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Kerala High Court: 'बंदी हाथी का जीवन नाजी संहार शिविर में रहने की तरह'; हाथियों के शोषण पर हाई कोर्ट चिंतित

Fri, 15 Nov 2024 12:45 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 15 Nov 2024 12:45 AM IST
सार

बंदी हाथियों के साथ बढ़ते शोषण पर केरल हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने बंदी हाथियों पर शोषण को 'शाश्वत ट्रेबलिंका' करार देते हुए धार्मिक या अन्य आयोजन में हाथियों से करवाए जाने वाले परेड के लिए भी कड़े नियम लागू किए है।

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Kerala High Court: 'Life of captive elephant is like living in a Nazi extermination camp High Court concerned
केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बंदी हाथियों के साथ बढ़ते शोषण पर केरल हाईकोर्ट सख्त रवैया अपनाते हुए दिख रही है। जहां अदालच ने बंदी हाथियों के शोषण पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे 'शाश्वत ट्रेबलिंका' करार दिया। शाश्वत ट्रेबलिंका करार देने का तर्क था कि ये द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों द्वारा बनाए गए सबसे खतरनाक नरसंहार शिविरों में से एक था। इसके साथ ही अदालत ने धार्मिक त्योहारों और अन्य आयोजनों में हाथियों को परेड में शामिल करने के लिए कड़े नियम तय किए हैं। 
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हाथियों के शोषण पर अदालत की सख्ती
केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरन कहा कि केरल में बंदी हाथियों का बड़े पैमाने पर उपयोग धार्मिक परंपरा और प्रथा के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन यह जानवरों के स्वास्थ्य और कल्याण की अनदेखी करते हुए व्यावसायिक शोषण का मामला बन चुका है। इसके साथ ही न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार और गोपीनाथ पी की बेंच ने कहा कि किसी धर्म में हाथियों के उपयोग को अनिवार्य करने की कोई धार्मिक प्रथा नहीं है।
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परेड के लिए कड़े नियम लागू
बंदी हाथियों को आम तौर पर लोग धार्मिक त्योहार या अन्य आयोजन पर होने वाले परेड में शामिल करते है। इस बात तो लेकर भी अदालत ने अपनी सख्ती दिखाते हुए कुछ कड़े नियम लागू किए हैं। अदालत के आदेश के अनुसार, हाथियों के परेड में शामिल होने से पहले कई शर्तों का पालन करना होगा जैसे- उचित आश्रय, चिकित्सा प्रमाणपत्र, और 8 घंटे का आराम। इसके अलावा, हाथियों के परिवहन के लिए भी शर्तें तय की गई हैं, जैसे कि एक दिन में 30 किलोमीटर से अधिक पैदल यात्रा नहीं कराई जाएगी, और 125 किलोमीटर तक ही वाहन द्वारा यात्रा की जा सकेगी।
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अदालत का आदेश
इसके साथ ही अदालत ने 2018-2024 तक बंदी हाथियों की मौत में हुई वृद्धि पर चिंता जताते हुएआदेश दिया कि हाथियों को उनके पिछले पैरों पर खड़ा करने या उन्हें सलामी देने जैसी असंवेदनशील प्रथाओं की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही हाथियों को पकड़ने के लिए कैप्चर बेल्ट जैसे अमानवीय तरीकों का भी इस्तेमाल नहीं होगा। अदालत ने राज्य सरकार और वन विभाग को भी आदेश दिया कि वे 2012 के कैप्टिव एलीफेंट्स प्रबंधन और रखरखाव नियमों को सही तरीके से लागू करें और यदि नहीं किया तो इसकी वजह बताए।
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