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केरल शराब नीति विवाद: पर्यटन निदेशक के दावे को कांग्रेस ने किया खारिज, कहा- खुद को बचाने के लिए बोल रहे झूठ

Mon, 27 May 2024 04:12 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Mon, 27 May 2024 04:12 PM IST
सार

कांग्रेस ने केरल पर्यटन निदेशक के दावे को खारिज कर दिया कि विभाग द्वारा हाल ही में आयोजित हितधारकों की बैठक का सरकार की शराब नीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को अपनी सुरक्षा के लिए झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया था।

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Kerala liquor policy controversy: Congress rejected Tourism Director's claim, said- he is lying to save himsel
कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस ने केरल पर्यटन निदेशक के दावे को खारिज कर दिया कि विभाग द्वारा हाल ही में आयोजित हितधारकों की बैठक का सरकार की शराब नीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को अपनी सुरक्षा के लिए झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया था। सबसे पुरानी पार्टी ने अपना आरोप दोहराया कि शराब नीति में संशोधन का निर्णय 21 मई को पर्यटन विभाग की बैठक के दौरान लिया गया था।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि 21 मई को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म ज़ूम पर बैठक आयोजित हुई। बैठक में बार मालिकों ने भी हिस्सा लिया था। 'ड्राई डे' और बार के खुलने के समय के विस्तार पर चर्चा हुई। विपक्ष की आलोचना उन रिपोर्टों के बाद आई है जब राज्य सरकार 'ड्राई डे' मानदंड (जो हर कैलेंडर महीने के पहले दिन राज्य में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाती है) को खत्म करने पर विचार कर रही है, जिससे राज्य में राजनीतिक तूफान आ गया है।
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पर्यटन मंत्री पीए मोहम्मद रियास ने सोमवार को कांग्रेस के आरोपों को खारिज करना जारी रखा और स्पष्ट किया कि 21 मई की बैठक एक नियमित बैठक थी। उन्होंने कोझिकोड में कहा कि निदेशालय के लिए हितधारकों की ऐसी बैठक बुलाना सामान्य बात है। यह पर्यटन निदेशक के अधिकार क्षेत्र में आता है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि उन्हें संदेह था कि विवाद में उनका नाम घसीटना एक एजेंडा था। विपक्ष ने राज्य सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए कहा कि उसने अपनी शराब नीति को बदलने के लिए हाल ही में पर्यटन हितधारकों की एक बैठक आयोजित की। केरल पर्यटन निदेशालय ने रविवार को आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि 21 मई की बैठक सिर्फ एक नियमित बैठक थी।
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पर्यटन निदेशक शिखा सुरेंद्रन ने मीडिया रिपोर्ट को "भ्रामक" बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में रिसॉर्ट्स, होटल, हाउसबोट और इवेंट मैनेजमेंट समूहों के उद्योग समूहों ने भाग लिया। जो सभी पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सुरेंद्रन ने एक बयान में कहा, बैठक पर्यटन मंत्री के निर्देश पर नहीं बुलाई गई थी।

वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने दावा किया कि बार मालिकों ने एर्नाकुलम में बैठक की। बैठक के बाद "अनुकूल शराब नीति" पाने के लिए धन इकट्ठा करने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ''बार मालिकों में से एक की ऑडियो क्लिप में स्पष्ट है कि अगर पैसा नहीं मिला तो कुछ नहीं होगा।'' सतीसन ने आरोप लगाया कि पर्यटन निदेशक ने विपक्ष ने जब यह स्पष्ट किया कि पर्यटन और उत्पाद शुल्क मंत्री दोनों इस मामले पर झूठ बोल रहे थे। तब उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्यटन निदेशक द्वारा बुलाई गई जूम मीटिंग के लिंक का विषय 'शराब नीति समीक्षा' दिया गया था। यूडीएफ ने आरोप लगाया कि वाम सरकार ने बार मालिकों से उनके अनुकूल नीति बनाने के लिए 20 करोड़ रुपये मांगे और उत्पाद शुल्क मंत्री एमबी राजेश के इस्तीफे की मांग की। आरोपों और विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए राजेश ने कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक अपनी शराब नीति को लेकर कोई विचार-विमर्श नहीं किया है।


विपक्ष के नेता ने सवाल किया कि क्या पर्यटन निदेशक के नाम से जारी किया गया बयान पर्यटन मंत्री के कार्यालय में तैयार किया गया था? उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को भ्रष्टाचार में शामिल मंत्रियों को बचाने के लिए मजबूर किया गया। 
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