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Karnataka: सिद्धारमैया सरकार ने 60 आपराधिक मामले लिए वापस, इसमें शिवकुमार समर्थकों की पत्थरबाजी वाला केस भी

Fri, 05 Sep 2025 01:44 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 05 Sep 2025 01:44 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने 60 आपराधिक मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। इनमें 2019 के चित्तापुर और कनकपुरा पत्थरबाजी केस, किसानों, छात्रों, दलित और कन्नड़ संगठनों से जुड़े मामले शामिल हैं। डी.के. शिवकुमार और डी.के. सुरेश के समर्थकों पर दर्ज पुराने केस भी हटाए गए हैं। हालांकि गृह विभाग और पुलिस अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी, फिर भी कैबिनेट ने इन्हें रद्द कर दिया।

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Karnataka Siddaramaiah government withdrew 60 criminal cases stone pelting by DK Shivkumar supporters
डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक में 60 आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया। इनमें वे केस भी शामिल हैं जो 2019 में चित्तापुर और कनकपुरा में हुई पत्थरबाजी की घटनाओं से जुड़े हैं। यह निर्णय किसानों, छात्रों, कन्नड़ कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों से संबंधित है। सरकार का कहना है कि यह फैसला जनता और जनप्रतिनिधियों से आई मांगों के बाद लिया गया है।
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सूत्रों के मुताबिक, जिन मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है, उनमें 2019 में चित्तापुर में हुई पत्थरबाजी का केस शामिल है। यह घटना उस समय हुई थी जब पुलिस ने हिंदू कार्यकर्ताओं की सूचना पर पशुओं को जब्त किया था। इसी तरह, कनकपुरा में ईडी द्वारा डी.के. शिवकुमार की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों पर दर्ज पत्थरबाजी के केस भी इस सूची में हैं।
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शिवकुमार और सुरेश से जुड़े केस
कैबिनेट के इस निर्णय में सरकार में उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके भाई, पूर्व सांसद डी.के. सुरेश के समर्थकों से जुड़े पुराने मामले भी हटा दिए गए हैं। साल 2012 में डी.के. सुरेश के समर्थकों ने उस समय के मुख्यमंत्री का घेराव किया था। यह विरोध इसलिए हुआ था क्योंकि उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया था। अब इन मामलों को भी खत्म कर दिया गया है।


सूत्रों ने बताया कि इन 60 मामलों में किसानों, दलित कार्यकर्ताओं, कन्नड़ संगठनों और गणेश उत्सव के दौरान झगड़े से जुड़े केस भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन मामलों की वापसी से कई संगठनों और लोगों पर लटक रही कानूनी तलवार हट जाएगी और माहौल शांतिपूर्ण बनेगा।

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कानूनी प्रक्रिया और विभागों की आपत्ति
हालांकि, गृह विभाग, डीजीपी और आईजीपी, अभियोजन निदेशक और विधि विभाग ने इन मामलों को वापस लेने पर आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि सभी मामलों को वापस लेना सही नहीं होगा। इसके बावजूद कैबिनेट सब-कमेटी ने जांच और विचार के बाद इन मामलों को कैबिनेट के सामने रखा और अंततः इन्हें वापस लेने का फैसला लिया गया। हालांकि इस फैसले को लेकर विपक्ष सवाल उठा सकता है कि क्या सरकार राजनीतिक दबाव में आकर केस वापस ले रही है। लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम न्याय और सामाजिक संतुलन के लिए जरूरी है।

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