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Kerala: कुत्तों के काटने से 12 साल की बच्ची की मौत, रेबीज टीके पर उठे सवाल, मंडाविया को लिखा पत्र

Tue, 06 Sep 2022 11:12 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: Amit Mandal Updated Tue, 06 Sep 2022 11:12 PM IST
सार

लड़की के माता-पिता ने आरोप लगाया कि वे अपनी बेटी को पहले केरल के पथानामथिट्टा जिले के पेरुनाड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए थे, लेकिन तब यह बंद था।

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Kerala asks Union government to test quality of anti-rabies vaccine
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

टीके की तीन खुराक लेने के बावजूद आवारा कुत्ते के काटने से 12 साल की बच्ची की मौत के एक दिन बाद राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से देश में उपलब्ध रेबीज रोधी टीके की गुणवत्ता की जांच करने को कहा। जॉर्ज ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया को एक पत्र भेजा गया था जिसमें राज्य में पांच लोगों को रेबीज टीका लगाने के बावजूद मौत के बाद लोगों के डर को दूर करने को कहा गया। केंद्रीय ड्रग्स लैब टीकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करती है और प्रमाण पत्र देती है। हाल ही में कुत्ते के काटने से मरने वाले पांच व्यक्तियों को टीका लगाया गया था, इसके बावजूद उनकी मौत हो गई। टीके लेने के बावजूद उनकी मौत हो गई और इसने जनता के बीच चिंता पैदा की है। 

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जॉर्ज ने कहा कि पत्र वैक्सीन और बैच नंबर के विवरण के साथ भेजा गया था। स्वास्थ्य विभाग ने आवारा कुत्तों के काटने पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया है। इस बीच केरल गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (KGMOA) ने इन आरोपों से इनकार किया कि अस्पताल के अधिकारियों की ओर से कुछ खामियां थीं जहां लड़की का इलाज शुरू में किया गया था। केजीएमओए ने एक बयान में कहा कि पत्तनमथिट्टा के सामान्य अस्पताल ने बच्चे के लिए दुनिया भर में स्वीकृत उपचार व्यवस्था प्रदान की है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इलाज और टीके प्राप्त करने के बावजूद बच्चे की जान चली गई। 
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केजीएमओए ने यह भी कहा कि बच्चे के चेहरे और आंखों पर गंभीर चोटें थीं, जिससे संक्रमण जल्दी से मस्तिष्क में फैल सकता है और दवाओं के प्रभावी होने से पहले तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने पहले कहा था कि पुणे, महाराष्ट्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के परीक्षण के परिणामों ने पुष्टि की कि लड़की की मौत रेबीज के कारण हुई है। पीड़िता का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने मीडिया को बताया था कि लड़की को गर्दन और चेहरे पर काट लिया गया था और इसलिए इम्युनोग्लोबुलिन देने के बावजूद वायरस का मस्तिष्क तक जल्दी पहुंचना आसान था।
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लड़की के माता-पिता ने आरोप लगाया कि वे अपनी बेटी को पहले केरल के पथानामथिट्टा जिले के पेरुनाड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए थे, लेकिन तब यह बंद था। केरल के पठानमथिट्टा जिले के रन्नी की रहने वाली लड़की 14 अगस्त की सुबह दूध खरीदने के लिए जा रही थी तभी एक आवारा कुत्ते ने उसे बुरी तरह काट लिया। इसके बाद उसे तीन टीके लगाए गए थे। पिछले शुक्रवार की शाम को उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे पठानमथिट्टा जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया।  

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