फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Katchatheevu: Why did Indira government give island to Sri Lanka, what is importance of area

Katchatheevu: इंदिरा सरकार ने क्यों दिया था श्रीलंका को कच्चातिवु द्वीप, इस इलाके का क्या महत्व? जानें सबकुछ

Fri, 11 Aug 2023 07:02 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 11 Aug 2023 07:02 PM IST
विज्ञापन
सार
Katchatheevu Island: PM मोदी ने गुरुवार को अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कच्चातिवु द्वीप की चर्चा की। 285 एकड़ का हरित क्षेत्र 1976 तक भारत का था। साल 1974 में तत्कालीन PM इंदिरा गांधी ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के साथ 1974-76 के बीच चार समुद्री सीमा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इन्हीं समझौते के तहत कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया। 
 
loader
Katchatheevu: Why did Indira government give island to Sri Lanka, what is importance of area
कच्चातिवु द्वीप - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब दिया। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर मां भारती को छिन्न-भिन्न करने का आरोप लगाया। इस दौरान उन्होंने कच्चातिवु द्वीप की चर्चा की। पीएम ने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में इसे दूसरे देश (श्रीलंका) को दिया गया। क्या ये मां भारती का हिस्सा नहीं था? 


आइए जानते हैं कि आखिर पीएम मोदी ने कच्चातिवु द्वीप पर क्या कहा है? ये द्वीप कहां है? कच्चातिवु द्वीप का महत्व क्या है? इस पर भारत में विवाद क्या है?

PM Modi
PM Modi - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी ने कच्चातिवु द्वीप पर क्या कहा है? 
पीएम ने अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के शासनकाल में हुई कई घटनाओं का जिक्र किया। जब पीएम श्रीलंका स्थित कच्चातिवु द्वीप की बात कर रहे थे तब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल वॉकआउट कर गए थे। इस पर पीएम ने कहा, 'जो बाहर गए हैं, उनसे पूछिये कि ये कच्चातिवु द्वीप क्या है? यह कहां है? यहां इतनी बड़ी-बड़ी बातें कर देश को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत माता की मृत्यु की कामना कर रहे हैं। और ये डीएमके वाले, उनकी सरकार, उनके मुख्यमंत्री मुझे आज भी चिट्ठी लिखते हैं कि मोदी जी कच्चातिवु द्वीप को वापस लाइए।'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'ये कच्चातिवु है क्या? किसने किसी दूसरे देश को दिया था? कब दिया था? क्या वह हमारी मां भारती का अंग नहीं था। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में इसे श्रीलंका को दे दिया गया। यह कांग्रेस का इतिहास है। मां भारती को छिन्न-भिन्न करने का इतिहास।'

कच्चातिवु द्वीप
कच्चातिवु द्वीप - फोटो : AMAR UJALA
ये द्वीप कहां है? 
कच्चातिवु पाक जलडमरूमध्य में एक छोटा सा द्वीप है, जो बंगाल की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। 285 एकड़ हरित क्षेत्र 1976 तक भारत का था। हालांकि, श्रीलंका और भारत के बीच एक विवादित क्षेत्र है, जिस पर आज श्रीलंका हक जताता है। दरअसल, साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समकक्ष श्रीलंकाई राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के साथ 1974-76 के बीच चार समुद्री सीमा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इन्हीं समझौते के तहत कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया। 

कच्चातिवू द्वीप
कच्चातिवू द्वीप - फोटो : AMAR UJALA
कच्चातिवू द्वीप का इतिहास क्या है?
कच्चातिवू द्वीप का निर्माण 14वीं शताब्दी में ज्वालामुखी विस्फोट के कारण हुआ था। यह कभी 17वीं शताब्दी में मदुरई के राजा रामानद के अधीन था। ब्रिटिश शासनकाल में यह द्वीप मद्रास प्रेसीडेंसी के पास आया। 1921 में श्रीलंका और भारत दोनों ने मछली पकड़ने के लिए भूमि पर दावा किया और विवाद अनसुलझा रहा। आजादी के बाद इसे भारत का हिस्सा माना गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कच्चातिवू द्वीप क्या महत्व है?
यह द्वीप सामरिक महत्व का था और इसका उपयोग मछुआरे करते थे। हालांकि इस द्वीप पर श्रीलंका लगातार दावा जताता रहा। यह मुद्दा तब उभरा जब भारत-श्रीलंका ने समुद्री सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए। साल 1974 में 26 जून को कोलंबो और 28 जून को दिल्ली में दोनों देशों के बीच इस द्वीप के बारे में बातचीत हुई। इन्हीं दो बैठकों में कुछ शर्तों के साथ इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया गया। 

तब शर्त यह रखी गई कि भारतीय मछुआरे अपना जाल सुखाने के लिए इस द्वीप का इस्तेमाल कर सकेंगे और द्वीप में बने चर्च में भारत के लोगों को बिना वीजा के जाने की अनुमति होगी। समझौतों ने भारत और श्रीलंका की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा चिह्नित कर दी। हालांकि इस समझौते का तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने तीखा विरोध किया था।

श्रीलंका में अलगाववादी समूह लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के सक्रिय वर्षों के दौरान, श्रीलंकाई सरकार ने सैन्य अभियानों के मुद्दों को उठाते हुए पानी में श्रीलंकाई मछुआरों की आसान आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया था। 2009 में, श्रीलंका ने पाक जलडमरूमध्य में अपनी समुद्री सीमा की कड़ी सुरक्षा शुरू कर दी। 2010 में एलटीटीई के साथ संघर्ष की समाप्ति के साथ श्रीलंकाई मछुआरों ने फिर से पाक खाड़ी में अपना आंदोलन शुरू कर दिया और अपने खोए हुए क्षेत्र को दोबारा हासिल कर लिया।

पीएम मोदी से मिले तमिलनाडु के सीएम स्टालिन
पीएम मोदी से मिले तमिलनाडु के सीएम स्टालिन - फोटो : twitter.com/mkstalin
भारत में इस द्वीप को लेकर विवाद क्या है?
तमिलनाडु की तमाम सरकारें 1974 के समझौते को मानने से इनकार करती रहीं और श्रीलंका से द्वीप को दोबारा प्राप्त करने की मांग उठाती रहीं। 1991 में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा समझौते के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया गया जिसके जरिए द्वीप को पुनः प्राप्त करने की मांग की गई थी।

2008 में तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं और कच्चातिवु समझौतों को रद्द करने की अपील की। उन्होंने कहा था कि श्रीलंका को कच्चातिवु उपहार में देने वाले देशों के बीच दो संधियां असंवैधानिक हैं। इसके अलावा साल 2011 में जयललिता ने एक बार फिर से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराया।

मई 2022 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पीएम मोदी की मौजूदगी में एक समारोह में मांग की थी कि कच्चातिवु द्वीप को भारत में पुनः प्राप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि पारंपरिक तमिल मछुआरों के मछली पकड़ने के अधिकार अप्रभावित रहें, इसलिए इस संबंध में कार्रवाई करने का यह सही समय है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed