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Khabron Ke Khiladi: लोकसभा चुनाव नतीजों के किस दल के लिए क्या हैं मायने? बता रहे हैं खबरों के खिलाड़ी

Sat, 08 Jun 2024 07:47 PM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Jun 2024 07:47 PM IST
सार

Lok Sabha Election Results 2024: लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। एनडीए इस बार बहुमत में जरूर है, लेकिन भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। इन नतीजों के मायने क्या हैं, यह विश्लेषकों से जानते हैं।
 

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Khabron ke khiladi pm narendra modi third term nda alliance partner nitish naidu role crucial
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : Amarujala

विस्तार

बीते हफ्ते लोकसभा चुनाव के नतीजे आ गए। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार शपथ लेंगे। यह नतीजे किस दल के लिए क्या संदेश देते हैं? उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में भाजपा की हार की वजह क्या रही? जो बड़े चेहरे हारे, उसके पीछे क्या वजह रही और जो जीते उनकी जीत का अंतर क्यों कम हो गया? इन सभी सवालों पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, बिलाल अहमद और शांतनु गुप्ता मौजूद रहे।
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हर्षवर्धन त्रिपाठी: इन नतीजों ने आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को छोड़कर सभी को कुछ न कुछ दिया है। इस चुनाव को अगर संक्षेप में समझें तो सत्ता के साथ चलते हुए जो कमियां आती हैं, उसका कोर्स करेक्शन नहीं कर पाना, खराब तरीके से टिकट बांटना भाजपा को देश के सबसे बड़े सूबे में नुकसान पहुंचा गया। विपक्ष का संविधान खत्म हो जाएगा, यह नरैटिव सेट कर देने से भी भाजपा को नुकसान हुआ। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: अब लोग खुलकर बोल रहे हैं। अगर ये बातें पहले बोली जातीं तो शायद इन्हें जहां पहुंचना था, वहां पहुंच जातीं। यह चुनाव ऐसा है कि जिसमें जीता हुआ पक्ष हारे हुए जैसा दिखाई दे रहा है। यह चुनाव बता रहा है कि अब सत्ताधारी दल को कोर्स करेक्शन की बहुत जरूरत है। अब जो सरकार चलेगी, वो चेक एंड बैलेंस के साथ चलेगी। 

राकेश शुक्ल: जहां हारे, हम वहां की चर्चा करते हैं और जहां जीते हैं, वहां की चर्चा नहीं करते हैं। सवाल यह है कि हमें इस बात की समीक्षा करनी चाहिए कि कोई क्यों जीता। अगर यह समीक्षा होगी तो हार का कारण ढूंढना आसान हो जाएगा। इस देश में वन टाइम योजना लाभकारी नहीं है, यह साबित हो गया। 2014, 2019 और 2024, इन तीनों चुनावों को देखेंगे तो 2014 में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा था, 2019 में राष्ट्रवाद बड़ा मुद्दा था, 2024 में संविधान और आरक्षण बड़ा मुद्दा बन गया। 

बिलाल अहमद: यकीनन भारतीय जनता पार्टी को कोर्स करेक्शन की जरूरत है। उत्तर प्रदेश के अंदर सामाजिक न्याय, महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों का गुणात्मक प्रभाव देखने को मिला। समाज का एक बड़ा वर्ग इन मुद्दों पर टिका रहा और ध्रुवीकरण नहीं हुआ। 

अवधेश कुमार: यह चुनाव परिणाम ऐसा है, जिसमें दो-तीन दलों को छोड़ दीजिए तो सबके लिए खुश होने का मौका है। सपा का प्रदर्शन अभूतपूर्व है। ममता बनर्जी के लिए भी ऐसा ही है। यह परिणाम ऐसा है कि अब आगे की राजनीति में बहुत कुछ बदलता हुआ दिखाई देगा। चुनाव परिणाम के दो दिनों तक ऐसा माहौल बना जैसे विपक्ष जीत चुका है और सत्ता पक्ष हार गया है। पिछले तीन दिन में सबकुछ बदल गया है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक जिस तरह के नतीजे रहे, यह भाजपा के लिए एक गंभीर स्थिति है। 


शांतनु गुप्ता: भारत में यह केवल दूसरी बार हो रहा, जब कोई नेता लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बन रहा है। दुनियाभर के बड़े-बड़े नेता तीसरी बार आते-आते कमजोर पड़ गए। इसके कई उदाहरण हैं। इसलिए इस जीत को छोटा नहीं माना जाना चाहिए। नरेंद्र मोदी तो बेहतर उम्मीदवार नहीं थे, फिर उनका वोट प्रतिशत कैसे कम हो गया। रवि किशन का वोट शेयर 10 फीसदी के करीब कैसे कम हो गया। जिस प्रणाली से भाजपा जीतती थी, उसी में वह शिथिल हो गई और यही उसकी हार की वजह बनी। 

विनोद अग्निहोत्री: चुनाव और युद्ध, दोनों के परिणाम होते हैं, उसमें हार के कई कारण होते हैं। उनका अपने-अपने हिसाब से विश्लेषण होता है। अयोध्या की बहुत दिलचस्प कहानी है। जब-जब अयोध्या में भाजपा ने कुछ बड़ा किया है, वहां से भाजपा हारी है। ओडिशा में तो भाजपा को बहुत अच्छी सफलता मिली है। आने वाले समय में प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी अग्निपरीक्षा होगी, जब उन्हें गठबंधन सरकार चलानी है। दूसरी अग्निपरीक्षा राहुल गांधी की होगी कि क्या वो इन नतीजों के बाद विपक्ष को एकजुट रख पाते हैं।
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