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क्यों बदला गया केरल का नाम: केरलम किए जाने की क्या वजह, इसका मतलब क्या और कब से हो रही थी नाम बदलने की मांग?
Tue, 24 Feb 2026 06:53 PM IST
Kirtivardhan Mishra
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Tue, 24 Feb 2026 06:53 PM IST
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सार
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केरल से केरलम की यात्रा में अहम पड़ाव।
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अमर उजाला
विस्तार
केरल का नाम बदलकर केरलम करने को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। मंगलवार (24 फरवरी) को कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े एक प्रस्ताव पर मुहर लगाई। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए सवाल खड़े किए। हालांकि, भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने इस फैसले को बड़े बदलाव वाला बताया।इस बीच 'केरलम' नाम को लेकर भी लोगों के मन में सवाल हैं। मसलन- केरल के अलग राज्य बनने की कहानी क्या है? केरल का नाम बदलकर केरलम करने की वजह क्या है? इसकी मांग कब से उठ रही थी? बीते वर्षों में इसे लेकर क्या-क्या हुआ? इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के बाद अब कैसे संविधान में केरल का नाम केरलम किया जा सकता है। आइये जानते हैं...
पहले जानें- केरल के अलग राज्य बनने का इतिहास क्या है?
आधुनिक केरल का इतिहास भाषाई आंदोलन से जुड़ा है। दरअसल, अंग्रेजों के शासनकाल में भारत को भाषाई आधार पर नहीं बांटा गया था। हालांकि, मद्रास प्रेजिडेंसी में भाषाई तौर पर अलग-अलग राज्य बनाने की मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी। 1920 के दशक में एक संयुक्त मलयालम भाषी राज्य बनाने की मांग तेज हुई। इसका मकसद त्रावणकोर और कोचीन की रियासतों और मद्रास प्रेजिडेंसी के मालाबार जिले को एक साथ लाना था। उस दौरान शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे आग पकड़ता रहा।आखिरकार 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद 1 जुलाई 1949 को दो प्रमुख मलयालम भाषी रियासतों- त्रावणकोर और कोचीन को मिलाकर त्रावणकोर-कोचीन राज्य की स्थापना की गई। बाद में राज्य पुनर्गठन आयोग ने भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण का प्रस्ताव बढ़ाया।
- सैयद फजल अली की अध्यक्षता वाले आयोग ने अलग केरल राज्य के गठन की सिफारिश की। मालाबार जिले और कासरगोड तालुका को नए मलयालम भाषी राज्य में शामिल किया गया।
- त्रावणकोर के चार दक्षिणी तालुकाओं (तोवला, अगस्त्येश्वरम, कालकुलम और विलायनकोड) और शेनकोट्टई के कुछ हिस्सों को बाहर कर दिया गया। यह अब तमिलनाडु का हिस्सा हैं।
केरल का नाम बदलकर केरलम करने की वजह क्या है?
1. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ें'केरल' शब्द वास्तव में मलयालम के शब्द 'केरलम' का ही अंग्रेजी रूप है। इस शब्द का सबसे पुराना ऐतिहासिक उल्लेख सम्राट अशोक के 257 ईसा पूर्व के शिलालेखों में मिलता है, जहां इसे संस्कृति में 'केतलपुत्र' कहा गया है, जिसका मतलब है केरल का पुत्र। यह चेर वंश के साम्राज्य की प्राचीनता दर्शाता है।
2. भाषाई पहचान और उच्चारण का फर्क
केरल का नाम बदलने का सबसे अहम कारण इसकी भाषाई पहचान है। दरअसल, 'केरल' नाम अंग्रेजी उच्चारण के तहत है, जबकि मलयालम भाषा में इसे 'केरलम' बुलाया जाता है। यानी भाषाई आधार पर केरल को अलग पहचान तो मिली, लेकिन अंग्रेजी में इसे केरल बुलाए जाने की वजह से इसका नाम संविधान में केरल ही दर्ज किया गया।
3. संविधान में दिए गए नाम में बदलाव
जून 2024 में केरल विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य की जनता अपनी भाषा में इसे केरलम ही कहती है। इसलिए राज्य सरकार चाहती है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत जरूरी संशोधन करके सभी आधिकारिक दस्तावेजों, कानूनी रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय संधियों में केरल को केरलम कर दिया जाए।
राज्य विधानसभा का प्रस्ताव: सबसे पहले केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलने का आग्रह किया था। यह प्रस्ताव पहले 2023 में पेश किया गया। हालांकि, बाद में एक और विधेयक पारित किया गया है, ताकि तकनीकी कमियों को दूर किया जा सके और संविधान की पहली और आठवीं अनुसूची दोनों में संशोधन की मांग की जा सके।
जून 2024 में केरल विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य की जनता अपनी भाषा में इसे केरलम ही कहती है। इसलिए राज्य सरकार चाहती है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत जरूरी संशोधन करके सभी आधिकारिक दस्तावेजों, कानूनी रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय संधियों में केरल को केरलम कर दिया जाए।
अब संविधान में कैसे बदलेगा केरल का नाम, क्या है प्रक्रिया?
