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Khabaron Ke Khiladi: क्या इस बार सही साबित होंगे एग्जिट पोल, विश्लेषकों ने बताया आखिर कहां दिख रहा झोल

Sat, 02 May 2026 09:00 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्रा Updated Sat, 02 May 2026 09:00 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi West Bengal Assam Tamil Nadu Kerala Puducherry Election Exit Polls expert Analysis
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मतदान खत्म हो चुका है। सभी राज्यों के एग्जिट पोल भी सामने आ गए। तमिलनाडु, असम और पुदुचेरी में एक बार फिर से सत्ताधारी दलों की वापसी के अनुमान लगाए गए हैं। वहीं, केरल और तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के आसार जताए जा रहे हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, राजकिशोर और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 
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अनुराग वर्मा: एग्जिट पोल को लेकर हमेशा ये रहा है कि जो एग्जिट पोल में हार रहा होता है वो कहता है कि हम इसे मानते ही नहीं हैं। ये गलत हैं। वहीं, जो जीत रहा होता है वो उसे ही असली नतीजे बताता है। जहां तक बंगाल की बात है तो वहां जिस तरह बंपर वोटिंग हुई है, उससे ये तय है कि बंगाल का मतदाता किसी की झोली बहुत बंपर तरीके से भरने वाला है। असम में सभी एग्जिट पोल एक ही तरह का अनुमान लगा रहे हैं। 
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राजकिशोर: बंगाल को लेकर पिछले चुनाव में हुए एग्जिट पोल गलत रहे थे। बाकी राज्यों में सही रहे थे। इसकी वजह ये है कि बंगाल के वोटर को पढ़ पाना बहुत मुश्किल है। असल मुद्दा ये है कि बंगाल समुदाय ये मानता था कि उनकी एक संस्कृति है जिसमें वो भाजपा को बाहरी मानते थे। हालांकि, इस बार वहां जो असंतोष उभर रहा था। भाजपा और आरएसएस ने इस बार जमीन पर काम करके उसे अपनी ओर करने की कोशिश की है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: असम, पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल के एग्जिट पोल पर ज्यादा संशय नहीं है। असम में हम मानकर चल रहे थे कि हिमंता की सरकार आने वाली है। कांग्रेस ने शुरुआत ठीक की थी लेकिन बाद में उसकी पकड़ ढीली पड़ गई। केरल में एलडीएफ और यूडीएफ का पैटर्न रहा है। एलडीएफ के दो टर्म हो गए हैं ऐसे में हो सकता है कि वहां के लोग बदलाव चाहते हों। तमिलनाडु में स्टालिन ने जिस तरह से प्रचार किया उससे उन्हें फिर से सत्ता मिल सकती है। हालांकि, विजय डेंट कर सकते हैं। हालांकि कितना करकें ये प्रिडिक्ट नहीं किया जा सकता है। बंगाल में जब के प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशन ने खुद को अनुमान लगाने से बाहर कर दिया तो हम लोगों के लिए बाहर बैठकर अनुमान लगाना कितना मुश्किल है ये समझा जा सकता है। 

राकेश शुक्ल: केरल में संघ का अच्छा प्रभाव है। केरल में लेफ्ट को हो रहे नुकसान का एक कारण भाजपा भी है। इससे भी कांग्रेस को लाभ होता दिख रहा है। वहीं, असम में कांग्रेस का मजबूती से चुनाव नहीं लड़ना भी एग्जिट पोल में भाजपा की जीत के आसार दिखाए जाने का कारण है। हिमंता का प्रबंधन और कांग्रेस का कुप्रबंधन भी वहां भाजपा की जीत का कारण बन सकते हैं। 

विनोद अग्निहोत्री: आमतौर पर कोई एग्जिट पोल एजेंसियां किसी मीडिया हाउस से मिलकर करती थीं। इस बार किसी भी एजेंसी ने किसी मीडिया हाउस से मिलकर एग्जिट पोल नहीं किया। ऐसे में सवाल उठता है कि एजेंसियों को फंडिंग कहां से हुई। अब बात राज्यवार करें तो असम में कांग्रेस अगर हारेगी तो हिमंता का प्रबंधन और  उनकी आक्रामकता और कांग्रेस के पास इस तरह का नेता नहीं होना होगा। केरल में हिंदू वोट जो लेफ्ट के पास जाता था वो भाजपा के साथ जाता दिख रहा है। इससे यूडीएफ को फायदा होता दिख रहा है। पुदुचेरी में रंगास्वामी की लोकप्रियता का कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं है। तमिलनाडु में आम राय यही है कि डीएमके फिर से आ सकती है।
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