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Karnataka: सरकार ने कॉलेज में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने वाले प्राचार्य का अवार्ड रोका, फैसले पर राजनीति शुरू
Thu, 05 Sep 2024 01:23 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 05 Sep 2024 01:23 PM IST
सार
एसडीपीआई का कहना है कि जिन प्रिंसिपल ने हिजाब पर बैन लगाया, उन्हें अवार्ड देकर सम्मानित करने से समाज में गलत संदेश जाएगा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी आवाजें उठीं और सरकार के फैसले से नाराजगी जताई गई।
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हिजाब को लेकर हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कर्नाटक सरकार के एक फैसले पर विवाद हो गया है। दरअसल कर्नाटक के उडुपी कॉलेज के एक प्राचार्य (प्रिंसिपल) को शिक्षक दिवस पर 'बेस्ट प्रिंसिपल' का राज्य सरकार का अवार्ड मिलना था, लेकिन अब सरकार ने अवार्ड को रोक दिया है। दरअसल जिन प्राचार्य के अवार्ड को रोका गया है, उन्होंने ही कॉलेज में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया था, जिस पर भारी विवाद हो गया था। अब जब राज्य सरकार ने अवार्ड रोक दिया है तो उस पर भी राजनीति शुरू हो गई है।
क्या है विवाद
उडुपी जिले के कुंदापुरा प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रिंसिपल बीजी रामकृष्णन को राज्य सरकार की तरफ से दिए जाने वाले बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड से सम्मानित करने का एलान किया गया था। शिक्षा विभाग के इस फैसले पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने नाराजगी जताई। एसडीपीआई का कहना है कि जिन प्रिंसिपल ने हिजाब पर बैन लगाया, उन्हें अवार्ड देकर सम्मानित करने से समाज में गलत संदेश जाएगा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी आवाजें उठीं और सरकार के फैसले से नाराजगी जताई गई।
विरोध के आगे झुकी सरकार
इस विरोध का असर दिखा और सरकार ने अब बीजी रामकृष्णन को दिए जाने वाले अवार्ड को रोक दिया है। कर्नाटक के प्राथमिक शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा ने सरकार के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि 'इस मामले को देखा जा रहा है। कल जब इसके बारे में पता चला तो अवार्ड को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। जब भी इसे लेकर कुछ तय होगा तो जानकारी दे दी जाएगी। मुझे इस मामले को फिर से देखने को कहा गया है। जिस तरह से उन्होंने (प्रिंसिपल) बच्चों से व्यवहार किया, उससे समस्या है, लेकिन इस फैसले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।' बुधवार को प्रिंसिपल बीजी रामकृष्णन ने मीडिया से बताया कि उन्हें अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उन्हें दिए जाने वाले अवार्ड को फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि अभी इसे रद्द नहीं किया गया है। वहीं अवार्ड रोके जाने पर भी विवाद शुरू हो गया है।
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क्या है विवाद
उडुपी जिले के कुंदापुरा प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रिंसिपल बीजी रामकृष्णन को राज्य सरकार की तरफ से दिए जाने वाले बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड से सम्मानित करने का एलान किया गया था। शिक्षा विभाग के इस फैसले पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने नाराजगी जताई। एसडीपीआई का कहना है कि जिन प्रिंसिपल ने हिजाब पर बैन लगाया, उन्हें अवार्ड देकर सम्मानित करने से समाज में गलत संदेश जाएगा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी आवाजें उठीं और सरकार के फैसले से नाराजगी जताई गई।
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विरोध के आगे झुकी सरकार
इस विरोध का असर दिखा और सरकार ने अब बीजी रामकृष्णन को दिए जाने वाले अवार्ड को रोक दिया है। कर्नाटक के प्राथमिक शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा ने सरकार के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि 'इस मामले को देखा जा रहा है। कल जब इसके बारे में पता चला तो अवार्ड को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। जब भी इसे लेकर कुछ तय होगा तो जानकारी दे दी जाएगी। मुझे इस मामले को फिर से देखने को कहा गया है। जिस तरह से उन्होंने (प्रिंसिपल) बच्चों से व्यवहार किया, उससे समस्या है, लेकिन इस फैसले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।' बुधवार को प्रिंसिपल बीजी रामकृष्णन ने मीडिया से बताया कि उन्हें अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उन्हें दिए जाने वाले अवार्ड को फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि अभी इसे रद्द नहीं किया गया है। वहीं अवार्ड रोके जाने पर भी विवाद शुरू हो गया है।
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