संविधान के तहत केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने की प्रक्रिया अनुच्छेद 3 के तहत आती है। हालांकि, इसकी प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।राज्य विधानसभा का प्रस्ताव: सबसे पहले केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलने का आग्रह किया था। यह प्रस्ताव पहले 2023 में पेश किया गया। हालांकि, बाद में एक और विधेयक पारित किया गया है, ताकि तकनीकी कमियों को दूर किया जा सके और संविधान की पहली और आठवीं अनुसूची दोनों में संशोधन की मांग की जा सके।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी: हालिया घटनाक्रम में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम केरलम करने के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है।
केंद्र तैयार करेगा विधेयक का मसौदा: अब केंद्र सरकार एक विशिष्ट विधेयक तैयार करेगी, जिसे केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक कहा जा सकता है।
राष्ट्रपति की सिफारिश और राज्य की राय: संविधान के अनुच्छेद 3 के मुताबिक, ऐसा कोई भी विधेयक सिर्फ राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही संसद में पेश किया जा सकता है। सिफारिश करने से पहले, राष्ट्रपति इस विधेयक को केरल विधानसभा के पास उनके विचार जानने के लिए भेजेंगे। हालांकि, राज्य विधानसभा के विचार या सलाह मानने के लिए संसद बाध्य नहीं होती।
केंद्र तैयार करेगा विधेयक का मसौदा: अब केंद्र सरकार एक विशिष्ट विधेयक तैयार करेगी, जिसे केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक कहा जा सकता है।
राष्ट्रपति की सिफारिश और राज्य की राय: संविधान के अनुच्छेद 3 के मुताबिक, ऐसा कोई भी विधेयक सिर्फ राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही संसद में पेश किया जा सकता है। सिफारिश करने से पहले, राष्ट्रपति इस विधेयक को केरल विधानसभा के पास उनके विचार जानने के लिए भेजेंगे। हालांकि, राज्य विधानसभा के विचार या सलाह मानने के लिए संसद बाध्य नहीं होती।
संसद में वोटिंग की प्रक्रिया: राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद यह विधेयक लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि राज्य का नाम बदलने के लिए किसी विशेष बहुमत की आवश्यकता नहीं होती। इसे साधारण बहुमत यानी सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले 50% से अधिक सांसदों की सहमति से पारित किया जा सकता है। अनुच्छेद 4 के मुताबिक, इसे अनुच्छेद 368 के तहत औपचारिक संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।
राष्ट्रपति की सहमति और अधिसूचना: दोनों सदनों से विधेयक के पारित होने के बाद, विधेयक को राष्ट्रपति के पास अंतिम सहमति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही इसे भारत के गजट में अधिसूचित किया जाएगा।
राष्ट्रपति की सहमति और अधिसूचना: दोनों सदनों से विधेयक के पारित होने के बाद, विधेयक को राष्ट्रपति के पास अंतिम सहमति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही इसे भारत के गजट में अधिसूचित किया जाएगा।
अनुसूचियों में बदलाव: इस प्रक्रिया के पूरा होते ही संविधान की पहली अनुसूची (राज्यों के नाम) और चौथी अनुसूची (राज्यसभा सीटों का आवंटन) खुद अपडेट हो जाएंगी। इसके बाद सभी आधिकारिक कानूनी दस्तावेजों, अंतरराष्ट्रीय संधियों और रिकॉर्ड्स में केरल की जगह केरलम अधिकारिक नाम बन जाएगा।
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