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सरहद पार से भड़काने की वजह से बहक रहे हैं कश्मीरी युवा : पुलिस प्रमुख
BBC
Updated Mon, 10 Jul 2017 01:52 PM IST
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सुरक्षाकर्मी
- फोटो : Getty Images
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कश्मीर घाटी में लगभग शांति है लेकिन आम धारणा ये है कि ये शांति सतही है। अंदर ही अंदर सुरक्षा कर्मियों और अलगाववादी ताक़तों के बीच एक कश्मकश जारी है। हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की पहली बरसी के अवसर पर डर ये था। कि पिछले साल की तरह बड़े पैमाने पर हिंसा होगी लेकिन केवल छिटपुट घटनाएँ ही घटीं। इसका मुख्य कारण है। पिछले कई हफ़्तों से चरमपंथियों पर जारी सुरक्षा कर्मियों के लगातार हमले। सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के एक उच्च अधिकारी अजय कुमार के अनुसार पिछले एक महीने में दो दर्जन चरमपंथी मारे जा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद एक साल पहले बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीरी युवा चरमपंथियों के साथ क्यों जुड़ रहे हैं। जम्मू कश्मीर के पुलिस प्रमुख एस पी वेद के अनुसार सरहद पार से सोशल मीडिया द्वारा भड़काने के कारण कश्मीरी युवा बहक रहे हैं। वो कहते हैं, "कुछ युवा हैं जिन्हें सरहद पार से भड़काया जाता है"। एस पी वेद का कहना था कि पाकिस्तान स्थित कुछ एजेंसियाँ वही हथकंडे इस्तेमाल कर रही हैं। जो तथाकथित इस्लामिक स्टेट इस्तेमाल करता है वो कहते हैं। "इस्लामिक स्टेट का असर कश्मीर में नहीं है। लेकिन पड़ोस की कुछ एजेंसियां उन्हीं तौर तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। और उसी से भड़क कर ये बच्चे हथियार उठा रहे हैं"।
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एस पी वेद
- फोटो : Getty Images
वेद कहते हैं कि प्रशासन इस तरफ़ कुछ ठोस क़दम उठा रहा है। इसके अलावा तनाव के समय इंटरनेट की सुविधाएं बंद करने का कारण भी यही कि पाकिस्तान की तरफ़ से सोशल मीडिया के ज़रिए भड़काने की कोशिशों पर रोक लगायी जाए। राज्य पुलिस प्रमुख ने उन लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही जो इस प्रोपगैंडा को घाटी में बढ़ावा देते हैं। या जो इससे प्रभावित होते हैं। पुलिस प्रमुख का मानना है। कि 90 के दशक के मुक़ाबले में आज कश्मीर में चरमपंथ कुछ अधिक नहीं बदला है। उस ज़माने में पाकिस्तान कश्मीर के चरमपंथियों की खुल कर मदद करता था। "लेकिन आज वो एजेंसियों के ज़रिए और संस्थाओं के ज़रिए करता है जिनको नॉनस्टेट एक्टर बोलते हैं। लेकिन वो सब कुछ वहीं से होता है"। पाकिस्तान चरमपंथियों की सीधे मदद से इंकार करता है। मगर पाकिस्तान कश्मीर की तहरीक की हिमायत करने को स्वीकार ज़रूर करता है। कई देशों में चरमपंथियों को के रास्ते से हटाकर समाज की मुख्यधारा में लाने के प्रोग्राम चलाए जाते हैं जिनमें ब्रिटेन, अमरीका, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश शामिल हैं। क्या कश्मीर में ऐसा कोई प्रोग्राम शुरू किया गया है।
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सुरक्षाकर्मी
- फोटो : Getty Images
पुलिस प्रमुख कहते हैं। कि जिस स्तर पर होना चाहिए वैसा नहीं हो रहा है। वो कहते हैं, "जिस लेवल पर यानी सरकारी स्तर पर जो ये होना चाहिए मैं समझता हूँ। कि अभी यहाँ नहीं है। छोटी छोटी कोशिशें हो रही हैं। कुछ एनजीओ कर रही हैं। कुछ सरकारी संस्थाएँ कर रही हैं। लेकिन जिस स्तर का होना चाहिए मुझे तसल्ली नहीं है"। एस पी वेद कहते हैं कि अगर चरमपंथी युवा मिलिटिन्सी का रास्ता त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। तो वो उनका स्वागत करेंगे। लेकिन युवा चरमपंथी और उनके समर्थक इस सुझाव को नज़रअन्दाज़ करते हैं। वो कहते हैं कि पिछले साल बुरहान की मौत के बाद हुई हिंसा में सुरक्षाकर्मियों ने मासूम नागरिकों की हत्या की है और वो उस ज़्यादती को भूल नहीं सके हैं। शनिवार को दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा इलाक़े में उत्तेजित भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंकते हुए भारत विरोधी और पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए। उन्होंने "कश्मीर की आज़ादी" की लड़ाई जारी रखने पर पूरा ज़ोर रखने की बातें कहीं। पिछले साल कश्मीर घाटी में कई महीनों तक हिंसा जारी रही थी। इस बार हड़ताल का असर बहुत कम नज़र आया। वेद कहते हैं कश्मीर के आम नागरिक हिंसा नहीं चाहते।