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खबरों के खिलाड़ीः मुख्यमंत्री कौन होगा? शिवकुमार बनाम सिद्धारमैया की रेस में जानें किसका पलड़ा भारी
Sat, 13 May 2023 03:20 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 13 May 2023 03:20 PM IST
सार
'चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, जब-जब स्थानीय नेतृत्व मजबूत होता है, तभी आप सत्ता में आ सकते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व मजबूत रहा और पार्टी को इसका फायदा भी मिला।'
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डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया, रणदीप सुरजेवाला
- फोटो : ट्विटर/रणदीप सिंह सुरजेवाला
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विस्तार
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद जिस चीज की अब चर्चा है, वो है सीएम पद का चेहरा। कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सीएम बनने की प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस इनमें से किस नेता पर भरोसा जताती है या फिर किसी तीसरे चेहरे पर दांव लगाती है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री का कहना है कि सिद्धारमैया सीएम रह चुके हैं। उन्होंने पांच साल सरकार चलाई है और उनका सोशल बेस है तो उनका पलड़ा भारी लग रहा है।
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डीके शिवकुमार को अहम विभाग और उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। शिवकुमार पर भ्रष्टाचार के मामले भी चल रहे हैं, जो उनके खिलाफ जा सकता है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, जब-जब स्थानीय नेतृत्व मजबूत होता है, तभी आप सत्ता में आ सकते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व मजबूत रहा और पार्टी को इसका फायदा भी मिला।
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'जातीय समीकरण साधने में चूक गई भाजपा'
2013 के विधानसभा चुनाव इस बार दोहराया गया है। 2013 में येदियुरप्पा ही भाजपा को सत्ता में लेकर आए थे तो येदियुरप्पा को कमतर आंकना भाजपा को भारी पड़ा। भाजपा ने सीएम चेहरे को बदला, ये भाजपा को भारी पड़ा। भाजपा ने एक बड़ा जोखिम लिया कि वह लिंगायत के किले से बाहर निकलना चाहा लेकिन यह उन्हें भारी पड़ा। कर्नाटक में लिंगायत मतदाता भाजपा की ताकत थे लेकिन उन्हें ही साइडलाइन करना और गैर लिंगायत को जोड़ने की कोशिश भाजपा को उल्टा पड़ गई। दक्षिण के राज्यों में जातिगत राजनीति हमेशा से प्रभावी रही है और इस बार जातीय समीकरणों को साधने में भाजपा रणनीति के स्तर पर कहीं ना कहीं चूक गई। भारत जोड़ो यात्रा का भी विधानसभा चुनाव पर बड़ा असर पड़ा।
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पत्रकार पंकज कुमार की राय इतर है और उनका कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस का भावी चेहरा डीके शिवकुमार हैं। वोक्कालिगा समुदाय से आना भी डीके शिवकुमार के पक्ष में जा सकता है। साथ ही चुनाव के दौरान शिवकुमार ने जिस सक्रियता से प्रचार किया, वह भी कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा।