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Kerala High Court: यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट सख्त, आरोपी पार्षद की रेगुलर बेल अर्जी को किया खारिज
Mon, 29 Jun 2026 11:19 AM IST
प्रशांत तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 29 Jun 2026 11:19 AM IST
सार
यौन उत्पीड़न के मामले में जेल में बंद पार्षद प्रसोध एम की रेगुलर जमानत याचिका को केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन की पीठ ने SC/ST विशेष अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
केरल हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में पलक्कड़ नगर पालिका के पूर्व कांग्रेस पार्षद प्रसोध एम को बड़ा झटका देते हुए उनकी रेगुलर जमानत की अपील खारिज कर दी है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने मान्नारकाड स्थित SC/ST मामलों की विशेष अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इससे पहले भी हाई कोर्ट प्रसोध एम की अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) याचिका खारिज कर चुका था। विशेष अदालत द्वारा रेगुलर जमानत की अर्जी नामंजूर किए जाने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के साथ फिलहाल प्रसोध एम को न्यायिक राहत नहीं मिल सकी है।
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नौकरी का झांसा देकर किया था शोषण
पुलिस में दर्ज FIR के मुताबिक, प्रसोध पर आरोप है कि पार्षद के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नौकरी दिलाने का वादा करके एक दलित महिला का यौन शोषण किया। महिला ने जब उनसे नौकरी के लिए कहा तो उन्होंने उसे धमकाया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया। महिला की शिकायत के आधार पर, पलक्कड़ टाउन साउथ पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
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BNS की गंभीर धाराओं में दर्ज है मुकदमा
आरोपी पूर्व पार्षद के खिलाफ BNS की गंभीर धाराओं 332(b), 69, 115(2) और 351(2) के साथ-साथ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं 3(1)(w)(i) और 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज है। कानूनी जानकारों के मुताबिक इन धाराओं के आरोपियों को जमानत मिलने में काफी मुश्किल होता है। क्योंकि ऐसे लोग जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित को परेशान करने के साथ ही गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ऐसे आरोपियों को जमानत देने से पहले अदालत यह सुनिश्चित करती है कि आरोपियों के बाहर आने के बाद केस से जुड़ा हुआ कोई भी मामला प्रभावित न हो।