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HC: कार ओवरटेक करने पर बाइकसवारों को कराया गिरफ्तार, अब मजिस्ट्रेट को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, होगी कार्रवाई

Wed, 29 Jul 2026 07:43 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 29 Jul 2026 07:43 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को एक रोड रेज से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए मालुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के व्यवहार को अशोभनीय बताया। आरोप है कि सीजेएम ने अपनी कार को ओवरटेक करने के लिए दो बाइकसवार का न सिर्फ पीछा किया, बल्कि उनसे सरेराह बहस करने के बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और फिर दबाव बनाकर उन्हें गिरफ्तार भी करा दिया। 

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Karnataka High Court Road Rage incident involving CJM to be placed before Chief Justice news and updates
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मालुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को लगाई फटकार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार (29 जुलाई) को एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने से जुड़े मामले में कड़ी फटकार लगाई। मामला बाइकसवारों के मजिस्ट्रेट की गाड़ी को ओवरटेक करने और इसके चलते अफसर की तरफ से उनकी गिरफ्तारी कराए जाने से जुड़ा है। इसी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जज ने केस को सीधे उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के पास भेज दिया, ताकि न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। 
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क्या है मामला, जिसे लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट पर भड़के जज?

लाइव लॉ के मुताबिक, यह मामला एक रोड रेज यानी सड़क पर हुए विवाद से जुड़ा है, जिसमें न्यायिक अधिकारी (मजिस्ट्रेट) और दोपहिया वाहन पर सवार लोगों के बीच विवाद हुआ था।
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  • याचिकाकर्ता, जिसमें एक 70-72 वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल थे, एक दोपहिया वाहन पर जा रहे थे। उन्होंने एक न्यायिक अधिकारी की निजी कार को ओवरटेक किया। यह न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने पति के साथ कार में सवार थीं। 
  • बताया गया कि न्यायिक अधिकारी की गाड़ी काफी तेज गति से चल रही थी। जब बाइक सवारों ने अधिकारी और उनके पति से गाड़ी धीरे चलाने के लिए कहा तो इससे अधिकारी भड़क उठीं।
  • इसके बाद न्यायिक अधिकारी और उनके पति ने दोपहिया वाहन का पीछा उस जगह तक किया जहां वे (याचिकाकर्ता) एक घर का निर्माण कर रहे थे। अधिकारी ने अपनी कार से उतरकर एक आम आदमी के साथ झगड़ा किया। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई।

  • इस घटना के बाद, न्यायिक अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने उनके प्रभाव में आकर दोपहिया वाहन सवार बुजुर्ग और उनके साथ वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया।


हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?

यह मामला हाईकोर्ट तक तब पहुंचा जब गिरफ्तार हुए दोनों बाइक सवारों ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की। यह आपराधिक मामला मालुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से की गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। 

इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि मालुर के वकीलों ने पहले ही प्रशासनिक न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपकर संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी, जिसमें इस घटना के साथ-साथ उनकी ओर से की गई दूसरी घटनाओं का भी हवाला दिया गया था।
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उच्च न्यायालय ने मामले में क्या कहा?


1. न्यायिक पद के दुरुपयोग का उदाहरण
कर्नाटक उच्च न्यायालय के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने इस घटना और अधिकारी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कहा कि एक न्यायिक अधिकारी का कार से उतरकर आम आदमी से सिर्फ इसलिए झगड़ा करना, क्योंकि उसने गाड़ी धीरे चलाने को कहा था, एक न्यायिक अधिकारी के लिए पूरी तरह से अशोभनीय है। अदालत ने इसे न्यायिक पद के दुरुपयोग का एक जबरदस्त उदाहरण करार दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी का पद केवल कोर्ट रूम की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता है। यह एक निरंतर चलने वाला सार्वजनिक विश्वास है, और कोर्ट रूम के बाहर का आचरण भी न्यायपालिका पर जनता के भरोसे को बनाता या बिगाड़ता है।

2. 'नागरिकों के साथ नहीं हो सकता इस तरह का व्यवहार'
अदालत ने 70-72 वर्षीय बुजुर्ग के साथ एक अन्य याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी की आलोचना की। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि नागरिकों को केवल इसलिए हिरासत में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि शिकायत करने वाली एक न्यायिक अधिकारी है और नागरिकों के साथ किसी न्यायिक अधिकारी के इशारे पर इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।

जब सरकारी वकील ने न्यायिक अधिकारी की ओर से अपनी शक्ति के दुरुपयोग की एक और घटना का जिक्र किया, जिसमें एक पीडब्ल्यूडी अधिकारी को घर की मरम्मत न करने पर हिरासत में लेने का निर्देश दिया गया था, तो कोर्ट ने मौखिक रूप से तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "..क्या वह इसे अपनी निजी जागीर समझती है?..।"

अब न्यायिक मजिस्ट्रेट पर क्या कार्रवाई होगी?

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए इस पूरे आदेश और मामले को उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के सामने पेश करे। अदालत के इस कदम का मकसद न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करना है। कोर्ट ने उनके व्यवहार को न्यायिक पद के सर्वथा अशोभनीय माना, जिसके लिए उन्हें अब विभागीय जांच या कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

इसके अलावा जिस शिकायत के आधार पर न्यायिक अधिकारी ने बाइक सवारों (याचिकाकर्ताओं) को गिरफ्तार करवाया था, उच्च न्यायालय ने उस मामले में आगे की पुलिस जांच पर भी रोक लगा दी है। 
 
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