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Kerala: स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए केरल सरकार ने जारी किया अध्यादेश, राज्यपाल से मंजूरी का इंतजार
Wed, 17 May 2023 02:47 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 17 May 2023 02:47 PM IST
सार
अध्यादेश के अनुसार किसी भी स्वास्थ्यकर्ता को शारीरिक नुकसान पहुंचाने का दोषी पाए जाने पर आरोपी को एक से सात साल की सजा दी जाएगी। इसके साथ ही उसपर एक से पांच लाख का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
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Pinarayi Vijayan
- फोटो : Social Media
विस्तार
केरल सरकार ने बुधवार को चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और मेडिकल छात्रों की सुरक्षा से जुड़े एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। राज्य में पिछले हफ्ते ही एक युवा चिकित्सक की हत्या के बाद यह कदम उठाया गया है।
सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा- "केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में आज की गई मंत्रिमंडल की बैठक में केरल स्वास्थ्य देखभाल सेवा कार्यकर्ता तथा स्वास्थ्य देखभाल सेवा संस्थान संशोधन अध्यादेश 2012 को मंजूरी दी गई।"
मौजूदा असंशोधित कानून में पंजीकृत तथा प्रोविजनल रूप से पंजीकृत चिकित्सक, पंजीकृत नर्स, मेडिकल छात्र, नर्सिंग छात्र और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य करने वाले पैरामेडिकल कर्मी शामिल हैं। अध्यादेश के तहत पैरामेडिकल छात्रों को भी कानून के तहत सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
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अध्यादेश के अनुसार किसी भी स्वास्थ्यकर्ता को शारीरिक नुकसान पहुंचाने का दोषी पाए जाने पर आरोपी को एक से सात साल की सजा दी जाएगी। इसके साथ ही उसपर एक से पांच लाख का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
यदि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य कर्मियों या स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वालों के खिलाफ हिंसा या हिंसा की कोशिश करता है तो उसे इसके लिए छह महीने से पांच साल तक की सजा के साथ पचास हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब इस अध्यादेश को केरल के राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
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सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा- "केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में आज की गई मंत्रिमंडल की बैठक में केरल स्वास्थ्य देखभाल सेवा कार्यकर्ता तथा स्वास्थ्य देखभाल सेवा संस्थान संशोधन अध्यादेश 2012 को मंजूरी दी गई।"
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मौजूदा असंशोधित कानून में पंजीकृत तथा प्रोविजनल रूप से पंजीकृत चिकित्सक, पंजीकृत नर्स, मेडिकल छात्र, नर्सिंग छात्र और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य करने वाले पैरामेडिकल कर्मी शामिल हैं। अध्यादेश के तहत पैरामेडिकल छात्रों को भी कानून के तहत सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
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अध्यादेश के अनुसार किसी भी स्वास्थ्यकर्ता को शारीरिक नुकसान पहुंचाने का दोषी पाए जाने पर आरोपी को एक से सात साल की सजा दी जाएगी। इसके साथ ही उसपर एक से पांच लाख का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
यदि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य कर्मियों या स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वालों के खिलाफ हिंसा या हिंसा की कोशिश करता है तो उसे इसके लिए छह महीने से पांच साल तक की सजा के साथ पचास हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब इस अध्यादेश को केरल के राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।