्जर पर एनआईए ने दस लाख रुपये का इनाम रखा था।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Canada: कनाडा में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या, एक हफ्ते में दूसरे बड़े नेता की मौत

विज्ञापन

कई दशकों तक सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे एक पूर्व आईपीएस बताते हैं कि ऐसे आतंकियों का मारा जाना, हमेशा एक इत्तेफाक नहीं माना जा सकता। इसके पीछे बहुत सी कहानियां होती हैं, जिन्हें पब्लिक प्लेटफार्म पर लाना ठीक नहीं होता। इतना ही समझ लें कि पाकिस्तान इनके मारे जाने से बेचैन हो उठा है। वजह, सिख फॉर जस्टिस के संस्थापक एवं केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आतंकी घोषित किए गए गुरपतवंत सिंह पन्नू और पांच दिन में खत्म हुए निज्जर व खांडा, यह टोली पाकिस्तान जाकर आई थी। यह टोली वहां की इंटेलिजेंस एजेंसी 'आईएसआई' के बहुत करीबी संपर्क में रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह मारा गया अवतार सिंह खांडा

इन दोनों आतंकियों सहित खालिस्तान के कई बड़े चेहरे, भारतीय सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। इन दोनों मुल्कों में खालिस्तानी गतिविधियों के चलते भारत, वहां की सरकारों के साथ अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। अवतार सिंह खांडा ने लंदन में स्थित भारतीय दूतावास पर लगे तिरंगे को उतारने का दुस्साहस किया था। इस घटना पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया जताई तो ब्रिटेन ने त्वरित गति से दूतावास पर एक विशालकाय तिरंगा फहरा दिया था। इतना ही नहीं, अवतार सिंह खांडा को गिरफ्तार भी कर लिया गया। आईईडी तैयार करने का एक्सपर्ट, खांडा दूसरे मुल्क से ही खालिस्तान आंदोलन को हवा दे रहा था। सूत्रों का कहना है कि अवतार सिंह ने ही असम की जेल में बंद खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह को सलाह देने का काम किया था। अवतार सिंह खांडा की बर्मिंघम के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। इसके पीछे जो वजह बताई गई, उसमें अवतार सिंह की मौत का कारण जहरीला पदार्थ रहा है। उसे आईसीयू में लाइफ सपोर्ट पर रखा गया। 15 जून की रात उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। लंदन में खांडा की गिरफ्तारी के बाद एनआईए उसे भारत लाने के प्रयासों में जुटी थी।

10 लाख का इनामी निज्जर था मोस्ट वांटेड आतंकी

मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर पर एनआईए ने दस लाख रुपये का इनाम रखा था। हरदीप सिंह, कनाडा में बैठकर भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ा रहा था। पंजाब में कई बड़े आपराधिक मामलों में उसका नाम था। दो साल पहले जालंधर में हिंदू पुजारी की हत्या में निज्जर का नाम सामने आया था। उसने खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) के जरिए पुजारी की हत्या की साजिश रची थी। आतंकी मामलों में एनआईए द्वारा उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। सूत्रों के मुताबिक, निज्जर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' के लगातार संपर्क में था। वह 2014 में पाकिस्तान गया था। आईएसआई के माध्यम से उसकी मुलाकात पाकिस्तान में छिपे खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह तारा से कराई गई। दोनों पर आरोप था कि इन्होंने भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। साथ ही इन्होंने अमृतपाल सिंह की तरह कई दूसरे युवाओं को खालिस्तान की राह पर लाने का प्रयास किया। पंजाब में 'वारिस पंजाब दे' संगठन को आगे बढ़ाने में निज्जर और अवतार सिंह, दोनों का हाथ बताया जा रहा है। निज्जर ने आईएसआई की मदद से कई जगहों पर आतंकी ट्रेनिंग कैंप भी लगाए थे। इनमें एक कैंप 2015 के दौरान ब्रिटिश कोलंबिया के मिसजेन हिल्स पर लगाया था। इन ट्रेनिंग कैंपों का मकसद, युवाओं को खालिस्तानी आतंकवाद की राह पर ले जाना था।

पंजाब में रोज आ रहे ड्रोन के पीछे किसका हाथ

सूत्रों का कहना है कि पंजाब में कुछ महीनों से ड्रोन आने के मामलों में एकाएक तेजी देखी गई है। अमूमन रोजाना ही कोई न कोई ड्रोन दिखाई पड़ रहा है। अनेकों ड्रोन ऐसे भी हैं, जिनके आने का पता ही नहीं चलता। ड्रोन के जरिए पंजाब में हथियार, गोला बारूद और नशे की खेप पहुंचाई जाती है। खालिस्तानी मूवमेंट को खड़ा करने के लिए आईएसआई ने निज्जर और खांडा का खूब इस्तेमाल किया है। ड्रोन के साथ भेजी जा रही खेप को कहां और कैसे पहुंचाना है, इस नेटवर्क की कमान निज्जर ने संभाल रखी थी। इस मामले में उसे गुरपतवंत सिंह पन्नू का भरपूर सहयोग मिलता रहा है। हाल ही के वर्षों में 'पन्नू' भी पाकिस्तान जा चुका है। उसने खालिस्तान के मुद्दे पर जनमत संग्रह को लेकर लाहौर के प्रेस क्लब में बाकायदा प्रेस को संबोधित किया था। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान की यात्रा के दौरान आईएसआई व उसके गुर्गें आतंकी संगठनों के सदस्यों के साथ पन्नू की मुलाकात हुई थी। किसान आंदोलन में लोगों को तोड़फोड़ के लिए उकसाने वाले आतंकवादी एवं सिख फॉर जस्टिस के संस्थापक और कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नू को लेकर भारतीय एजेंसियां ये बात जानती हैं कि उसे पकड़ना आसान नहीं है। अमेरिका या कनाडा में बैठकर वह आग उगलता रहेगा और इधर पुलिस एवं दूसरी जांच एजेंसियों के पास उसके खिलाफ केवल अधर काटने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचेगा।

क्या पन्नू के साथ भी कोई घटना/हादसा संभावित है

पूर्व अधिकारी बताते हैं कि एनआईए के अलावा पंजाब और हरियाणा में भी पन्नू के खिलाफ केस दर्ज हैं। वह हमारे देश का नागरिक नहीं है, इसी वजह से जांच एजेंसियों के हाथ बंध जाते हैं। कुछ देश ऐसे हैं, जहां भारत के साथ अपराधियों के प्रत्यापर्ण को लेकर संधि या समझौता हुआ है। जिन देशों के साथ ऐसा नहीं है, वहां से किसी अपराधी को भारत लाने में दिक्कत होती है। 'पन्नू' कभी अमेरिका में रहता तो कभी ब्रिटेन में। वहां से पन्नू जो नफरत भरे वीडियो भेजकर भारत में खालिस्तान को बढ़ा रहा है, उस पर प्रतिबंध लगाना आसान नहीं है। वजह, उन देशों में ऐसी बातों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया जाता है। अगर उसके खिलाफ कार्रवाई होती है तो उसे मानवाधिकार का उल्लंघन कह दिया जाता है। किसान आंदोलन से लेकर अभी तक वह लगातार पंजाब के युवाओं को खालिस्तान की मांग के लिए उकसा रहा है। जिस देश के साथ ऐसे मामलों को लेकर कोई संधि नहीं है, वहां द्विपक्षीय संबंध भी देखे जाते हैं। ऐसे मामलों में ज्यादा दखल से संबंध खराब होने का खतरा बना रहता है। पन्नू ने उन देशों में शरण नहीं ली है, वह उस देश का नागरिक है। यह नागरिकता ही उसके खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। एनआईए ने पन्नू की जमीन और दूसरी प्रॉपर्टी जब्त की है। उसमें यह आधार था कि वह देश-विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग करता है। गृह मंत्रालय ने उसे यूएपीए के तहत आतंकी घोषित किया है। पूर्व अधिकारी का कहना था, जब ऐसे आरोपियों के खिलाफ कोई कानूनी रास्ता नजर नहीं आता तो सरकार हाथ पर हाथ धरे रहकर नहीं बैठ सकती। संभव है कि आने वाले समय में खालिस्तान के कई ऐसे चेहरे जमीन पर गिरते हुए नजर आएं।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed