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Kerala: केरल में LGBTQ+ लोगों को डेटिंग ऐप के जरिए ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़, लाखों रुपये की कर रहे थे ठगी

Wed, 13 Aug 2025 01:37 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 13 Aug 2025 01:37 PM IST
सार

केरल पुलिस ने एक डेटिंग ऐप के जरिए LGBTQ+ लोगों को फंसाकर लूटने वाले चार सदस्यीय गिरोह को पकड़ा है। आरोपी रोमांस का झांसा देकर पीड़ितों से सुनसान जगह मिलते, फिर मारपीट कर जेवर और पैसे लूटकर फरार हो जाते थे। गिरोह का मास्टरमाइंड सुधीर है। पुलिस ने साइबर फॉरेंसिक जांच से चैट रिकवर कर आरोपियों तक पहुंच बनाई। 

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Kerala Gang busted duped LGBTQ people through dating app duping people lakhs rupees
केरल पुलिस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

केरल पुलिस ने एक ऐसे आपराधिक गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो डेटिंग ऐप Grindr के जरिए LGBTQ+ समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। आरोपी खुद को रोमांटिक पार्टनर बताकर लोगों से दोस्ती करते थे और फिर सुनियोजित तरीके से उन्हें लूटकर फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक, कई पीड़ित अपनी सामाजिक स्थिति के कारण शिकायत दर्ज कराने से बचते रहे।
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वेनजारामूड पुलिस के अनुसार, इस गिरोह में चार स्थानीय युवक शामिल थे, जिनकी उम्र 18 से 24 साल के बीच है। मास्टरमाइंड की पहचान चिथारा निवासी सुधीर के रूप में हुई है, जबकि अन्य आरोपी मोहम्मद सलमान, आशिक और सजीथ हैं। इन तीनों की उम्र 18 से 20 वर्ष है। गिरोह के खिलाफ कार्रवाई तब शुरू हुई जब एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपियों ने उसके सोने की चेन और अंगूठी लूट ली।
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वारदात का तरीका
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले ऐप पर संपर्क करते, फिर मिलने के लिए सुनसान जगह तय करते थे। वहां एक या दो आरोपी पीड़ित के साथ कार में समय बिताते, तभी बाकी आरोपी अजनबी बनकर आते, कार में बैठते, तेज रफ्तार से गाड़ी भगाते और पीड़ित से मारपीट कर जेवर या पैसे लूटकर सुनसान जगह छोड़ देते थे।
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तकनीकी जांच से खुला राज
आरोपियों ने वारदात के बाद पीड़ित के फोन का डेटा डिलीट कर दिया था, जिससे शुरुआत में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला। लेकिन साइबर फोरेंसिक टीम की मदद से ऐप की चैट रिकवर की गई और आरोपियों तक पहुंचा गया। आरोप है कि गिरोह ने सैकड़ों लोगों से ऑनलाइन और कैश में लाखों रुपये वसूले हैं।

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लोग शिकायत करने से कतरा रहे
पुलिस का कहना है कि कई पीड़ितों की पहचान हो चुकी है, लेकिन सामाजिक स्थिति और पहचान उजागर होने के डर से वे शिकायत दर्ज कराने को तैयार नहीं हैं। पुलिस अब डिजिटल सबूतों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य संभावित पीड़ितों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
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