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Kerala: अदालती मामलों की रिपोर्टिंग पर कोर्ट सख्त, कहा- सुनवाई कवर करते समय जिम्मेदार पत्रकारिता आचरण अपनाएं
Thu, 22 Jun 2023 05:47 PM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 22 Jun 2023 05:47 PM IST
सार
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को मीडिया से अदालती मामलों की रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदार पत्रकारिता आचरण अपनाने के लिए कहा।
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kerala high court
- फोटो : ANI
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विस्तार
अदालती मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर केरल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को मीडिया से अदालती मामलों की रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदार पत्रकारिता आचरण अपनाने के लिए कहा। अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान अक्सर न्यायाधीश द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों के आधार पर अनुचित मीडिया रिपोर्ट वादी की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति मोहम्मद नियास सीपी की पीठ का यह सुझाव मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निजी सचिव की पत्नी प्रिया वर्गीज की कन्नूर विश्वविद्यालय में मलयालम की सहायक प्रोफेसर के रूप में प्रस्तावित नियुक्ति से संबंधित मुकदमे पर मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के मद्देनजर आया है।
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पीठ ने कहा कि अक्सर ऐसे मौके आते हैं जब शैक्षणिक मामलों में कोई फैसला किसी न किसी कारण से मीडिया का ध्यान आकर्षित करता है। ऐसी परिस्थितियों में, अदालत को लगातार अखबार, चैनल चर्चाओं और भारी सोशल मीडिया पोस्ट पर होने वाली टीका टिप्पणियों से भी निपटना पड़ता है। पीठ ने कहा कि यही कारण है कि अदालतों ने बार-बार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अदालत के समक्ष लंबित मामलों पर चर्चा को स्थगित करके संयम बरतने के लिए प्रोत्साहित किया है।
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पीठ ने आगे कहा कि किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार में राज्य की मनमानी कार्रवाई के साथ-साथ प्रेस या मीडिया सहित अन्य निजी नागरिकों के कार्यों से अपनी प्रतिष्ठा की सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है। इसलिए, हमें भरोसा है कि मीडिया इन टिप्पणियों पर ध्यान देगा और जिम्मेदार पत्रकारिता आचरण का एक कोड अपनाएगा जो आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।
न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति मोहम्मद नियास सीपी की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश द्वारा पिछले साल 17 नवंबर को जारी आदेश के खिलाफ दायर प्रिया वर्गीज की याचिका को स्वीकार कर लिया और पीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि उनके पास इस पद के लिए प्रासंगिक अनुभव है और उस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी पर तदनुसार विचार किया जाएगा।