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Kerala: KPCC प्रमुख बोले- अपने लोगों को भेजा था RSS की शाखाओं की रक्षा के लिए, माकपा ने किया ये पलटवार
Wed, 09 Nov 2022 06:15 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नूर
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 09 Nov 2022 06:15 PM IST
सार
सत्तारूढ़ माकपा ने सुधाकरन के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुधाकरन का बयान आश्चर्यजनक नहीं है। कांग्रेस और आरएसएस 1969 से राजनीतिक रूप से अस्थिर कन्नूर जिले में साथ मिलकर ही काम कर रहे हैं।
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के सुधाकरन।
- फोटो : Social Media
विस्तार
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख के सुधाकरन ने वाम दलों और आरएसएस को लेकर दिए गए एक बयान के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने बुधवार को केरल के कन्नूर जिले में कहा कि दशकों पहले जब वह कांग्रेस (संगठन) का हिस्सा थे तब उन्होंने अपने लोगों को आरएसएस की शाखाओं को 'सुरक्षा देने' के लिए भेजा था। उनके इस बयान के बाद केरल की राजनीति में उबाल आ गया है। राज्य में सत्तारूढ़ सीपीआईएम ने उन्हें निशाने पर लिया है। माकपा ने कहा कि उनका बयान हैरान करने वाला नहीं है। इस बयान से साफ है कि कांग्रेस और भाजपा एक साथ काम कर रही हैं।
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आरएसएस की शाखाओं की सुरक्षा के लिए भेजे थे अपने लोग
जानकारी के मुताबिक, कन्नूर जिले में एक समारोह में बोलते हुए के सुधाकरन ने कहा कि जब वे कांग्रेस(संगठन) का हिस्सा हुआ करते थे तब सीपीआई (एम) ने यहां एडक्कड़, थोट्टाडा और किझुन्ना जैसी जगहों पर संघ की शाखाओं को नष्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि । वामपंथी कार्यकर्ताओं से आरएसएस की शाखाओं की सुरक्षा के लिए अपने लोगों को भेजा था।
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हालांकि बाद में उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने ऐसा दक्षिणपंथी संगठनों और उसकी शाखाओं के प्रति किसी संबद्धता के कारण नहीं किया था। ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना था। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का जन्म अधिकार है और इसे संरक्षित किया जाना चाहिए।
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पेश की सफाई
बाद में जब उनके बयान पर विवाद शुरू हो गया तो के सुधाकरन ने अपने बयान को लेकर सफाई भी पेश की। उन्होंने कहा कि सभी दलों को देश में कार्य करने का अधिकार है। केपीसीसी प्रमुख के सुधाकरन ने कहा कि "क्या आरएसएस को काम करने का अधिकार नहीं है? क्या यह एक प्रतिबंधित संगठन है? मेरे बयान में क्या गलत है? मैं उस समय कांग्रेस पार्टी से दूर था और कांग्रेस (संगठन) का हिस्सा था।"
माकपा ने किया पलटवार
वहीं, सत्तारूढ़ माकपा ने सुधाकरन के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुधाकरन का बयान आश्चर्यजनक नहीं है। कांग्रेस और आरएसएस 1969 से राजनीतिक रूप से अस्थिर कन्नूर जिले में साथ मिलकर ही काम कर रहे हैं। पार्टी के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने सुधाकरन के इस रुख पर कहा कि संभावना है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार के जरिए जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे।
बता दें कि 1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद कांग्रेस (संगठन) अस्तित्व में आई थी। हालांकि बाद में कांग्रेस (संगठन) का जनता पार्टी में विलय हो गया।