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खबरों के खिलाड़ी: तीनों राज्यों में कयासों का दौर, मध्य प्रदेश-राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कैसे चुने जाएंगे CM?

Sat, 09 Dec 2023 04:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 09 Dec 2023 04:03 PM IST
सार

Khabron Ke Khiladi: पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद तीन राज्यों में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही भाजपा की खोज चर्चा में है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं मिल सका है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही तीनों राज्यों में ये चेहरे मिल जाएंगे। 

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Khabron Ke Khiladi: speculation about how CM will be elected in MP, Rajasthan and Chhattisgarh Know updates
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांच में से तीन राज्यों यानी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को जीत मिली है। तीनों ही राज्यों में भाजपा ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए बिना चुनाव लड़ा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा था कि यहां चेहरा कमल यानी पार्टी का चुनाव चिह्न ही है। हालांकि, नतीजे सामने आने के बाद तीनों ही राज्यों में अब चेहरों पर ही पेंच फंसा है। ये चेहरे कौन से हैं? मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कौन-कौन है? किसके पक्ष में क्या समीकरण हैं? नेताओं के चयन का क्या आधार होगा? इस हफ्ते के 'खबरों के खिलाड़ी में' इन सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश की गई। इस दौरान चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा त्रिपाठी, राहुल महाजन, प्रेम कुमार, अवधेश कुमार और समीर चौगांवकर मौजूद रहे।
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पूर्णिमा त्रिपाठी
प्रक्रिया में समय लग रहा है। ये समय क्यों लग रहा है, इसे देखना होगा। भाजपा पूरे चुनाव में प्रयोग के मोड में रही है। अब मुख्यमंत्री के चयन में भी वो प्रयोग जारी है। जहां तक चेहरों के चयन का सवाल है तो मुझे लगता है कि उसमें दो-तीन फैक्टर्स का ध्यान रखा जाएगा। 
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पहला वो चेहरा दलित या आदिवासी हो सकता है। दूसरा महिलाओं को रिझाने में भाजपा आगे रही है। अगर दलित या आदिवासी के साथ महिला का चेहरा भी आ गया तो भाजपा के लिए यह 'डबल बेनिफिट' होगा। मुझे लगता है कि जब नाम सामने आएंगे तो हम सब चौंकेंगे। 
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राहुल महाजन
अगर सीधा-सीधा होता तो शायद इतना समय नहीं लगता। इससे तो तय है कि कुछ नए नामों पर विचार चल रहा है। इसीलिए समय ज्यादा लग रहा है। अब हम आते हैं कि इस चयन में कौन से कॉम्बिनेशन होंगे। इसमें मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा मुश्किल राजस्थान में आने वाली है। क्योंकि वसुंधरा राजे को नकारना इतना आसान नहीं होगा। वहीं, मध्य प्रदेश में शिवराज के अलावा कौन से विकल्प हो सकते हैं, यह देखना होगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर दूसरे नामों पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं छत्तीसगढ़ की बात करें तो वहां प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव बड़े दावेदार हो सकते हैं। छत्तीसगढ़ में साहू समाज का बड़ा प्रभाव है। साव इसी समाज से आते हैं। 

प्रेम कुमार
एक चुनाव जनता ने कर दिया। अब एक और मिनी चुनाव चल रहा है। जहां कोई और तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा। इतनी देरी क्यों हो रही है, यह बड़ा सवाल है। ऐसे में जब जनता ने स्पष्ट बहुमत दिया, तब इतना समय नहीं लगना चाहिए। यह एक तरह से भाजपा का संकट है जिसे छुपाया जाता रहा है।  

अवधेश कुमार
मूल बात यह है कि देरी क्यों हो रही है। क्या केवल व्यक्ति के चयन में समस्या है या किसी बड़े लक्ष्य प्राप्ति के लिए चेहरे के चयन में समय लग रहा है। जितनी मेरी समझ है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कुछ लक्ष्य तय किए हैं। दूसरा यह है कि वो यह चाहते हैं कि जैसे अटल-आडवणी के बाद जिस तरह से नेतृत्व का संकट पैदा हुआ, वो आगे नहीं आए। इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। तीसरा हम सब जानते हैं कि 2024 का चुनाव भी आगे है। इसका भी ध्यान रखना है। जहां तक वसुंधरा राजे का सवाल है, मैं कह सकता हूं कि शायद अब उनका नाम दौड़ में नहीं है। इनके अलावा जो दो-तीन नाम बच रहे हैं, उनमें से किसी को चुना जा सकता है। तीनों राज्यों में से एक कम से कम एक राज्य में महिला मुख्यमंत्री हो सकती है।  शिवराज सिंह चौहान को पहले नहीं हटाया गया। अब अगर फिर से उन्हें सीएम बनाया जाता है तो इससे पता चलेगा कि केंद्रीय नेतृत्व को उन पर भरोसा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रहे हैं, जो पिछड़ी जाति का बड़ा चेहरा रहे हैं। ऐसे में वहां इसका भी ध्यान रखा जाएगा। 


क्या दौड़ में जो चेहरे हैं उनमें कोई चेहरे बदले हैं?

समीर चौगांवकर

आम तौर पर किसी भी सरकार के गठन में सात से आठ दिन लगता है। ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि बहुत ज्यादा देर हुई है। जहां तक चेहरे के चयन की बात है तो प्रधानमंत्री मोदी और संगठन चाहता है कि इन तीनों राज्यों में इस तरह का नेतृत्व खड़ा किया जाए जिससे तीनों राज्यों में गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसी स्थिति बन सके, जहां बार-बार पार्टी सत्ता में वापसी कर सके। चेहरे कौन से होंगे, इस बारे में मुझे लगता है कि तीनों राज्यों में पार्टी नए चेहरों को लेकर आएगी। छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव एक बड़े दावेदार हो सकते हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश में भी पार्टी शिवराज से इतर किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी। मुझे तो ये भी लगता है कि कोई ऐसा चेहरा भी मुख्यमंत्री बन सकता है कि जिसने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा हो। ये भी हो सकता है कि कोई पहली बार का विधायक हो। पार्टी के सामने बड़ी चुनौती ये होगी कि जो राज्यों के बड़े चेहरे हैं, वह उन्हें कहां एडजस्ट करती है। मुझे लगता है कि अगले 48 घटें के अंदर तीनों राज्यों में चेहरे सामने आ जाएंगे। और अगले तीन से चार दिन के अंदर बाकी चेहरों को क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, उसका भी पता चल जाएगा।

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