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Karnataka: 'जज को सिर्फ जांच अधिकारी के जुटाए सबूतों पर करना चाहिए भरोसा', रिहाई अर्जियों पर कर्नाटक हाईकोर्ट

Tue, 31 Dec 2024 04:59 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 31 Dec 2024 04:59 AM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस एचपी संदश ने हाल में दिए एक फैसले में रिहाई अर्जियों में बदलाव करने की सीमित गुंजाइश पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यवाही के दौरान मिनी-ट्रायल आयोजित करना स्वीकार्य नहीं है, बचाव पक्ष की दलीलों पर ध्यान नहीं दिया जा सकता।

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Karnataka High Court Said Judge should only rely on evidence collected by investigating officer
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : karnataka high court

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि रिहाई अर्जियों पर फैसला करते वक्त जजों को सिर्फ जांच अधिकारी (आईओ) के जुटाए साक्ष्यों पर ही भरोसा करना चाहिए। जस्टिस एचपी संदश ने हाल में दिए एक फैसले में रिहाई अर्जियों में बदलाव करने की सीमित गुंजाइश पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यवाही के दौरान मिनी-ट्रायल आयोजित करना स्वीकार्य नहीं है, बचाव पक्ष की दलीलों पर ध्यान नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह फैसला डॉ. मोहनकुमार एम की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए दिया।
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बता दें कि डॉ. मोहनकुमार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 109 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध को बढ़ावा देने के आरोप हैं। डॉ. मोहनकुमार पर एमएस रमैया मेडिकल कॉलेज में आरोपी की बेटी डॉ. सी अनीशा रॉय के लिए एमडी (पीडियाट्रिक्स) में दाखिला दिलाने के लिए 25 लाख रुपये के भुगतान की सुविधा देने का आरोप था। 
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साक्ष्यों में विसंगतियों की दी गई दलील
अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के बैंक स्टेटमेंट और आयकर दस्तावेजों समेत साक्ष्यों में विसंगतियों को उजागर किया। यह बताया गया कि 25 लाख रुपये के भुगतान से पहले डॉ. मोहनकुमार के खाते में 17.5 लाख रुपये नकद जमा किए गए थे, जो उनके कर दाखिलों में नहीं दर्शाया गया था।
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साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने डिस्चार्ज आवेदन को उचित रूप से अस्वीकार कर दिया था, इस बात पर जोर दिया था कि जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री को महज बचाव के तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता।
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