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Khabaron Ke Khiladi: इटावा में कथावचक के साथ दुर्व्यवहार पर सियासी तनाव, सामाजिक ताने-बाने पर कितना प्रभाव?
Sat, 28 Jun 2025 09:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 28 Jun 2025 09:15 PM IST
सार
यूपी के इटावा स्थित दांदरपुर गांव में मारपीट और अभद्रता के शिकार हुए कथावाचक मुकट मणि के मामले में सियासत गरमा गई है। जहां समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा है, वहीं यूपी सरकार ने अखिलेश यादव पर जाति आधारित राजनीति करने का आरोप लगाया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में कथावाचक की पिटाई को लेकर सियासत जारी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं। सियासत का यह सिलसिला बिहार तक भी पहुंच गया है। इस तरह की घटनाएं समाज पर किस तरह का असर डालती हैं? इस पर हो रही सियासत के चलते चुनावी समीकरण किस तरह बन बिगड़ सकते हैं? इसी तरह के सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार, राजकिशोर और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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अवधेश कुमार: जो कुछ भी हुआ है। जो लोग भी सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकता के लिए काम करते हैं उनके लिए यह घटना डराने वाली है। किसी भी व्यक्ति की शिखा काटना कहीं से भी सही नहीं है। दोनों पक्षों के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने इसमें पहले घी डाला। जाति भेद, जाति ऊंच-नीच गलत है, लेकिन जाति हमारे देश की ताकत रही है। अंग्रेजों के समय तक यादव, गुर्जर, जाट जैसी जातियों के राजा हुआ करते थे। ऐसे में अगड़ी पिछड़ी जाति की अवधारणा को मैं सहीं नहीं मानता हूं। जो कुछ भी वहां हुआ है उसे ठीक करने के लिए सामाजिक एकता के लिए काम करने वाले लोगों को जाना चाहिए और इसे ठीक करना चाहिए।
राजकिशोर: अखिलेश यादव पीडीए पर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि वो उस तरह का गठजोड़ बना लें जो मुलायम सिंह यादव और कांशीराम जब मिले थे उस तरह का गठजोड़ हो। आप किसी भी परिस्थिति में आप जब किसी की शिखा काटते हैं, बाल काटके उन्हें अपमानित करने का काम नहीं कर सकते हैं। आप अपनी जाति श्रेष्ठता के बोध में आकर ऐसा नहीं कर सकते हैं। जाति छुपाने की बात भी गलत है।
राजकिशोर: अखिलेश यादव पीडीए पर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि वो उस तरह का गठजोड़ बना लें जो मुलायम सिंह यादव और कांशीराम जब मिले थे उस तरह का गठजोड़ हो। आप किसी भी परिस्थिति में आप जब किसी की शिखा काटते हैं, बाल काटके उन्हें अपमानित करने का काम नहीं कर सकते हैं। आप अपनी जाति श्रेष्ठता के बोध में आकर ऐसा नहीं कर सकते हैं। जाति छुपाने की बात भी गलत है।
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रामकृपाल सिंह: जिन लोगों ने भी यह किया है उनका यह अपराध अक्ष्मय है। लेकिन मैं एक बात कहता हूं कि समाज में जिस अनुपात में बदलाव होता है उसी अनुपात में उसका विरोध भी होता है। ये बहुत पहले से ही होता आया है। इस तरह की चीजें आती रहती हैं। भागवत कथा किसी का अधिकार नहीं है। जब भी इस तरह की एक छोटी सी भी चिंगारी दिखती है तो सियासी दल उसे भड़काते ही रहे हैं।
पूर्णिमा त्रिपाठी: अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया होनी ही थी। यादव के साथ ये हुआ तो ये उनके लिए एक सुनहरा मौका था। राजनीतिक दल इस तरह के मौके को भुनाते ही है। अगर एक क्रिमिनल एक्टिविटी थी तो उसे उसी तरह से ट्रीट किया जाना चाहिए था। जिन लोगों ने ये सब किया और उसका वीडियो बनकर उसे फैलाया ये समाज के अंदर की जो दुर्भावना है वो सतह पर आ गई। हम कितना भी खुद को प्रोग्रेसिव कह लें, समाज अब भी जातियों में बंटा है। हमारे देश में बहुत से कथावाचक हैं जो ब्राह्मण जाति से नहीं है। ये कोई नई बात नहीं है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया होनी ही थी। यादव के साथ ये हुआ तो ये उनके लिए एक सुनहरा मौका था। राजनीतिक दल इस तरह के मौके को भुनाते ही है। अगर एक क्रिमिनल एक्टिविटी थी तो उसे उसी तरह से ट्रीट किया जाना चाहिए था। जिन लोगों ने ये सब किया और उसका वीडियो बनकर उसे फैलाया ये समाज के अंदर की जो दुर्भावना है वो सतह पर आ गई। हम कितना भी खुद को प्रोग्रेसिव कह लें, समाज अब भी जातियों में बंटा है। हमारे देश में बहुत से कथावाचक हैं जो ब्राह्मण जाति से नहीं है। ये कोई नई बात नहीं है।
अनुराग वर्मा: चाहे भाजपा हो, समाजवादी पार्टी हो या कांग्रेस हो, इस तरह के मामले में हर राजनीतिक दल फायदा उठाने की कोशिश करता है। कथा वाचक ब्राह्मण ही होना चाहिए ऐसा नियम कहीं भी लिखा हुआ नहीं है। अगर आप राजनीति की बात करें तो ब्राह्मण वोट अभी भाजपा के साथ है। इस मतदाता को कांग्रेस और दूसरे दल अपने साथ करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे अभी नहीं लगता है कि वो किसी और दल के साथ जा रहा है।
विनोद अग्निहोत्री: मेरा भी मनना है कि कथा वाचन का अधिकार सभी को है। इतिहास में ऐसे तमाम उदाहरण हैं। जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है, वहां गैर ब्राह्मण कथा वाचक गैर ब्राह्मण गांवों में ही कथा वाचन करते रहे हैं। जो घटना हुई है वो संवैधानिक रूप से पूरी तरह से गलत है। जहां तक बात अखिलेश यादव की बात है तो उनकी चिंता यादव वोटर नहीं, बल्कि दलित वोटर हैं। क्योंकि उन कथा वाचकों में एक दलित समुदाय से भी थे।
विनोद अग्निहोत्री: मेरा भी मनना है कि कथा वाचन का अधिकार सभी को है। इतिहास में ऐसे तमाम उदाहरण हैं। जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है, वहां गैर ब्राह्मण कथा वाचक गैर ब्राह्मण गांवों में ही कथा वाचन करते रहे हैं। जो घटना हुई है वो संवैधानिक रूप से पूरी तरह से गलत है। जहां तक बात अखिलेश यादव की बात है तो उनकी चिंता यादव वोटर नहीं, बल्कि दलित वोटर हैं। क्योंकि उन कथा वाचकों में एक दलित समुदाय से भी थे।