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कर्नाटक के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े पद्म विभूषण से सम्मानित
Tue, 26 Jan 2021 07:54 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 26 Jan 2021 07:54 AM IST
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डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े
- फोटो : सोशल मीडिया
केंद्र सरकार गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या यानी सोमवार को पद्म अवार्ड का एलान कर दिया है। सरकार की तरफ से जारी की गई लिस्ट के मुताबिक सात लोगों को पद्म विभूषण दिए जाएंगे। इनमें एक नाम कर्नाटक के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े का भी है।
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डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े कर्नाटक के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। वे शिक्षाविद, प्रेरक वक्ता और लेखक भी हैं। उन्होंने चिकित्सा पद्धति और नैतिकता पर कई किताबें लिखी हैं। उन्हें 2010 में पद्म भूषण अवॉर्ड दिया गया था।
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बेल्ले मोनप्पा हेगड़े का जन्म 18 अगस्त 1938 को कर्नाटक के पंगला (Pangala) में हुआ था। बेल्ले मोनप्पा हेगड़े (82 वर्ष) लोगों के बीच डॉ. बीएम हेगड़े के नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्हें पद्म विभूषण अवार्ड के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
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'जनता के चिकित्सक' के रूप में जाने जाते हैं हेगड़े
डॉ. हेगड़े को 'जनता के चिकित्सक' कहा जाता है, उनका मानना है कि स्वास्थ्य और स्वास्थ्य देखभाल का तरीका न्यूनतम चिकित्सा का उपयोग है और अनावश्यक उपचार या सर्जरी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'सुधारात्मक उद्देश्यों के लिए सर्जरी को सीमित किया जाना चाहिए। अगर एक बच्चा छेद (दिल में) के साथ पैदा होता है, तो फिर उसे सर्जरी के जरिए ठीक करने की जरूरत होती है।'
उनका कहना है कि लोगों को यह विश्वास दिलाया जाना चाहिए कि दवा की गोली खिलाने से तुरंत राहत मिलती है। लेकिन हर एक को याद रखना चाहिए कि हर बीमारी के पीछे एक दवा की गोली है। वह कहते हैं, 'आपको सिरदर्द है; आपका रक्तचाप बढ़ जाता है। फिर आप चेक-अप के लिए एक डॉक्टर के पास जाते हैं, जिसका अर्थ है कि आप एक मरीज हैं और आप उस स्थिति से वापस नहीं आ पाते हैं। इसके बजाय, पांच बार सांस लेने की तकनीक वाला एक सरल प्राणायाम आपको सिरदर्द से तेजी से राहत दिला सकता है।'
डॉ हेगड़े पाठकों के बीच एक बड़े स्तंभ के साथ एक नियमित स्तंभकार रहे हैं। वह वर्तमान चिकित्सा अनुसंधान और फार्मा कंपनियों के व्यवहार और आचरण में खामियों को उजागर करते रहते हैं।