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सुप्रीम कोर्ट पहुंची नेता की बेटी, जबरन हुई शादी से बचाने की लगाई गुहार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 12 Apr 2018 09:46 AM IST
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Supreme Court of India
कर्नाटक के एक प्रभावशाली नेता की बेटी गुलबर्ग स्थित अपने घर से भागकर दिल्ली आ गई है। उसने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि उसे अपने प्रेमी के बजाए दिल्ली के एक लड़के के साथ शादी करने के लिए मजबूर किया गया। अपील के घंटों बाद ही उसे दिल्ली पुलिस से सुरक्षा मिल गई। बुधवार सुबह 10:30 बजे वकील सुनील फर्नांडिस ने मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ से एक याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की अपील की। जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए दोपहर 2 बजे सुना।
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वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा- 26 साल की महिला को उसके पैरेंट्स और भाई द्वारा शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। इतना ही नहीं भाई ने धमकी देते हुए कहा है कि यदि उसने परिवार की मर्जी से शादी ना करते हुए अपने प्रेमी का हाथ थामा तो उसपर एसिड अटैक या उसका बलात्कार कर दिया जाएगा। उसकी जबरन 14 मार्च को शादी करवा दी गई जबकि वह पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर गई थी। जयसिंह ने अदालत को महिला द्वारा दूल्हे और पुलिस को भेजे गए मैसेज दिखाए। जिसमें महिला ने कहा था कि वह यह शादी नहीं करना चाहती है।
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कोर्ट ने कहा कि यह हादिया केस की तरह ही है। इस मामले में लड़की उस शख्स के साथ नहीं रहना चाहती जिसे उसके पैरेंट्स ने चुना है। उन्होंने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना करके उसकी जबरन शादी करवाई। यह शादी शून्य करार दी जाती है क्योंकि उसने शादी के लिए सहमति नहीं थी। महिला की वकील इंदिरा जयसिंह ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(2) और 7 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों के विपरीत है।
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महिला की ओर से पेश् वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-5(2) और 7 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कहा मौलिक अधिकारों के विपरीत है। उन्होंने दावा कि कानून के तहत शादी के प्रावधानों में लड़की की सहमति का कोई प्रावधान नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि हम कानून केप्रावधानों पर नहीं जाएंगे। हम इसे गैरकानूनी नहीं ठहरा सकते। अगर लड़की अपने ससुराल में नहीं जाना चाहती है तो यह उसकी मर्जी है। अगर शादी हुई तो वह इसे निरस्त करने के लिए फैमली कोर्ट जा सकती है। तब तक हम महिला को संरक्षण देंगे। इस पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि शादी बिना लड़की की सहमति लिए हुई है। इस मसले को लेकर प्रावधानों में स्पष्टता नहीं है।
इस पर पीठ ने कहा कि रिट याचिका के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि धारा-12 सी में स्पष्ट कहा गया कि अगर शादी जबरन सहमति लेकर की गई है तो शादी को शून्य ठहराया जा सकता है। वास्तव में जबरन सहमति लेकर शादी करने का प्रावधान होने के मतलब है कि सहमति जरूरी है।