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Khabron ke khiladi: सावरकर को लेकर कर्नाटक के मंत्री के बयान पर बवाल, महाराष्ट्र में किसे फायदा, किसे नुकसान?
Sat, 05 Oct 2024 08:05 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 05 Oct 2024 08:05 PM IST
सार
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव के वी डी सावरकर पर बयान ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है, जिसके बाद बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया। यह बयान महाराष्ट्र के आगामी चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी मुद्दे पर चर्चा की गई।
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खबरों के खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव का विनायक दामोदर सावरकर पर दिया बयान बीते हफ्ते सुर्खियों में रहा। इस पर राजनीति भी शुरू हो गई। वहीं, बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने मंत्री के खिलाफ मामला भी दर्ज करा दिया। गुंडू राव के बयान को महाराष्ट्र के चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस हफ्ते के 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
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रामकृपाल सिंह: मेरा मानना है कि कई बार राजनेता अति उत्साह में ऐसे बयान देते हैं। यह एक वर्ग विशेष को खुश करने की कोशिश होती है। प्रतीकों पर इस तरह के हमले से कोई फायदा होता है, यह मैं नहीं मानता हूं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जब कोई मुद्दा बार-बार उठाता है तो कई लोग उन मुद्दों पर बिना पढ़े इस तरह के बयान देते हैं। सावरकर पर इतनी बातें हो चुकी हैं कि इस तरह के बयानों से कोई खास फायदा होगा, ये मुझे नहीं लगता है।
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अवधेश कुमार: राहुल गांधी के पास जब से कांग्रेस का नेतृत्व आया है, तब से कांग्रेस की बदली हुई सोच के साथ देश के हिंदुत्व के प्रतीकों पर सोच समझकर हमले हो रहे हैं। इसके पीछे सोच यह है कि अगर इस विचार पर हमला नहीं किया तो आजादी के आंदोलन का जो पूरा श्रेय कांग्रेस को जाता है, उसमें सेंध लगेगी। उसे स्पष्ट करना चाहिए कि क्या कांग्रेस अपनी पार्टी के नेता के बयान का समर्थन करती है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: यह एक मंत्री का दिया गया बयान है। इस तरह के बयान की कोई जरूरत नहीं थी। कांग्रेस ने सावरकर के ऊपर बोलना अब कम कर दिया है। हालांकि, कुछ नेता अभी भी लाइमलाइट में आने के लिए इस तरह के बयान गाहे-बगाहे देते हैं। यह भी उसी तरह का है। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कांग्रेस की ओर से इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। महाराष्ट्र चुनाव से पहले कांग्रेस ने भाजपा को एक मुद्दा दे दिया है।
राकेश शुक्ल: पांच दिन पहले ही महाराष्ट्र सरकार ने गाय को राज्यमाता का दर्जा दिया था। उसके बाद यह बयान दिया गया। गुंडुराव राज्य सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री हैं। मुझे लगता है कि कांग्रेस की तरफ से सुनियोजित बयान दिया गया है।
समीर चौगांवकर: राजनीति एक ऐसी जगह है, जहां मुर्दे भी चैन से नहीं सो सकते हैं। भाजपा को जब सहूलियत होती है वो नेहरू से जुड़े गड़े मुर्दे उठाकर ले आते हैं। ऐसे ही जब कांग्रेस को जरूरत होती है तो वो सावरकर को लेकर गड़े मुर्दे उठाकर ले आते हैं। सावरकर का व्यक्तिव ऐसा ही रहा है। हिंदुत्व को देखने का उनका अपना अलग नजरिया था। इसी वजह से न संघ उन्हें अपना कहता है, न ही कांग्रेस उन्हें अपना कह सकती है। मंत्री का बयान निहायत हास्यास्पद है। मुझे लगता है कि कांग्रेस को इससे बचना चाहिए था। महाराष्ट्र की राजनीति पर इसका असर पड़ेगा, इसकी संभावना मुझे कम लगती है।
विनोद अग्निहोत्री: सवारकर के जीवन के कई पक्ष हैं। एक उनका महान क्रांतिकारी पक्ष है, जिसको लेकर कोई विवाद नहीं है। दूसरे पक्ष को लेकर विवाद है। हिंदुत्व शब्द सावरकर की देन है। उन्होंने कहा था कि हिंदुत्व एक विचारधारा है और यह हिंदू से अलग है। आप बार-बार सावरकर को लेकर, कभी नेहरू को लेकर, कभी गांधी को लेकर इस तरह के बयान देते हैं। मुझे लगता है कि जब राजनीतिक दलों को वर्तमान समस्याओं का हल नहीं दिखाई देता तो वो गड़े मुर्दे उखाड़ते हैं।