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Khabron Ke Khiladi: हरियाणा में बागी किसका करेंगे ज्यादा नुकसान, सीएम पद की खींचतान का क्या होगा परिणाम?

Sat, 28 Sep 2024 05:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 28 Sep 2024 05:01 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनाव के बीच इस हफ्ते के 'खबरों के खिलाड़ी' में कांग्रेस और भाजपा बागियों को लेकर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 

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Khabron Ke Khiladi: Who will be harmed most by rebels in Haryana what will be result of tussle for CM Post
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए दो चरण का मतदान हो चुका है। तीसरे चरण में 1 अक्तूबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं, हरियाणा में 5 अक्तूबर को मतदान है। हरियाणा में मतदान से पहले कांग्रेस और भाजपा बागियों से परेशान है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी लड़ाई जारी है। इसी तरह भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित चेहरा होने के बाद भी अलग-अलग नेता दावेदारी पेश कर रहे हैं। इस हफ्ते के 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 

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समीर चौगांवकर: भाजपा और कांग्रेस, दोनों को विरोधियों से ज्यादा अपनी ही पार्टी के बागियों से चुनौती मिल रही है। जहां तक मुख्यमंत्री का सवाल है तो भाजपा का वहां 10 साल तक मुख्यमंत्री रहा है। भले पार्टी कह रही है कि जीतने पर नायब सिंह सैनी ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन अनिल विज और राव इंद्रजीत सिंह भी अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही मुख्यमंत्री बनेंगे, भले ही कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला अपनी दावेदारी पेश कर रहे हों। इसी तरह अगर भाजपा जीतती है तो सैनी ही मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। 
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अवधेश कुमार: हरियाणा जैसे राज्य में लंबे समय बाद कांग्रेस में कुछ नेता अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए हैं। रही बात भाजपा की तो 2019 में उनकी ही पार्टी के विद्रोहियों ने पांच सीटें हरा दी थीं। वहीं, पांच पर बागी जीतकर आए थे। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद भाजपा 50 से ज्यादा सीटें जीतकर आई होती। जहां तक कुमारी सैलजा की बात है तो उन्हें बताया नहीं गया कि उनके समर्थकों को क्यों टिकट नहीं दिया गया। इसी आधार पर उनका विरोध है। जो कुछ हरियाणा में दिख रहा है, वह सतह पर इससे ज्यादा है। इस समय देश में विचारधारा, जीवन मूल्य, पार्टी के आदर्श, सब मौन हो गए हैं। अब व्यक्ति की आन, बान, शान, पद, प्रभाव और पैसा ज्यादा अहम हो चुका है। यह कांग्रेस के अंदर भी है और भाजपा के अंदर भी। यह जरूर है कि भाजपा में यह थोड़ा कम है। 

रामकृपाल सिंह: खींचतान हर पार्टी में होती है। हर पार्टी में महत्वाकांक्षी लोग होते हैं। केवल उस पार्टी में खींचतान नहीं हो सकती है, जिसमें केवल एक ही नेता हो और बाकी सभी कार्यकर्ता हों, लेकिन ऐसा होता नहीं है। कुछ समय पहले ही मध्य प्रदेश, राजस्थान में कहा जा रहा था की कांग्रेस की लहर चल रही है। नतीजे कुछ और रहे। इसलिए नतीजों के पहले कुछ कहना सही नहीं होगा। 

विनोद अग्निहोत्री: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव में सभी कह रहे थे कि मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर है तो छत्तीसगढ़ में तो कांग्रेस आ ही रही है। नतीजे कुछ और रहे। इसी तरह लोकसभा चुनाव में भी नतीजों के दिन दोपहर 12 बजे तक लोग नतीजे पटलने के दावे कर रहे थे। आज की तारीख में हुड्डा जी के समर्थकों को सबसे ज्यादा टिकट मिले हैं। उनकी स्वीकार्यता सबसे ज्यादा है, लेकिन चुनाव के बाद क्या समीकरण बनते हैं, यह कोई नहीं कह सकता है। 


राकेश शुक्ल: अनिल विज को पता है कि 2014 के बाद भाजपा में मुख्यमंत्री वही बनेगा, जो आलाकमान तय करेगा। सैलजा की कहनी यह है कि वो कांग्रेस की नब्ज को दबा रही है। सैलजा दलित और महिला के नाम पर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर रही है। सैलजा और हुड्डा, दोनों के समर्थकों को पता है कि मंच साझा करने से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कम नहीं होती है। अगर बहुमत आता है तो चेहरा चयन करने में काफी दिक्कत आने वाली है। इस बार कांग्रेस चेहरे पर चुनाव लड़ रही है तो भाजपा सोशल इंजीनियरिंग के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: जिस तरह खींचतान चल रही है, यह क्या रूप लेगी, यह चुनाव के बाद तय होगा। चुनाव के बाद अगर कांग्रेस को बहुत बड़ा बहुमत नहीं मिलता है तो समीकरण बहुत रोचक होने वाले हैं। भाजपा और कांग्रेस के अलावा जो दल हैं, उनके अपने वोट बैंक हैं। उन्हें जो वोट मिलेंगे वो कांग्रेस का ज्यादा नुकसान करेंगे। इनेलो हो या जजपा या फिर आप, ये सभी दल भाजपा से ज्यादा कांग्रेस का नुकसान करेंगे।

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