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Kerala High Court: मंत्रियों के निजी स्टाफ की संख्या सीमित हो, ताउम्र पेंशन’ पर राज्यपाल भी जता चुके आपत्ति

Sun, 04 Dec 2022 06:32 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sun, 04 Dec 2022 06:32 AM IST
सार

पिछले महीने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट कैबिनेट के मंत्रियों के निजी स्टाफ को ताउम्र के लिए पेंशन दी जा रही है। यह जनता के धन की बर्बादी और कानून का मखौल उड़ाना है।

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Kerala High Court says that ministers should limit the number of their personal staff
केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

केरल हाईकोर्ट का कहना है कि मंत्रियों को अपने निजी स्टाफ की संख्या सीमित रखनी चाहिए। हालांकि इसे लेकर दायर एक याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी, लेकिन कहा कि बिना किसी तय संख्या के निजी स्टाफ के रूप में लोगों को नियुक्त करना अनुचित है। फिर चाहे यह नियुक्ति मुख्यमंत्री के लिए हो या मुख्य सचेतक अथवा नेता प्रतिपक्ष के लिए।
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याचिका एंटी-करप्शन पीपल्स मूवमेंट नामक संगठन ने दायर की थी। मांग थी कि निजी स्टाफ की नियुक्ति के लिए एक मानक तय होना चाहिए। इस स्टाफ को दी जा रही पेंशन भी असांविधानिक करार देकर रद्द कर देनी चाहिए। हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने याचिका खारिज कर दी, वजह दी कि निजी स्टाफ की नियुक्ति राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है। हालांकि यह भी कहा कि ऐसी नियुक्तियों में नियंत्रण होना चाहिए। एजेंसी
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‘2 साल काम, ताउम्र पेंशन’ पर राज्यपाल भी जता चुके आपत्ति
पिछले महीने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट कैबिनेट के मंत्रियों के निजी स्टाफ को ताउम्र के लिए पेंशन दी जा रही है। यह जनता के धन की बर्बादी और कानून का मखौल उड़ाना है। केवल 2 साल की नियुक्ति में स्टाफ को उम्र भर के लिए पेंशन दी जा रही है। यह स्टाफ पार्टी का ही काडर होता है, जिसे जनता का धन दिया जा रहा है। ऐसी नियुक्ति भेदभावपूर्ण और धोखाधड़ी भरी है, इसे खत्म करना चाहिए। उन्होंने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की बात भी कही थी।
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