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Karnataka: क्या है मुडा मामला, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर चलेगा मुकदमा, जानिए कैसे फंसा सीएम का परिवार

Sat, 17 Aug 2024 10:54 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 17 Aug 2024 10:54 AM IST
सार

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में मैसूर के एक इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। विपक्ष का आरोप है कि सीएम की पत्नी को मुआवजा देने के लिए महंगे इलाके में जगह आवंटित की गई थी।  
 

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karnataka muda case explained in which cm siddaramaiah face legal case governor gave permission
मुडा भूमि मामला - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) मामले ने कर्नाटक की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दरअसल इस मामले में फंसे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुडा मामले में सीएम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। मुडा मामले में सीएम सिद्धारमैया के साथ ही उनकी पत्नी समेत परिवार के सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। तो आइए जानते हैं कि क्या है मुडा मामला? क्या हैं सीएम और उनके परिवार पर आरोप?
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क्या है MUDA
मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) का काम मैसूर में शहरी विकास को बढ़ावा देना, बुनियादी ढांचे का विकास करना और लोगों को किफायती कीमत पर आवास उपलब्ध कराना है। मुडा ने साल 2009 में शहरी विकास के चलते अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना 50:50 पेश की थी। इस योजना के तहत जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें मुडा द्वारा विकसित भूमि की 50 फीसदी जमीन के प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। हालांकि साल 2020 में तत्कालीन भाजपा ने सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया था। हालांकि योजना बंद होने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना को जारी रखा और इसके तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। 
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मुख्यमंत्री की पत्नी का 50:50 योजना से क्या संबंध?
आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी की मैसूर में केसारे गांव में 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि थी, जो पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन ने उपहार स्वरूप दी थी। मुडा द्वारा साल 2021 में पार्वती की जमीन को अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में पार्वती को 14 साइटें आवंटित की गईं। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। 
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मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती ने आवेदन किया जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पार्वती को मुडा द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है।

विपक्ष अनियमितता के लगा रहा आरोप
विपक्ष का आरोप है कि विजयनगर में जो साइटें आवंटित की गई हैं उनका बाजार मूल्य केसारे में मूल भूमि से काफी अधिक है। विपक्ष ने अब मुआवजे की निष्पक्षता और वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, यह भी दिलचस्प है कि 2021 में भाजपा शासन के दौरान ही विजयनगर में सीएम की पत्नी पार्वती को नई साइट आवंटित की गई थी।



आरोपों पर सीएम का क्या कहना है
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आवंटन का बचाव करते हुए कहा कि यह 2021 में भाजपा सरकार के तहत किया गया था। उन्होंने कहा कि विजयनगर में साइटें इसलिए दी गईं क्योंकि केसारे में देवनूर फेज 3  इलाके में साइटें उपलब्ध ही नहीं थीं। सिद्धारमैया के कानूनी सलाहकार एएस पोन्नन्ना ने दावा किया कि विजयनगर में मुआवजे वाली जगह का मूल्य केसारे में मूल जमीन से बहुत कम है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार, पार्वती सरकार से 57 करोड़ रुपये अधिक पाने की हकदार हैं, क्योंकि उन्हें मुआवजे के रूप में मिली भूमि की कीमत महज 15-16 करोड़ रुपये है, जो कि केसारे में उनकी मूल जमीन से बहुत कम है। पोन्नन्ना ने आगे बताया कि मुआवजा स्थल का क्षेत्रफल 38,284 वर्ग फीट है जबकि मूल भूमि 1,48,104 वर्ग फीट की थी। उन्होंने दावा किया कि पार्वती ने देरी से बचने के लिए विजयनगर साइट को चुना, भले ही इसका बाजार मूल्य कम था। सीएम सिद्धारमैया ने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि, 'अगर उन्हें लगता है कि यह कानून के खिलाफ है, तो उन्हें बताना चाहिए कि यह कैसे सही है। अगर जमीन की कीमत 62 करोड़ रुपये है, तो उन्हें प्लॉट वापस ले लेना चाहिए और हमें उसी के अनुसार मुआवजा देना चाहिए।'


इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और अन्य के खिलाफ दायर दो निजी शिकायतों पर सांसदों/विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने सुनवाई की। यह शिकायत मैसूर निवासी शेहमयी कृष्णा द्वारा दायर की गई है। विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने शिकायत की स्वीकार्यता पर 20 अगस्त, 2024 तक आदेश सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए और धारा 19 के तहत पूर्व मंजूरी के सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता शेहमयी की ओर से पेश वकील ने कहा कि आईपीसी के तहत अपराधों पर अदालत विचार कर सकती है। दोनों शिकायतें मुख्य रूप से मैसूर शहर के प्रमुख स्थानों पर सिद्धारमैया की पत्नी के पक्ष में नियमों का उल्लंघन करते हुए 14 स्थलों के आवंटन से संबंधित हैं।

राज्य सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाया? 
जुलाई के मध्य में राज्य सरकार ने मुडा द्वारा जमीन के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। यह न्यायिक आयोग कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पीएन देसाई की अध्यक्षता में बनाया गया था। आयोग को अपनी जांच पूरी करने और सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। 
 
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