फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kerala High Court dismisses PIL seeking time limit on passing of bills by Governor

Kerala Highcourt: कोर्ट का फैसला, राज्यपाल द्वारा विधेयकों को पारित करने की समय-सीमा तय करने की याचिका खारिज

Wed, 30 Nov 2022 07:10 PM IST
Jeet Kumar एएनआई, कोच्चि
एएनआई, कोच्चि Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 30 Nov 2022 07:10 PM IST
सार

जनहित याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने कहा कि राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय सीमा तय करना अदालत का कर्तव्य नहीं है और ऐसा करना विधायिका का काम है।

विज्ञापन
Kerala High Court dismisses PIL seeking time limit on passing of bills by Governor
केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए केरल के राज्यपाल के लिए समय सीमा निर्धारित करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश एस. मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपाल को कोई समय सीमा नहीं दे सकता। यह याचिका वकील अलुवा निवासी पीवी जीवेश ने दायर की थी।

विज्ञापन


अदालत में दायर याचिका में कहा गया था कि कई विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति के लिए लंबित पड़े हैं जिनको काफी समय हो गया है। याचिकाकर्ता पीवी जीवेशका कहना था कि राज्यपाल ने न तो अपनी स्वीकृति दी और न ही पुर्नविचार के लिए वापस भेजा। याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्यपाल ने इन विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए भेजने के विकल्प का भी प्रयोग नहीं किया।
विज्ञापन


जनहित याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने कहा कि राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय सीमा तय करना अदालत का कर्तव्य नहीं है और ऐसा करना विधायिका का काम है। वहीं याचिका में कहा गया है कि विधानसभा से पारित विधेयकों पर राज्यपाल की कार्रवाई असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक, संविधान के खिलाफ है और यह कार्रवाई राजनीतिक एजेंडे के तहत की जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में कहा गया है कि कैबिनेट द्वारा पारित विधेयक पर हस्ताक्षर करना राज्यपाल का संवैधानिक दायित्व है। यदि विधेयक को मंजूरी नहीं मिलती है, तो इसे वापस विधानसभा या राष्ट्रपति के पास भेजा जाना चाहिए। आगे कहा गया है कि  विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए और इसे  लोकतांत्रिक और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ घोषित किया जाना चाहिए।


याचिका में कहा गया था कि अनेक विधेयक कुछ समय से राज्यपाल की स्वीकृति के लिए लंबित पड़े हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्यपाल ने न तो अपनी स्वीकृति दी और न ही पुर्नविचार के लिए वापस भेजा। याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्यपाल ने इन विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए भेजने के विकल्प का भी प्रयोग नहीं किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed