केरल: नफरती भाषण मामले में पीसी जॉर्ज की जमानत रद्द, जानें पूरा मामला
याचिका में दलील दी गई थी कि वरिष्ठ राजनेता ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए उनकी जमानत रद्द की जानी चाहिए।
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केरल की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने बुधवार को नफरती भाषण मामले में वरिष्ठ राजनेता पीसी जॉर्ज की जमानत रद्द कर दी है। जॉर्ज ने 29 अप्रैल को कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरती भाषण दिया था। एक मई को जॉर्ज को दी गई जमानत को रद्द करने के लिए दी गई पुलिस की याचिका को अदालत ने मंजूर कर लिया। याचिका में दलील दी गई थी कि वरिष्ठ राजनेता ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए उनकी जमानत रद्द की जानी चाहिए। जॉर्ज के वकील अजीत कुमार ने कहा कि वरिष्ठ राजनेता को नफरती भाषण के एक अन्य मामले में एर्नाकुलम जिले की पलारिवट्टम पुलिस के समक्ष हाजिर होने के लिए कहा गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तिरुवनंतपुरम से आया पुलिस अधिकारियों के एक दल ने एर्नाकुलम ए आर कैंप से उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया एवं हिरासत में ले लिया। उन्हें पोलरिवत्तोम थाने से एर्नाकुलम ले जा गया था। उससे पहले उन्हें नफरत भरे भाषण के सिलसिले में पूछताछ के लिए इस थाने में तलब किया गया था।
क्या कहा था जॉर्ज ने?
दरअसल, पीसी जॉर्ज ने एक सम्मेलन में भाषण के दौरान आरोप लगाया था कि मुस्लिम रेस्तरां में हिंदुओं को नपुंसक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने गैर मुस्लिमों से मुस्लिम रेस्तरां में न जाने की अपील करते हुए कहा था, वहां पुरुषों को नपुंसक और महिलाओं को बांझ बनाने वाली चाय परोसी जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि वे देश पर कब्जा कर सकें।
बयान के बाद जमकर हंगामा
पीसी जॉर्ज के बयान के बाद प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। उनके बयान की जमकर निंदा हो रही है। कांग्रेस ने राज्य सरकार से जॉर्ज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने आरोप लगाया कि जॉर्ज ने यह बयान साम्प्रदायिक भावना भड़काने और समाज में विभाजन पैदा करने के मकसद से दिया है।