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UPSC: केरल की सारिका और पार्वती बनीं मिसाल, दिव्यांगता को मात दे पास की देश की सबसे कठिन परीक्षा
Wed, 17 Apr 2024 04:31 AM IST
यशोधन शर्मा
एजेंसी, कोझिकोड
एजेंसी, कोझिकोड
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Wed, 17 Apr 2024 04:31 AM IST
सार
संघ लोक सेवा की ओर से मंगलवार को घोषित परिणामों के अनुसार सारिका अपने दाहिने हाथ का उपयोग करने में असमर्थ हैं। वह मोटर चालित व्हील-चेयर को नियंत्रित करने के लिए अपने बाएं हाथ का उपयोग करती हैं।
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यूपीएससी
- फोटो : ANI
विस्तार
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के परिणाम मंगलवार को जारी हो गए। जिसके बाद केरल से दो महिलाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दोनों दिव्यांग हैं लेकिन दोनों ने कठिनाइयों को मात देकर सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएसी परीक्षा उतीर्ण की है। साथ ही देश के हर नौजवान के लिए मिसाल भी बन गई हैं।
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सबसे पहले बात करेंगे उत्तरी केरल के जिले कोझीकोड की रहने वाली सारिका की, जो जन्म से ही सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत से उन्होंने 2024 में देश की सबसे कठिन भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्होंने ऑल इंडिया जनरल मेरिट लिस्ट में 922वीं रैंक हासिल की है।
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संघ लोक सेवा की ओर से मंगलवार को घोषित परिणामों के अनुसार सारिका अपने दाहिने हाथ का उपयोग करने में असमर्थ हैं। वह मोटर चालित व्हील-चेयर को नियंत्रित करने के लिए अपने बाएं हाथ का उपयोग करती हैं। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद थी कि मैं इसे पास कर लूंगी। मुझे खुशी है कि मैं ऐसा कर पाई। मेरे पास अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। सारिका ने कहा कि उन्होंने स्नातक होने के बाद ही सिविल सेवाओं को चुनने का फैसला किया और अपने परिवार, दोस्तों और शिक्षकों के समर्थन की बदौलत इसे पास करने की उपलब्धि हासिल करने में सफल रहीं।
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मेरे माता-पिता मेरा सबसे बड़ा सहारा
जब उनसे यह पूछा गया कि कि दिव्यांगता से पीड़ित अन्य लोगों के लिए वह क्या संदेश देना चाहती हैं तो सारिका ने पाउलो कोएल्हो की पुस्तक 'अलकेमिस्ट' की एक प्रसिद्ध पंक्ति उद्धृत की...जब आप वास्तव में कुछ चाहते हैं, तो पूरा ब्रह्मांड आपको इसे हासिल करने में मदद करने की साजिश करता है। उन्होंने अमेरिका की एक महिला जेसिका कॉक्स का भी जिक्र किया, जो बिना हाथ के लाइसेंस प्राप्त पायलट बन गईं, क्योंकि कॉक्स ने यही बनने का सपना देखा था। उन्होंने कहा, मेरे माता-पिता मेरा सबसे बड़ा सहारा थे।
हर चरण में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा
सारिका ने बताया कि सिविल सेवा के विभिन्न चरणों को उन्होंने पास किया और हर बार उन्हें नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, प्रारंभिक परीक्षा केंद्र कोझिकोड में था। मुख्य परीक्षा तिरुवनंतपुरम में आयोजित की गई थी। चूंकि यह एक सप्ताह लंबी प्रक्रिया थी। इसलिए वह और उनके माता-पिता को वहां किराए पर रहना पड़ा और ऑटो से परीक्षा केंद्र तक जाना पड़ा। उन्होंने कहा, उनके पिता कतर में काम करते हैं। लेकिन उनकी परीक्षा के लिए वह वापस आए।
लिखित परीक्षा में उन्होंने एक लेखक की मदद ली। मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दिल्ली में साक्षात्कार देने के लिए वह कुछ दिन केरल हाउस में रहीं। उन्होंने कहा, साक्षात्कार में पांच सदस्यीय पैनल बहुत सौहार्दपूर्ण था। साक्षात्कार पूरी तरह से उनके विस्तृत आवेदन पत्र (डीएएफ) पर आधारित था। बोर्ड ने मेरे बारे में, मेरे स्नातक विषय और कोझिकोड के बारे में पूछा। करंट अफेयर्स के बारे में बहुत कम सवाल थे।
विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पार्वती ने 282वीं रैंक हासिल की
केरल के अंबालापुझा की रहने वाली पार्वती गोपकुमार ने भी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में अपना परचम लहराया है। उन्होंने 282वीं रैंक हासिल की, जिसके परिणाम मंगलवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा घोषित किए गए। उन्हें अपने जीवन की सभी प्रमुख परीक्षाएं बाएं हाथ से लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि कम उम्र में ही भाग्य ने उनका दाहिना हाथ छीन लिया था।
12 साल की उम्र में एक घातक दुर्घटना के बाद उनका दाहिना हाथ कोहनी के नीचे से कट गया था, इसके बावजूद, गोपाकुमार जीवन में सभी चुनौतियों और कठिनाइयों से लड़ते हुए एक आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा रखती हैं। कानून में स्नातक होने के बाद, वह अपने सपने को साकार करने के लिए अथक तैयारी में जुट गईं। दुर्घटना के बाद दाहिने हाथ की जगह कृत्रिम अंग सिलने के बाद गोपकुमार ने बाएं हाथ से लिखने का अभ्यास करना शुरू कर दिया।
सिविल सेवा परीक्षा के दौरान, उन्हें प्रति घंटे 20 मिनट का अतिरिक्त समय अनिवार्य रूप से मिला था। पार्वती ने याद करते हुए बताया, 'यह शारीरिक रूप से अधिक थका देने वाला था, जब मैने इन सभी परीक्षाओं को एक के बाद एक लिखा...दूसरों की तुलना में, मुझे अधिक घंटे लिखने पड़े।'
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह आईएएस पद पाने को लेकर आश्वस्त हैं, तो सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली इस छात्रा ने कहा कि वह अपने सपनों का करियर हासिल करने तक फिर से तैयारी करेंगी और लिखेंगी।