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अमर उजाला: IPCS लिविंग हिस्ट्री श्रृंखला की पहली कड़ी, करजई लिखेंगे भारत-अफगान रिश्तों की नई इबारत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Apr 2018 10:12 AM IST
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हामिद करजई
- फोटो : google
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महान साहित्यकार रवींद्र नाथ टैगोर की अमर कहानी ‘काबुलीवाला’ में भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों का बेहतरीन वर्णन था। अब एक गैर सरकारी पहल के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। खास बात यह है कि इसकी इबारत खुद अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ताज नगरी आगरा में लिखेंगे। करजई की यह यात्रा अमर उजाला और गैर सरकारी संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फिल्कट स्ट्डीज (आईपीसीएस) की संयुक्त विचार श्रृंखला लिविंग हिस्ट्री की पहली कड़ी के तहत आयोजित की गई है।
अपनी तीन दिन की निजी यात्रा पर करजई ताज की खूबसूरती को निहारने के अलावा आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी का भी दीदार करेंगे। इस दौरान वह आगरा के प्रबुद्ध लोगों के साथ भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों, अंतर्राष्ट्रीय पटल पर आपसी सहयोग के महत्व और दक्षिण एशिया में दोनों देशों की भूमिका पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत के योगदान पर भी विचार-विमर्श होगा।
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई को दक्षिण एशिया की राजनीति में कद्दावर राजनेता माना जाता है। तालिबान के कब्जे से अफगानिस्तान की मुक्ति के बाद पहले राष्ट्रपति के तौर पर करजई 12 सालों तक पद पर रहे। पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने भारत-अफगान रिश्तों और दक्षिण एशिया में शक्ति के हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए रखी। उन्हें भारत का दोस्त माना जाता है। उनकी शिक्षा शिमला में ही हुई है।
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अमर उजाला और आईपीसीएस के निमंत्रण पर हामिद करजई 20 अप्रैल की शाम दिल्ली पहुंचे। 21 को वह आगरा पहुंचकर अपने तीन दिन के प्रवास के पहले दिन अपने साथ आए पूर्व राजनयिकों के साथ ताजमहल और आगरा का किला देखेंगे। 22 अप्रैल को अमर उजाला-आईपीसीएस की लिविंग हिस्ट्री श्रृंखला की पहली कड़ी को संबोधित करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों के महत्व और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में दोनों की भूमिका पर विचार रखेंगे और श्रोताओं से संवाद करेंगे। अगले दिन आगरा के सेंट पीटर्स स्कूल में बच्चों के साथ संवाद कार्यक्रम के बाद दिल्ली लौट जाएंगे।
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अपनी तीन दिन की निजी यात्रा पर करजई ताज की खूबसूरती को निहारने के अलावा आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी का भी दीदार करेंगे। इस दौरान वह आगरा के प्रबुद्ध लोगों के साथ भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों, अंतर्राष्ट्रीय पटल पर आपसी सहयोग के महत्व और दक्षिण एशिया में दोनों देशों की भूमिका पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत के योगदान पर भी विचार-विमर्श होगा।
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अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई को दक्षिण एशिया की राजनीति में कद्दावर राजनेता माना जाता है। तालिबान के कब्जे से अफगानिस्तान की मुक्ति के बाद पहले राष्ट्रपति के तौर पर करजई 12 सालों तक पद पर रहे। पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने भारत-अफगान रिश्तों और दक्षिण एशिया में शक्ति के हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए रखी। उन्हें भारत का दोस्त माना जाता है। उनकी शिक्षा शिमला में ही हुई है।
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अमर उजाला और आईपीसीएस के निमंत्रण पर हामिद करजई 20 अप्रैल की शाम दिल्ली पहुंचे। 21 को वह आगरा पहुंचकर अपने तीन दिन के प्रवास के पहले दिन अपने साथ आए पूर्व राजनयिकों के साथ ताजमहल और आगरा का किला देखेंगे। 22 अप्रैल को अमर उजाला-आईपीसीएस की लिविंग हिस्ट्री श्रृंखला की पहली कड़ी को संबोधित करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों के महत्व और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में दोनों की भूमिका पर विचार रखेंगे और श्रोताओं से संवाद करेंगे। अगले दिन आगरा के सेंट पीटर्स स्कूल में बच्चों के साथ संवाद कार्यक्रम के बाद दिल्ली लौट जाएंगे।